रूस का सैन्य सैटेलाइट Kosmos-2612 अक्टूबर 2026 में ICEYE-X36 नाम के एक रडार सैटेलाइट के बेहद करीब पहुंच गया. यह घटना 17 और 18 अक्टूबर के आसपास पृथ्वी से करीब 547 किलोमीटर ऊपर हुई. अंतरिक्ष में सैटेलाइट पर नजर रखने वाली कंपनी लियोलैब्स के मुताबिक, रूसी सैटेलाइट ने कई बार अपना रास्ता बदला और फिर ICEYE-X36 के पास पहुंच गया. दोनों के बीच की दूरी करीब 500 मीटर तक रह गई थी. हालांकि, कुछ दूसरे आंकड़ों में इससे भी कम दूरी का दावा किया गया है.
यह घटना इसलिए अहम है, क्योंकि ICEYE कंपनी के रडार सैटेलाइट से मिलने वाली तस्वीरों का इस्तेमाल यूक्रेन की सेना की मदद के लिए भी किया जाता है. इन तस्वीरों की खास बात यह है कि इनसे रात में और बादल छाए होने पर भी जमीन पर मौजूद चीजों को देखा जा सकता है. यह साफ नहीं है कि ICEYE-X36 से मिलने वाली तस्वीरें सीधे यूक्रेन को दी जा रही थीं या नहीं. रूसी सैटेलाइट का इस तरह दूसरे सैटेलाइट के करीब पहुंचना सामान्य नहीं थी.
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सितंबर से ही रास्ता बदल रहा था रूसी सैटेलाइट
रूस ने Kosmos-2612 को 16 अप्रैल 2026 को अंतरिक्ष में भेजा था. सितंबर के आखिर से इस सैटेलाइट की जगह में बदलाव होने लगे. 30 सितंबर, 12 अक्टूबर और 15-16 अक्टूबर को इसने अपना रास्ता बदला. इन बदलावों के बाद यह ICEYE-X36 के करीब पहुंच गया.
Russia’s military satellite Kosmos-2612 has maneuvered to within 26 meters of ICEYE-X36, a Finnish-American radar satellite whose imagery is supplied to Ukraine. Space analyst Georgy Trishkin said the near-zero relative speed could indicate an attempt to force ICEYE-X36 to make orbital corrections, potentially disrupting operations and using up its fuel. RAND researcher Michael Bohnert called the approach a show of force.
— Aleksandar Djokic (Александар Джокич) (@polidemitolog) October 20, 2026
16 अक्टूबर तक दोनों सैटेलाइट के बीच की दूरी कुछ किलोमीटर रह गई थी. इसके बाद रूसी सैटेलाइट ने अपनी जगह बदली और करीब दो दिन तक ICEYE-X36 के आसपास रहा. 18 अक्टूबर के बाद इसके उससे दूर जाने के संकेत मिले.
क्या दोनों सैटेलाइट के बीच सिर्फ 26 मीटर की दूरी थी?
इस घटना के बाद दावा किया गया कि दोनों सैटेलाइट के बीच की दूरी सिर्फ 26 मीटर रह गई थी. लेकिन इस आंकड़े की पक्की पुष्टि नहीं हुई है. विशेषज्ञों के मुताबिक, दोनों के बीच की सबसे कम दूरी कुछ सौ मीटर हो सकती है. एक सैटेलाइट ट्रैकिंग वेबसाइट ने 17 अक्टूबर को दोनों के बीच करीब 578 मीटर की दूरी का अनुमान लगाया था.
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सैटेलाइट की सही जगह का पता लगाने के लिए ट्रैकिंग से जुड़े आंकड़ों का इस्तेमाल किया जाता है. जब सैटेलाइट अपना रास्ता बदलते हैं, तो उनकी सही दूरी का पता लगाना मुश्किल हो सकता है. इसलिए 26 मीटर के आंकड़े को पक्का मानना सही नहीं होगा.
As just announced in the @UN First Committee, Russia’s COSMOS 2612 military satellite has been exhibiting threatening behavior by intentionally maneuvering dangerously close to a commercial satellite, behaviors consistent with on-orbit weapons operations. This violates long-established safety thresholds in low Earth orbit. The United States will continue to secure and defend American vital national security interests in, from, and to space.
— Under Secretary of State Thomas G. DiNanno (@UnderSecT) October 21, 2026
यूक्रेन के लिए क्यों अहम है यह सैटेलाइट?
ICEYE फिनलैंड में शुरू हुई कंपनी है, जो रडार सैटेलाइट बनाती है. ICEYE-X36 अमेरिका में रजिस्टर्ड है. इसके रडार की मदद से रात में और बादल होने पर भी धरती की तस्वीरें ली जा सकती हैं. जनवरी 2026 में ICEYE ने यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय से जुड़े एक ग्राहक के साथ अपना सहयोग बढ़ाने का ऐलान किया था.
कंपनी के सैटेलाइट से मिलने वाली तस्वीरें यूक्रेन की सेना को जमीन पर हो रही गतिविधियों को समझने में मदद करती हैं. हालांकि, यह साफ नहीं है कि ICEYE-X36 से मिलने वाली तस्वीरों का इस्तेमाल खास तौर पर यूक्रेन की सेना कर रही थी या नहीं.
किसी दूसरे सैटेलाइट के इतने करीब पहुंचने के लिए अपनी गति और रास्ते में बदलाव करना पड़ता है. इसके लिए सही जानकारी, तकनीक और ईंधन की जरूरत होती है. जब कोई सैटेलाइट दूसरे के आसपास लंबे समय तक रहता है, तो विशेषज्ञ उसकी गतिविधियों पर नजर रखते हैं.
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ऐसी हरकत से यह पता चल सकता है कि किसी देश के पास दूसरे सैटेलाइट के करीब पहुंचने की तकनीक है. इससे दूसरे सैटेलाइट की निगरानी भी की जा सकती है. लेकिन करीब पहुंचने से यह साबित नहीं होता कि रूस जासूसी कर रहा था या हमला करना चाहता था.
फिलहाल, दोनों सैटेलाइट के टकराने या ICEYE-X36 को नुकसान पहुंचने की कोई पुष्टि नहीं हुई है. यह घटना बताती है कि अब अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट की सुरक्षा भी देशों के बीच बढ़ते तनाव का अहम हिस्सा बन गई है.