महंगाई दर
मुद्रास्फीति, इंफ्लेशन या महंगाई (Inflation) उन वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों के स्तर में वृद्धि है जो एक घर चलाने के लिए जरुरी है. इसे उन कीमतों के परिवर्तन की दर के रूप में मापा जाता है. आमतौर पर, कीमतें समय के साथ बढ़ती हैं (Inflation Rate), लेकिन कीमतें भी गिर सकती हैं.
इंफ्लेशन का संकेतक उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) है, जो घरों द्वारा उपभोग की जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं की कीमत में अतर को प्रतिशत में मापता है (Measurement of Inflation Rate).
मुद्रास्फीति एक अर्थव्यवस्था में वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में सामान्य वृद्धि है. जब सामान्य मूल्य स्तर बढ़ता है, मुद्रा की प्रत्येक इकाई कम सामान और सेवाएं खरीदती है. इंफ्लेशन (Inflation) के विपरीत अपस्फीति यानी डिफ्लेशन है (Deflation), वस्तुओं और सेवाओं के सामान्य मूल्य स्तर में निरंतर कमी को दर्शाता है. मुद्रास्फीति का सामान्य उपाय मुद्रास्फीति दर है. एक सामान्य मूल्य सूचकांक में वार्षिक प्रतिशत परिवर्तन है. कीमतें एक ही दर से नहीं बढ़ती हैं इसलिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) अक्सर इस उद्देश्य के लिए उपयोग किया जाता है (Inflation Rate).
FMCG Products May Costlier: जून तिमाही में अपने सामनों की कीमतों में बढ़ोतरी कर ग्राहकों को झटका देने के बाद अब एफएमसीजी कंपनियों सितंबर तिमाही में कीमतें बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं.
महाराष्ट्र में मंगलवार से दूध खरीदने वालों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ने वाला है. राज्य में गाय और भैंस दोनों तरह के दूध के दाम 2 रुपये प्रति लीटर बढ़ाए जाएंगे. डेयरियों का कहना है कि डीजल, पैकेजिंग और दूध खरीद की बढ़ती लागत के चलते कीमतों में इजाफा जरूरी हो गया है. साथ ही डेयरी उत्पाद भी 10 फीसदी तक महंगे होंगे.
फेस्टिव सीजन से ठीक पहले आम आदमी की रसोई और जेब दोनों का बजट बुरी तरह गड़बड़ा गया है. प्राइस मॉनिटरिंग सिस्टम के आंकड़ों से खुलासा हुआ है कि बीते 5 महीनों में राशन के लगभग हर समान के रेट में इजाफा हुआ है.
RBI On Repo Rate: रिजर्व बैंक ने एमपीसी बैठक के नतीजों का ऐलान कर दिया है. आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि इस बार भी Repo Rate स्थिर रखा गया है.
अगस्त से कई रोजमर्रा के सामान और उपभोक्ता उत्पाद महंगे हो सकते हैं. बाजार विशेषज्ञों और कंपनियों के संकेतों के अनुसार एफएमसीजी उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक्स, कारें और कुछ अन्य वस्तुओं की कीमतों में चरणबद्ध बढ़ोतरी की संभावना है. बढ़ती लागत, वैश्विक बाजार की स्थिति और सप्लाई चेन पर दबाव को इसकी प्रमुख वजह माना जा रहा है. इससे आम लोगों के मासिक बजट पर असर पड़ सकता है.
तीज, रक्षाबंधन और आगामी त्योहारी सीजन से पहले महंगाई ने रसोई का बजट बिगाड़ने के संकेत दे दिए हैं. पिछले एक महीने में गेहूं की कीमतें 8 फीसदी से अधिक बढ़ चुकी हैं, जबकि सोयाबीन, सूरजमुखी और पाम ऑयल की कीमतों पर भी दबाव बना हुआ है.
Inflation Double Attack: खुदरा के बाद अब देश में थोक महंगाई भी बढ़ गई है. सरकार की ओर से मंगलवार को WPI Data जारी किया गया, जो अनुमानों से भी ज्यादा रहा है.
