scorecardresearch
 

A Tough Week: 7 दिन के अंदर लगे एक के बाद एक 3 झटके, आपकी जेब पर भी पड़ेगा असर

Inflation Impact: आम आदमी के लिए यह हफ्ता अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर बेहद चुनौतीपूर्ण रहा. एक तरफ रसोई का खर्च संभालना मुश्किल हो गया है, तो दूसरी तरफ महंगे कर्ज ने मासिक बजट का गणित बिगाड़ दिया है.

Advertisement
X
महंगाई में बढ़ोतरी से आम आदमी परेशान. (Photo: AI)
महंगाई में बढ़ोतरी से आम आदमी परेशान. (Photo: AI)

फेस्टिव सीजन का आगाज हो गया है, लेकिन इस बीच आर्थिक मोर्चे पर आम आदमी को एक के बाद एक तीन बड़े झटके लगे हैं. तीनों झटके हफ्ते भर के अंदर लगे हैं. जिससे आने वाले दिनों में हर घर का बजट बिगड़ सकता है. क्योंकि महंगाई आम आदमी को परेशान करने वाली है.

दरअसल, अचानक केंद्रीय बैंक के नीतिगत फैसलों और महंगाई की दरों ने आम आदमी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. खाने-पीने चीजें लगातार महंगी होती जा रही हैं. जो आंकड़े सबूत पेश कर रहे हैं. खुदरा महंगाई दर के बाद अब थोक महंगाई दर में भारी इजाफा देखने को मिला है.

पहला झटका (खुदरा महंगाई दर में बड़ा उछाल)
आम आदमी को सबसे पहला बड़ा झटका उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) यानी खुदरा महंगाई दर के रूप में मिला, जो सितंबर में तेजी से बढ़कर 5.54% पर पहुंच गई. जबकि अगस्त में खुदरा महंगाई दर 4.82% थी. खाद्य मुद्रास्फीति भी अगस्त के 5.97% से बढ़कर सितंबर में 7.74% पर पहुंच गई. सितंबर में खुदरा महंगाई दर का आंकड़ा पिछले करीब दो वर्षों में सबसे ऊपर है. रसोईघर का बजट संभालने वाली गृहिणियों के लिए यह किसी बड़े संकट से कम नहीं है, क्योंकि खुदरा महंगाई में बढ़ोतरी से खाने-पीने की चीजें महंगी हुई हैं. खासकर सब्जियों, दालों और रोजमर्रा की जरूरत की अन्य चीजों के महंगे होने से आम आदमी की थाली पर सीधा असर पड़ा है. एक साल में प्याज, चीनी और खाने के तेल की कीमतों में बड़ा इजाफा हुआ है.

Advertisement

दूसरा झटका (रेपो रेट में इजाफा)
पिछले हफ्ते महंगाई को काबू में करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मौद्रिक नीति समिति के फैसले के तहत नीतिगत ब्याज दर यानी रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट (0.25%) की बढ़ोतरी कर इसे 5.50% कर दिया है. इस कदम से बैंक कर्ज महंगे हो गए हैं. होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन लेने वाले करोड़ों मध्यम वर्गीय उधारकर्ताओं की EMI बढ़ गई है या उनके लोन की अवधि लंबी हो गई है. पहले से ही महंगाई की मार झेल रहे आम आदमी के लिए लोन की बढ़ी हुई किस्तें आर्थिक दबाव को और गहरा कर रही हैं.

तीसरा झटका (थोक महंगाई दर में भारी उछाल)
आम आदमी को तीसरा और सबसे करारा झटका थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई के मोर्चे पर मिला, जो सितंबर उछलकर 11.39% पर पहुंच गई, जबकि अगस्त में यह 9.92% थी. थोक बाजार में ईंधन, बिजली और विनिर्मित उत्पादों की कीमतों में आई भारी तेजी इसके मुख्य कारण रहे. 

थोक महंगाई का इस स्तर पर पहुंचना यह संकेत देता है कि आने वाले दिनों में कंपनियों की लागत बढ़ने से बाजार में सामान और ज्यादा महंगे हो जाएंगे, जिसका सीधा बोझ अंतिम उपभोक्ता यानी आम जनता को ही उठाना पड़ेगा. थोक महंगाई में बढ़ोतरी की एक बड़ी वजह खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेजी रही. सितंबर में खाद्य सूचकांक की महंगाई बढ़कर 8.66% हो गई, जो कि अगस्त में 7.05 फीसदी थी. इसके अलावा थोक महंगाई को ऊपर ले जाने में ईंधन और बिजली की कीमतों का भी बड़ा योगदान रहा. सितंबर में इस समूह की महंगाई दर बढ़कर 25.85% हो गई, जबकि अगस्त में यह 22.93 फीसदी थी.

Advertisement

खुदरा महंगाई सीधे तौर पर आम लोगों की ओर से खरीदी जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में बदलाव दिखाती है, जबकि थोक महंगाई थोक स्तर पर कीमतों की चाल बताती है. ऐसे में आम आदमी के लिए यह हफ्ता अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर बेहद चुनौतीपूर्ण रहा. एक तरफ रसोई का खर्च संभालना मुश्किल हो गया है, तो दूसरी तरफ महंगे कर्ज ने मासिक बजट का गणित बिगाड़ दिया है.

वैश्विक बाजार में कच्चे तेल और उर्वरकों की लागत बढ़ने से भी महंगाई पर दबाव पड़ सकता है. पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते तेल की ढुलाई को लेकर बनी अनिश्चितता ने ऊर्जा बाजार की चिंता बढ़ाई है.

42 में से 41 जरूरी सामान हुए महंगे
सरकारी प्राइस मॉनिटरिंग डेटा के मुताबिक हर रसोई में इस्तेमाल होने वाले 42 जरूरी सामानों में से 41 के खुदरा दाम बीते एक साल में तेजी से बढ़े हैं. प्याज के दाम में सबसे ज्यादा 113 फीसद का उछाल दर्ज किया गया, जबकि केवल आलू की कीमत में गिरावट आई है. चीनी, सूरजमुखी तेल, तूर दाल, चना दाल, पाम तेल, सोया तेल, सरसों तेल, चावल, चीनी,  गेहूं (आटा) और टमाटर के दाम पिछले एक साल में बढ़े हैं.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement