मान लीजिए आपके पास ₹5 लाख की FD (फिक्स्ड डिपॉजिट) है और आपने इसे 2 साल के लिए कराया है. आपको लग रहा है कि 2 साल पूरे होने पर पैसा करीब ₹5.72 लाख हो जाएगा. लेकिन अचानक ऐसी जरूरत आ जाए कि 10 महीने में ही FD तोड़नी पड़े, तो पूरा हिसाब बदल सकता है. बैंक आपको 2 साल की तय ब्याज दर देने के बजाय उस अवधि के लिए लागू दर के हिसाब से ब्याज दे सकता है. ऊपर से समय से पहले FD तोड़ने पर पेनल्टी भी लग सकती है. ऐसे में करीब ₹51,000 का अंतर बन सकता है.
FD बीच में तोड़ने पर क्या होता है?
FD यानी फिक्स्ड डिपॉजिट (Fixed Deposit) को सुरक्षित निवेश माना जाता है, क्योंकि इसमें बैंक में जमा रकम पर पहले से तय दर से ब्याज मिलता है. लेकिन FD की पूरी अवधि खत्म होने से पहले पैसा निकालने पर बैंक की शर्तें बदल सकती हैं. आमतौर पर बैंक यह देखता है कि FD वास्तव में कितने समय तक चली. इसके आधार पर उस अवधि के लिए लागू ब्याज दर से भुगतान किया जा सकता है. यानी 2 साल के लिए FD कराते समय जो दर तय हुई थी, वह समय से पहले पैसा निकालने पर जरूरी नहीं कि उसी तरह लागू हो.
7% की दर वाली FD का उदाहरण
मान लीजिए आपने ₹5 लाख की फिक्स्ड डिपॉजिट 2 साल के लिए कराई और बैंक ने 7% सालाना ब्याज तय किया. अगर FD पूरी 2 साल की अवधि तक चलती है, तो सालाना चक्रवृद्धि के आधार पर मैच्योरिटी रकम करीब ₹5.72 लाख हो सकती है. यानी करीब ₹72,000 का ब्याज बनता है. लेकिन अब मान लीजिए आपको सिर्फ 10 महीने बाद ही पैसों की जरूरत पड़ गई और आपने FD तोड़ दी.
इस स्थिति में मान लेते हैं कि बैंक 10 महीने की FD के लिए उस समय 6% सालाना ब्याज दर लागू करता है. साथ ही समय से पहले FD बंद करने पर 1% पेनल्टी लगती है. ऐसे में 2 साल की 7% दर के बजाय प्रभावी ब्याज करीब 5% रह जाएगा. ₹5 लाख पर 5% सालाना दर से 10 महीने का साधारण हिसाब करीब ₹20,833 ब्याज का बनता है.
यानी रकम करीब ₹5.21 लाख हो सकती है. इसके मुकाबले अगर FD 2 साल पूरी चलती है, तो रकम करीब ₹5.72 लाख होती. इस उदाहरण में दोनों रकम के बीच करीब ₹51,000 का अंतर बनता है. ध्यान रहे कि यह सिर्फ समझाने के लिए उदाहरण है. वास्तविक रकम बैंक की प्रीमैच्योर क्लोजर पॉलिसी, लागू ब्याज दर, ब्याज की गणना के तरीके और FD की शर्तों पर निर्भर करेगी.
बैंक की पेनल्टी जरूर चेक करें
FD तोड़ने से पहले सिर्फ ब्याज दर देखना काफी नहीं है. बैंक की प्रीमैच्योर क्लोजर (Premature Closure) शर्त भी देखनी चाहिए. अलग-अलग बैंक और अलग-अलग FD में नियम अलग हो सकते हैं. कहीं पेनल्टी लागू हो सकती है, तो कहीं ब्याज की दर में अलग तरीके से बदलाव हो सकता है. इसलिए FD खोलते समय और उसे समय से पहले बंद करते समय बैंक की शर्तों को देखना जरूरी है.
FD तोड़ने से पहले अन्य विकल्प देखें
अगर पैसों की जरूरत सिर्फ कुछ समय के लिए है और आपकी FD को तोड़ने पर ब्याज का बड़ा नुकसान हो रहा है, तो बैंक से FD के बदले लोन या ओवरड्राफ्ट की सुविधा के बारे में पूछा जा सकता है. इसमें FD को समय से पहले बंद करने की जरूरत नहीं पड़ सकती, लेकिन लोन या ओवरड्राफ्ट पर ब्याज देना होता है. इसलिए दोनों विकल्पों की लागत की तुलना करने के बाद ही फैसला करना बेहतर है. एक और बात ध्यान रखें कि ऊपर दिए गए उदाहरण में टैक्स शामिल नहीं है. FD के ब्याज पर लागू टैक्स आपकी स्थिति के अनुसार अलग हो सकता है. इसलिए हाथ में आने वाली वास्तविक रकम इससे कम हो सकती है.