June Retail Inflation Rise: सरकार ने जून महीने के महंगाई दर के आंकड़े जारी कर दिए हैं. पांच महीने के बाद देश में खुदरा महंगाई दर आरबीआई के तय लक्ष्य 4% को पार कर गई है.
Stock Market Crash Signal: शेयर बाजार में बड़ी गिरावट के संकेत विदेशों से मिल रहे हैं. अमेरिकी बाजारों में गिरावट के बाद एशियाई शेयर मार्केट सोमवार को खुलने के साथ ही क्रैश नजर आए हैं.
Apple Economy In Crisis: मिडिल ईस्ट में युद्ध थमने के बाद से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतें टूट रही हैं, अनियमित मानूसन एक बड़ा खतरा बन रहा है. इसकी चपेट में हिमाचल प्रदेश की करीब 5000 करोड़ की सेब अर्थव्यवस्था भी नजर आ रही है.
8वें वेतन आयोग के तहत मिनिमम बेसिक सैलरी में बड़ी बढ़ोतरी की उम्मीद की जा रही है. उम्मीद की जा रही है कि इस आयोग के तहत कर्मचारियों की सैलरी 3 गुना बढ़ सकती है, लेकिन सच में क्या ऐसा होगा?
8वें वेतन आयोग के लागू होने में अभी समय लगने वाला है. ऐसे में कर्मचारियों को इससे पहले सैलरी में बढ़ोतरी का तोहफा दिया जा सकता है.
10 साल में महंगाई तेजी से बढ़ी है. मई 2026 में रिटेल महंगाई दर बढ़कर 3.93% हो गई, जो अप्रैल में 3.5% थी. वहीं, खाद्य महंगाई 4.8% तक पहुंच गई.
Iran-Israel Attack के चलते ग्लोबल टेंशन चरम पर है और दुनिया में तेल-गैस का पहले से जारी संकट बढ़ता नजर आ रहा है. ईरान ने होर्मुज के बाद अब बाब-अल-मंदेब समुद्री रास्ते को लेकर वॉर्निंग दी है, वहीं तेल की कीमतें अचानक उछल गई हैं.
US-Iran Peace Deal के बाद आखिरकार होर्मुज ओपन हो गया है और कच्चे तेल की कीमतें क्रैश नजर आ रही हैं, जो बीते कुछ समय से महंगाई का जोखिम बढ़ा रही थीं. लेकिन सिर्फ तेल ही नहीं बल्कि भारतीय परिवारों के लिए एक और बड़ा जोखिम सामने है.
कंपनी को 10 रुपये का कैरी बैग देना भारी पड़ गया है. आयोग ने फैसला सुनाया है कि रेड टेप को 10 रुपये के बदले 8000 रुपये का भुगतान करना होगा.
US-Iran के बीच शांति समझौते का असर भारत में देखने को मिलने लगा है. कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने महंगाई का जोखिम कम किया है, तो शेयर बाजार का जोश हाई कर दिया है, यही नहीं भारतीय रुपया भी मजबूती पकड़ता नजर आ रहा है.
Stock Market में बीते सप्ताह की तेजी जारी रहेगी, या फिर इस पर ब्रेक लगेगा. अगले सप्ताह सेंसेक्स-निफ्टी की चाल चार प्रमुख कारणों पर निर्भर करेगी. इनमें महंगाई के आंकड़ों से लेकर कच्चे तेल की कीमत तक शामिल है.
Retail Inflation Surge: देश की आम जनता को एक बार फिर से महंगाई का झटका लगा है. सरकार ने मई महीने के आंकड़े जारी किए हैं और रिटेल महंगाई 3.93% पर पहुंच गई है.
US-Iran War: अमेरिका और ईरान में फिर से शुरू हुई जंग ने तेल की कीमतों में एक बार फिर उबाल ला दिया है और इन बढ़ती कीमतों ने दुनिया के तमाम देशों में महंगाई को जोखिम फिर से बढ़ा दिया है.
Trump Tension: अमेरिका और ईरान में जंग फिर तेज हो गई है और ये दुनिया की टेंशन बढ़ाने वाली है. इस बीच जंग से अमेरिका भी झुलस रहा है औऱ बढ़ती महंगाई डोनाल्ड ट्रंप की सिरदर्दी बनती जा रही है.