महंगाई दर
मुद्रास्फीति, इंफ्लेशन या महंगाई (Inflation) उन वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों के स्तर में वृद्धि है जो एक घर चलाने के लिए जरुरी है. इसे उन कीमतों के परिवर्तन की दर के रूप में मापा जाता है. आमतौर पर, कीमतें समय के साथ बढ़ती हैं (Inflation Rate), लेकिन कीमतें भी गिर सकती हैं.
इंफ्लेशन का संकेतक उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) है, जो घरों द्वारा उपभोग की जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं की कीमत में अतर को प्रतिशत में मापता है (Measurement of Inflation Rate).
मुद्रास्फीति एक अर्थव्यवस्था में वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में सामान्य वृद्धि है. जब सामान्य मूल्य स्तर बढ़ता है, मुद्रा की प्रत्येक इकाई कम सामान और सेवाएं खरीदती है. इंफ्लेशन (Inflation) के विपरीत अपस्फीति यानी डिफ्लेशन है (Deflation), वस्तुओं और सेवाओं के सामान्य मूल्य स्तर में निरंतर कमी को दर्शाता है. मुद्रास्फीति का सामान्य उपाय मुद्रास्फीति दर है. एक सामान्य मूल्य सूचकांक में वार्षिक प्रतिशत परिवर्तन है. कीमतें एक ही दर से नहीं बढ़ती हैं इसलिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) अक्सर इस उद्देश्य के लिए उपयोग किया जाता है (Inflation Rate).
Basmati Rice Price Hike: चावल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है. चीनी, प्याज की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद अब Rice Price बढ़ने से आम आदमी को झटका लगा है.
Cigarette Price Hike: गोल्ड फ्लैक और क्लासिक सिगरेट पीने वालों को का खर्च बढ़ गया है. इन्हें बनाने वाली कंपनी आईटीसी ने कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है.
SBI रिसर्च के मुताबिक कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, बाहरी झटके और महंगाई से जुड़े जोखिम ब्याज दरों में बढ़ोतरी की जरूरत पैदा कर सकते हैं. SBI रिसर्च के एक मॉडल में अगले 15 दिनों में क्रूड के 123 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया है.
महंगाई ने आम आदमी की जेब पर दबाव बढ़ा दिया है. रसोई में प्याज, लहसुन और अदरक के बढ़ते दामों से खाने-पीने का खर्च बढ़ा, तो ऊर्जा कीमतों में तेजी ने आगे की चिंता बढ़ा दी है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अगस्त में खुदरा महंगाई 4.82% और थोक महंगाई 9.92% रही.
अगस्त में थोक महंगाई लगातार दूसरे महीने बढ़ी है और खाने-पीने की चीजों से लेकर ईंधन, बिजली और तैयार सामान तक कई क्षेत्रों में कीमतों का दबाव दिखाई दिया है. सबसे ज्यादा तेजी फ्यूल और पावर सेक्टर में रही, जबकि फूड इंडेक्स की महंगाई भी बढ़ी.
Donald Trump Tension: अमेरिका में महंगाई की मार लगातार पड़ रही है और डीजल की कीमतों में तेज उछाल ने डोनाल्ड ट्रंप की टेंशन को हाई पर पहुंचा दिया है और America में ये सब ईरान युद्ध के चलते तेल-गैस महंगा होने के चलते देखने को मिल रहा है.
Petrol-Diesel To Bred Price Hike: पड़ोसी देश में जनता पर दनादन महंगाई की मार पड़ रही है. 10 सितंबर के लिए जहां सरकार ने पेट्रोल-डीजल महंगा किया, तो वहीं कुछ समय से आटा महंगा होने से रोटी को मोहताज लोगों के लिए ब्रेड की कीमतों में भी बढ़ गई हैं.
चीनी की बढ़ती कीमतों से परेशान ग्राहकों के लिए राहत की खबर है. देशभर में चीनी का औसत रिटेल भाव एक हफ्ते में करीब 4% घटा है. थोक बाजार में भी कीमतों में नरमी आई है. हालांकि, दुकानों पर इसका पूरा असर दिखने में अभी समय लग सकता है, क्योंकि रिटेलर्स के पास महंगा पुराना स्टॉक मौजूद है.
