रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने हाल ही अग्नि-5 मिसाइल और दिव्यास्त्र की बात कही थी. भारत की डिफेंस कैपेबिलिटी में अग्नि मिसाइल सिस्टम एक मजबूत ढाल की तरह काम करता है. यह सिर्फ एक हथियार नहीं है, बल्कि देश की संप्रभुता की रक्षा करने वाली एक रणनीतिक घोषणा है. अग्नि-1 से लेकर अग्नि-5 तक, भारत ने पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक से परमाणु निरोधक शील्ड बनाया है, जो महाद्वीपों तक सटीक हमले कर सकता है.
ठोस ईंधन तकनीक, सड़क पर चलने की क्षमता, MIRV (मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल री-एंट्री व्हीकल) और पिनप्वाइंट सटीकता के साथ यह सिस्टम भारत को अपनी शर्तों पर रक्षा करने की ताकत देता है. आइए, अग्नि मिसाइल सिस्टम, मिशन दिव्यास्त्र और इसके गेम चेंजर होने के बारे में विस्तार से जानें.
अग्नि मिसाइल सिस्टम की शुरुआत और विकास
अग्नि मिसाइल सिस्टम की शुरुआत 1980 के दशक में हुई थी, जब भारत ने अपनी रक्षा को मजबूत करने के लिए स्वदेशी बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम शुरू किया. यह डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन- DRDO द्वारा विकसित किया गया है. आज भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल है (जैसे अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन) जो MIRV तकनीक वाली मिसाइल बना सकते हैं.
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यह आत्मनिर्भर भारत का एक बड़ा उदाहरण है, जहां कंपोजिट रॉकेट मोटर, एडवांस्ड एवियोनिक्स और हाई-एक्यूरेसी नेविगेशन सिस्टम सब कुछ घरेलू हैं.
अग्नि सीरीज की मिसाइलें ठोस ईंधन पर चलती हैं, जो उन्हें जल्दी लॉन्च करने की सुविधा देती हैं. ये मोबाइल हैं यानी सड़क या रेल से कहीं भी ले जाकर फायर की जा सकती हैं. ये परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम हैं, जो भारत की 'नो फर्स्ट यूज' पॉलिसी को मजबूत बनाती हैं. मतलब, भारत पहले हमला नहीं करेगा, लेकिन अगर कोई हमला करे तो जवाब इतना घातक होगा कि दुश्मन दोबारा सोचेगा.
मुख्य अग्नि मिसाइल
अग्नि-1: शॉर्ट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल.
क्या कर सकती है?: पाकिस्तान के करीब के ठिकानों, जैसे लाहौर या इस्लामाबाद को टारगेट कर सकती है. अगर पाकिस्तान युद्ध शुरू करे, तो यह तुरंत जवाबी हमला कर दुश्मन की सेना या कमांड सेंटर को नेस्तनाबूद कर सकती है.
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अग्नि-2: मीडियम-रेंज मिसाइल
क्या कर सकती है?: पाकिस्तान के पूरे क्षेत्र को कवर करती है. चीन के कुछ हिस्सों तक पहुंच सकती है. युद्ध में यह दुश्मन के एयरबेस या मिसाइल साइट्स को तबाह कर सकती है, जिससे भारत की दूसरी स्ट्राइक क्षमता मजबूत होती है.
अग्नि-3: इंटरमीडिएट-रेंज

क्या कर सकती है?: चीन के दक्षिणी हिस्सों को टारगेट कर सकती है. अगर चीन हमला करे, तो यह बीजिंग के करीब के इलाकों को बर्बाद कर सकती है, जो दुश्मन को पीछे हटने पर मजबूर करेगा.
अग्नि-4: एडवांस्ड मीडियम-रेंज
क्या कर सकती है?: पाकिस्तान और चीन दोनों को कवर. युद्ध में यह दुश्मन की डिफेंस सिस्टम को भेदकर महत्वपूर्ण लक्ष्यों को नष्ट कर सकती है.
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अग्नि-5: क्राउन ज्वेल: इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM)
क्या कर सकती है?: अगर चीन युद्ध शुरू करे, तो एक ही अग्नि-5 कई शहरों या मिलिट्री बेस को एक साथ नष्ट कर सकती है. पाकिस्तान के मामले में यह ओवरकिल है, लेकिन पूरी तरह से कवर करती है. MIRV की वजह से दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) सिस्टम बेकार हो जाती है – एक वॉरहेड रोक सकते हो, लेकिन 5-6 को नहीं.
अग्नि-प्राइम (अग्नि-पी): साइलेंट गार्जियन
क्या कर सकती है?: मोबाइल होने से कहीं भी छिपाकर रखी जा सकती है. अगर पाकिस्तान या चीन पहले हमला करें, तो यह सेकंड स्ट्राइक के लिए परफेक्ट है – दुश्मन की आग के बीच भी लॉन्च हो सकती है और उनके ठिकानों को तबाह कर सकती है.
मिशन दिव्यास्त्र: MIRV तकनीक का कमाल
मार्च 2024 में लॉन्च हुआ मिशन दिव्यास्त्र अग्नि-5 का MIRV वर्जन है. MIRV का मतलब है कि एक मिसाइल कई वॉरहेड ले जाती है, जो अलग-अलग टारगेट्स पर गिरते हैं – सैकड़ों किलोमीटर दूर भी. यह दुश्मन की BMD सिस्टम को बेकार बनाता है.

उदाहरण के लिए, अगर चीन का S-400 या पाकिस्तान की कोई डिफेंस सिस्टम है, तो MIRV उन्हें चकमा दे सकती है. यह भारत की 'ट्रायड ऑफ डिटरेंस' (जमीन, समुद्र और हवा से हमला) को पूरा करता है. रेंज की रणनीतिक अस्पष्टता (अधिकारिक 5,000+ किमी) दुश्मन को डराती है – कोई लक्ष्य सुरक्षित नहीं.
अगर पाकिस्तान या चीन युद्ध शुरू करें तो क्या होगा?
पाकिस्तान के खिलाफ: पूरा पाकिस्तान अग्नि-1/2/पी की रेंज में है. अगर वे हमला करें, तो भारत मिनटों में इस्लामाबाद, कराची या मिलिट्री बेस को टारगेट कर सकता है. MIRV से कई ठिकाने एक साथ नष्ट हो सकते हैं, जो पाकिस्तान की सेना को कमजोर कर देगा. यह सेकंड स्ट्राइक सुनिश्चित करता है, मतलब पहले हमले के बाद भी जवाब मिलेगा.
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चीन के खिलाफ: अग्नि-5 और अग्नि-3/4 पूरा चीन कवर करते हैं. अगर चीन बॉर्डर पर आक्रामक हो, तो बीजिंग, शंघाई या तिब्बत के बेस टारगेट हो सकते हैं. MIRV की वजह से चीन की एंटी-मिसाइल सिस्टम (जैसे HQ-9) बेकार हो जाएगी. यह चीन को सोचने पर मजबूर करेगा. कुल मिलाकर, यह डिटरेंस है – युद्ध रोकने की ताकत.
शक्ति से ही मिलेगी शांति
अग्नि सिस्टम भारत को सिर्फ डिफेंड करने नहीं, बल्कि पावर प्रोजेक्ट करने की क्षमता देता है. DRDO की यह उपलब्धि आत्मनिर्भरता का प्रतीक है. लेकिन याद रखें, यह हथियार शांति के लिए है, न कि आक्रामकता के लिए. अगर दुश्मन युद्ध शुरू करें, तो अग्नि भारत की संप्रभुता की रक्षा करेगा.