कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने एक बड़ा बदलाव (EPFO Rule Change) किया है. ईपीएफओ कवरेज के लिए सैलरी लिमिट को पहले के 15,000 रुपये प्रति माह से बढ़ाकर 25,000 रुपये मंथली कर दिया गया है, जो अक्टूबर महीने से लागू हो जाएगी. यानी पहले की सैलरी लिमिट के तहत ₹20,000 प्रति माह की बेसिक-पे पर नौकरी ज्वाइन करने वाला कर्मचारी वैधानिक सीमा से ऊपर था और खुद ही इसके दायरे में नहीं आता था.
नए बदलाव से क्या बदलेगा?
अब EPFO New Rule में सैलरी लिमिट 25,000 तक बढ़ने के बाद वो भी अनिवार्य कवरेज के तहत आएगा यानी उसका पीएफ पेंशन में योगदान शुरू हो जाएगा. सरकार को उम्मीद है कि 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी अब पीएफ के दायरे में आ सकेंगे. मतलब 20 हजार रुपये सैलरी वाले कर्मचारी को रिटायरमेंट के लिए जमा PF का लाभ मिलेगा, EPS के तहत पेंशन का पात्र होगा, कर्मचारी जमा से जुड़ी बीमा योजना (EDLI) के तहत बीमा कवर मिल सकेगा.
EPFO की वेतन सीमा बढ़ने से ईपीएफ नियमों के अधीन अधिक कर्मचारी अनिवार्य भविष्य निधि के दायरे में आ गए हैं, लेकिन 20,000 रुपये, 25,000 रुपये और 35,000 रुपये मंथली सैलरी वाले कर्मचारियों पर इसका प्रभाव उनके PF वेतन और EPS के लिए पात्रता के आधार पर अलग-अलग होगा.
पहला: 20,000 रुपये सैलरी
जिस कर्मचारी का पीएफ वेतन ₹20,000 है, वह ईपीएफ में 12% का योगदान देगा, जिसका अर्थ है कि कर्मचारी का मासिक योगदान ₹2,400 होगा. नियोक्ता भी 12%, यानी ₹2,400 का योगदान देता है. ईपीएस के लिए पात्र कर्मचारी के लिए, पीएफ वेतन का 8.33% यानी लगभग ₹1,666, ईपीएस में जाता है, जबकि शेष ₹734 ईपीएफ में जाता है. इसके अलावा नियोक्ता भी EDLI में 0.5% का योगदान देगा, जिससे पात्र मेंबर्स को बीमा- कवरेज मिलेगा.
अब इस कैलकुलेशन से समझें, तो जो कर्मचारी पहले अनिवार्य ईपीएफओ कवरेज से बाहर थे, उनके लिए तत्काल सबसे बड़ा बदलाव ये है कि उनके मासिक वेतन में ₹2,400 की कमी आएगी, हालांकि इसके बदले में वे EPF Saving कर सकेंगे और लागू पेंशन और बीमा लाभ पा सकेंगे.
दूसरा: 25,000 रुपये सैलरी
अब 25,000 रुपये मंथली सैलरी लिमिट पर बात करें, तो इतना वेतन पाने वाले कर्मचारी का अंशदान प्रति माह ₹3,000 बनता है. नियोक्ता का अंशदान भी इतना ही है. EPS के लिए पात्र कर्मचारी के 2,083 रुपये जाएंगे, जबकि शेष लगभग 917 रुपये EPF में जमा होगा. नियोक्ता का ईडीएलआई अंशदान 125 रुपये होगा. मतलब साफ है कि कर्मचारी को 20,000 रुपये के पीएफ वेतन वाले व्यक्ति की तुलना में अधिक मासिक कटौती का सामना करना पड़ेगा.
तीसरा: 35,000 रुपये सैलरी
सबसे बड़ा पेंच इस सैलरी पर देखने को मिल सकता है. प्रति माह ₹35,000 कमाने का यह मतलब नहीं है कि कर्मचारी का ईपीएफ अंशदान स्वतः ही ₹35,000 का 12% होगा. जहां लागू अंशदान ₹25,000 की वेतन सीमा के अधीन है, वहां ₹35,000 वेतन पाने वाले कर्मचारी का ईपीएफ अंशदान ₹4,200 के बजाय ₹3,000 हो सकता है.
| पीएफ वेतन | ईपीएफ (12%) | नियोक्ता शेयर (12%) | ईपीएस (8.33%) | नियोक्ता ईपीएफ | ईडीएलआई (0.5%) |
| ₹20,000 | ₹2,400 | ₹2,400 | ₹1,666 | ₹734 | ₹100 |
| ₹25,000 | ₹3,000 | ₹3,000 | ₹2,083 | ₹917 | ₹125 |
| ₹35,000 | ₹3,000** | ₹3,000** | —** | ₹3,000** | ₹125** |
EPS कटौती में चेंज देखने को मिल सकता है. अगर कोई कर्मचारी लागू नियमों के तहत ईपीएस सदस्यता के लिए पात्र नहीं है, तो नियोक्ता का अंशदान ईपीएफ और ईपीएस के बीच डिवाइड होने के बजाय ईपीएफ में जा सकता है.
कर्मचारी रखें इन बातों का ध्यान
ऐसे में कर्मचारियों को नई सैलरी लिमिट के प्रभाव का आकलन करते समय अपने ग्रॉस सेलरी से आगे भी देखना चाहिए. सैलरी स्लिप पर मुख्य आंकड़ा पीएफकी वह राशि है, जिसका उपयोग अंशदान की कैलकुलेशन के लिए होता है. अक्टूबर से नए कर्मचारियों को कुछ जानकारियां जरूर देखनी चाहिए.
संशोधित Salary Limit का मतलब नए शामिल किए गए कर्मचारियों के लिए मंथली टेक-होम सैलरी में कमी हो सकती है, लेकिन यह उन्हें पात्रता और लागू नियमों के अधीन ईपीएफओ के व्यापक सामाजिक सुरक्षा ढांचे में शामिल कराता है.