Pakistan Crisis: पाकिस्तान में खाने-पीने की चीजें लोगों की पहुंच से दूर होती जा रही हैं. देश में हालात यहां तक बदतर हो चुके हैं कि एक चौथाई परिवार भूख से जूझ रहे हैं.
देश में पिछले कुछ दिनों से विपक्ष लगातार आम लोगों के सामने बढ़ती चुनौतियों का मुद्दा उठा रहा है. पेट्रोल-डीजल एथेनॉल से लेकर चीनी-प्याज तक के मुद्दे विपक्ष उठा रहा है, लेकिन सरकार इसे बस सियासत बताती है. आखिर देश के लोगों की राय में अर्थव्यवस्था और आम आदमी की आर्थिक स्थिति का क्या हाल है? देखें दंगल.
IMF Chief Alert: अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की ओर से ग्लोबल इकोनॉमी में सुस्ती को लेकर बड़ा अलर्ट दिया गया है और कहा है अमेरिका-ईरान में भले ही युद्ध थम गया है, लेकिन ऊर्जा संकट अभी खत्म नहीं हुआ है.
Why Sugar Price Hike: हालिया कीमतों में बढ़ोतरी मुख्यतौर पर त्योहारी मांग, पैदावार में कमी, मौसम की मार, अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उछाल और कुछ स्तरों पर जमाखोरी कारण हैं.
ISMA On Sugar Price Hike: चीनी की कीमतों में आए तगड़े उछाल को लेकर इंडियन शुगर मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन का कहना है कि इथेनॉल की वजह से ये महंगी नहीं हुई है, बल्कि इसके पीछे दूसरे बड़े कारण हैं.
भारत ही नहीं, पूरी दुनिया में चीनी की कीमत में इजाफा हो रहा है, जिस कारण चीनी का संकट पैदा होता हुआ दिख रहा है. इसके पीछे दो वजह ब्राजील और मौसम को माना जा रहा है.
चीनी से लेकर प्याज तक, दाल से खाद्य तेल तक की कीमतों में उछाल ऐसा आया है, सारा असर आम आदमी की जेब पर पड़ रहा है. एक तो त्योहारों का सीजन, ऊपर से महंगाई की मार ने घरेलू बजट बिगाड़ कर रख दिया है. आखिर क्यों अचानक से चीनी के दाम 70 रुपए किले तक पहुंच गए, और क्यों प्याज महंगाई के आंसू रुला रही है? देखें 10 तक.
Modi Govt On Onion Price Hike: सरकार ने भरोसा दिलाया है कि देश में प्याज पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है और इसकी कीमतों में ताजा बढ़ोतरी को कंट्रोल करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं.
Onion Price Hike After Sugar: चीनी की बढ़ती कीमतों ने पहले ही रसोई का बजट बिगाड़ दिया, तो वहीं अब रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली प्याज भी आंसू निकालती नजर आ रही है. दिल्ली-NCR समेत देश के तमाम शहरों में प्याज महंगी हुई है.
पिछले एक महीने से महंगाई में उछाल जारी है. खाने के तेल से लेकर प्याज और अन्य पदार्थों की कीमतों में उछाल देखा गया है. खासकर चीनी की कीमत एक हफ्ते के दौरान 7 रुपये तक बढ़ चुकी है. इसके आलावा, प्याज की कीमतों में 4 से 5 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है.
राशन की दुकानों तक कम कीमत में चीनी पहुंचाने वाला यह सिस्टम करीब एक दशक पहले बंद कर दिया गया था. अब बढ़ती कीमतों के बीच इसकी वापसी की मांग ने पुराने सिस्टम को फिर चर्चा में ला दिया है.
Saria Price Surge: हाउस कंस्ट्रक्शन में अहम रोल निभाने वाले सरिया का भाव दिल्ली, रायपुर, गोवा से लेकर चेन्नई तक में अचानक बढ़ गया है और बिल्डिंग मैटेरियल की कीमतों में गिरावट का इंतजार कर रहे लोगों को झटका लगा है.
Global Food Crisis Warning: अगले साल दुनिया में बड़ा खाद्य संकट देखने को मिल सकता है. जेपी मॉर्गन ने चेतावनी देते हुए इसके पीछे के बड़े कारणों का जिक्र किया है और इस क्राइसिस का असर भारत, ब्राजील समेत अन्य देशों पर ज्यादा होने का अलर्ट किया है.