गुवाहाटी में 15 अगस्त 2024 को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर IED लगाए जाने के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने पांच आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है. इसमें प्रतिबंधित संगठन ULFA (I) के चेयरमैन और कमांडर-इन-चीफ परेश बरुआ का नाम भी शामिल है. एजेंसी के मुताबिक, यह मामला असम में कई जगहों पर IED धमाके करने की साजिश से जुड़ा है.
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने असम के गुवाहाटी स्थित पानबाजार में IED बरामदगी के मामले में पांच आरोपियों के खिलाफ विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल की है. यह मामला 15 अगस्त 2024 को पानबाजार के मोतीलाल नेहरू रोड पर ULFA (I) की ओर से कथित तौर पर लगाए गए इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) से जुड़ा है.
NIA ने गुवाहाटी की विशेष अदालत में यह चार्जशीट दाखिल की है. आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023, गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA), 1967 और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, 1908 की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं.
NIA की चार्जशीट में प्रतिबंधित आतंकी संगठन ULFA (I) के चेयरमैन और सुप्रीम कमांडर-इन-चीफ परेश बरुआ का नाम शामिल है. इसके अलावा कनक सी. गोगोई उर्फ ऐशेंग असम, जह्नु बोरुआ, भार्गब गोगोई और सुमू गोगोई को भी आरोपी बनाया गया है.
एजेंसी ने इन सभी के खिलाफ संबंधित कानूनों की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप दर्ज किए हैं. हालांकि, चार्जशीट दाखिल होने का मतलब यह नहीं है कि आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोप अदालत में साबित हो चुके हैं.
15 अगस्त 2024 को दर्ज हुआ था केस
इस मामले में सबसे पहले गुवाहाटी के पानबाजार पुलिस स्टेशन में 16 अगस्त 2024 को केस दर्ज किया गया था. पुलिस ने इसे पानबाजार थाना केस नंबर 202/2024 के रूप में दर्ज किया था.
बाद में राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने 27 फरवरी 2025 को इस मामले को अपने हाथ में लेते हुए दोबारा दर्ज किया. NIA के यहां इस केस का रजिस्ट्रेशन नंबर RC-01/2025/NIA/GUW है. इसके बाद एजेंसी ने मामले की जांच की और अब पांच आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है.
असम में IED धमाकों की साजिश का आरोप
NIA के मुताबिक, यह मामला भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने की कथित साजिश से जुड़ा है. जांच एजेंसी का आरोप है कि आरोपियों ने असम में कई जगहों पर IED धमाके करने की योजना बनाई थी. इसमें गुवाहाटी के पानबाजार स्थित मोतीलाल नेहरू रोड भी शामिल था, जहां 15 अगस्त 2024 को IED लगाए जाने का मामला सामने आया था. एजेंसी के अनुसार, इस साजिश से लोगों की मौत या उन्हें चोट पहुंचने के साथ-साथ संपत्ति को नुकसान पहुंचने या उसके नष्ट होने का खतरा था.
जांच एजेंसी के अनुसार, कथित साजिश का मकसद भारत की एकता, अखंडता, सुरक्षा और संप्रभुता को खतरे में डालना और देश के लोगों में आतंक फैलाना था. इसी आधार पर आरोपियों के खिलाफ BNS, UAPA और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है. NIA ने स्पष्ट किया है कि मामले की आगे की जांच अभी जारी है. जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है.