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खुद का हथियार संभलता नहीं, चला है हूतियों को निपटाने... ऐसे हथियारों की बदौलत कैसे लड़ेगा PAK

डूरंड लाइन झड़प में पाकिस्तानी आर्टिलरी फायरिंग के दौरान फट गई. तीन जवान मारे, दो घायल. हथियार गुणवत्ता, रखरखाव और सीमा तनाव पर सवाल उठे.

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डूरंड लाइन के पास चीन में बनी तोप फायर करते समय फट गई. इससे तीन पाकिस्तानी सैनिक मारे गए. (Screengrab: X)
डूरंड लाइन के पास चीन में बनी तोप फायर करते समय फट गई. इससे तीन पाकिस्तानी सैनिक मारे गए. (Screengrab: X)

डूरंड लाइन पर हालिया झड़पों के दौरान एक पाकिस्तानी आर्टिलरी गन फायरिंग के वक्त फट गई. इस हादसे में तीन सुरक्षाकर्मी मारे गए और दो घायल हो गए. यह घटना उस समय हुई जब पाकिस्तान और अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के बीच सीमा पर तनाव चरम पर था. पाकिस्तानी सेना आर्टिलरी का इस्तेमाल कर अफगान ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई कर रही थी, लेकिन अपना ही हथियार दुश्मन बन गया. बताया जा रहा है कि ये चीन में बनी 130mm टाइप 59-1 गन थी.  

डूरंड लाइन, जो पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच विवादित सीमा है, लंबे समय से तनाव का केंद्र रही है. अक्टूबर 2026 के मध्य में कुर्रम जिले और अफगानिस्तान के पक्तिया प्रांत के दंड पाटन क्षेत्र के आसपास भीषण गोलीबारी हुई. दोनों पक्ष एक-दूसरे पर पहले गोली चलाने का आरोप लगा रहे हैं. 

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पाकिस्तानी सुरक्षा सूत्रों के अनुसार अफगान बलों ने चेकपॉइंट्स पर फायरिंग शुरू की, जिसके जवाब में पाकिस्तानी सेना ने आर्टिलरी से टॉपसर पोस्ट और शिपोला बेस कैंप जैसे ठिकानों को निशाना बनाया. इसी दौरा एक आर्टिलरी पीस फायर करते समय विस्फोट हो गया.

रिपोर्ट्स के मुताबिक इस हादसे में तीन जवान मौके पर ही मारे गए और दो घायल हुए. यह घटना सोशल मीडिया और कुछ सैन्य विश्लेषकों के बीच चर्चा का विषय बन गई. कई पर्यवेक्षकों ने इसे पाकिस्तानी सेना के हथियारों की गुणवत्ता और रखरखाव पर सवाल उठाने का मौका माना. सीमा पर आर्टिलरी का इस्तेमाल आम बात है, लेकिन अपना हथियार खुद को नुकसान पहुंचाए, यह सुरक्षा और प्रशिक्षण दोनों पर सवाल खड़ा करता है.

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हथियारों की गुणवत्ता और रखरखाव की समस्या

पाकिस्तान की सेना में कई आर्टिलरी सिस्टम पुराने हैं या विदेशी स्रोतों से आए हैं. चीनी मूल के कुछ सिस्टम और अन्य हथियारों के मिश्रण का जिक्र भी सोशल मीडिया पर हो रहा है. लंबे समय तक इस्तेमाल, कम रखरखाव, गोला-बारूद की गुणवत्ता या मैकेनिकल खराबी विस्फोट का कारण बन सकती है. 

युद्ध के मैदान में आर्टिलरी गन को तेजी से फायर करना पड़ता है. अगर बैरल में दबाव अधिक हो जाए, गोला जाम हो जाए या मेटल थकान हो, तो विस्फोट की संभावना बढ़ जाती है. यह अकेला मामला नहीं है. दुनिया की कई सेनाओं में कभी-कभी ऐसा होता है, लेकिन बार-बार होने पर यह सिस्टमिक समस्या दर्शाता है.

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पाकिस्तान आर्थिक संकट से जूझ रहा है. रक्षा बजट पर दबाव है. नई आधुनिक आर्टिलरी खरीदना या पुरानी का पूरा ओवरहॉल करना आसान नहीं. ऐसे में सीमा पर तनाव बढ़ने पर पुराने हथियारों पर निर्भरता बढ़ जाती है, जिससे जोखिम भी बढ़ता है.

क्षेत्रीय तनाव और रणनीतिक प्रभाव

पाकिस्तान-अफगानिस्तान संबंध पिछले वर्षों में और बिगड़े हैं. इस्लामाबाद तालिबान सरकार पर आरोप लगाता है कि वह टीटीपी जैसे समूहों को शरण दे रही है, जो पाकिस्तान के अंदर हमले करते हैं. काबुल इसे नकारता है और पाकिस्तान पर सीमा उल्लंघन का आरोप लगाता है. 

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इस साल कई झड़पें हो चुकी हैं, जिनमें दोनों तरफ हताहत हुए हैं. संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्थाओं की रिपोर्ट्स में सीमा पार हिंसा से नागरिकों की मौत का भी जिक्र है. ऐसे माहौल में अपना हथियार खुद के खिलाफ हो जाना न सिर्फ नैतिक बल्कि सैन्य रूप से भी बड़ा झटका है. यह दुश्मन को मनोवैज्ञानिक बढ़त देता है. 

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पाकिस्तानी सेना को अब न सिर्फ बाहरी खतरे बल्कि आंतरिक उपकरण विफलता से भी निपटना होगा. आर्टिलरी पाकिस्तान की पारंपरिक ताकत मानी जाती है, खासकर भारत के साथ संभावित संघर्ष में. लेकिन अगर बुनियादी रखरखाव और गुणवत्ता में कमी रहे तो बड़े संघर्ष में गंभीर समस्या खड़ी हो सकती है.

भविष्य की चुनौतियां और सबक

यह घटना पाकिस्तान के लिए कई सबक छोड़ती है. पहला, हथियारों के रखरखाव और गोला-बारूद की जांच को प्राथमिकता देनी होगी. दूसरा, सीमा पर तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास जरूरी हैं. तीसरा, आधुनिक और विश्वसनीय सिस्टम की ओर तेजी से बढ़ना होगा. आर्थिक तंगी के बावजूद रक्षा क्षेत्र में गुणवत्ता समझौता नहीं किया जा सकता.

डूरंड लाइन पर शांति नाजुक है. छोटी-छोटी घटनाएं बड़े संघर्ष में बदल सकती हैं. पाकिस्तानी आर्टिलरी का खुद के खिलाफ हो जाना सिर्फ एक तकनीकी हादसा नहीं, बल्कि व्यापक सुरक्षा चुनौतियों का प्रतीक है. जब अपना हथियार ही संभल न पाए, तो बाहरी दुश्मन से लड़ना और मुश्किल हो जाता है. क्षेत्र की स्थिरता के लिए दोनों देशों को संयम बरतना और संवाद बढ़ाना होगा, वरना ऐसी घटनाएं दोहराई जा सकती हैं.

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