क्या इस्तेमाल हो चुकी कारपेट टाइल्स किसी घर की दीवारें बन सकती हैं. अमेरिका के अलबामा के हेल काउंटी में बना एक प्रयोगात्मक घर दो दशक से ज्यादा समय बाद भी यह दिखाता है कि सीमित संसाधनों के बीच डिजाइन किस तरह लोगों की जरूरतों को केंद्र में रखकर तैयार किया जा सकता है. इसे ‘लूसी कारपेट हाउस’ (Lucy Carpet House) के नाम से जाना जाता है.
यह घर 2002 में ऑबर्न यूनिवर्सिटी के ऑफ-कैंपस डिजाइन-बिल्ड प्रोग्राम रूरल स्टूडियो (Rural Studio) के साथ काम कर रहे 6 छात्रों ने बनाया था, स्टूडियो के सह-संस्थापक सैमबो मॉकबी ने लूसी और एंडरसन हैरिस और उनके बच्चों के लिए इस चैरिटी हाउस का कॉन्सेप्ट तैयार कराया था. टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट का मकसद परिवार की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कम लागत में घर तैयार करना था.
72 हजार कारपेट टाइल्स से बनीं दीवारें
इस घर की सबसे खास बात इसकी दीवारें हैं. इसमें 72,000 अलग-अलग कारपेट टाइल्स को एक के ऊपर एक रखकर दीवारें बनाई गई हैं, इन्हें भारी लकड़ी के रिंग बीम की मदद से दबाकर मजबूती दी गई है. घर में ऊपर एक बेडरूम और नीचे एक टॉरनेडो शेल्टर बनाया गया है. अलबामा का यह इलाका तेज तूफानों के लिए जाना जाता है, इसलिए घर की डिजाइन में खराब मौसम से सुरक्षा को भी खास जगह दी गई.
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इस प्रोजेक्ट को इंटरफेस कारपेट ने फंड किया था. कंपनी ने इसके लिए 30,000 डॉलर और 72,000 पाउंड इस्तेमाल हो चुकी कारपेट टाइल्स दी थीं. इन टाइल्स को करीब सात साल तक स्टोर करके रखा गया था, ताकि उनमें मौजूद गैसें निकल जाएं और निर्माण में इस्तेमाल से पहले वे सुरक्षित हो जाएं.
रीसाइकिल की गई कारपेट टाइल्स को दीवारों में इस्तेमाल करने से छात्रों की सीमित बजट में निर्माण करने की चुनौती काफी हद तक आसान हो गई, इससे बची रकम से लूसी की वह खास इच्छा पूरी की जा सकी, जो वह अपने नए घर में चाहती थीं. एक ऐसी जगह जहां वह प्रार्थना कर सकें.
आसमान की ओर खुलता है प्रार्थना टावर
लूसी का बेडरूम एक अलग तरह के टावर के रूप में डिजाइन किया गया है, जो सीधे आसमान की ओर खुलता है. बिस्तर पर लेटे हुए लूसी ऊपर आसमान को देख सकती हैं. टावर की अलग-अलग सतहों पर पड़ने वाली रोशनी और परछाइयां कमरे के अंदर लगातार बदलता हुआ दृश्य बनाती हैं,
यह डिजाइन सिर्फ वास्तुकला का प्रयोग नहीं था, बल्कि घर में रहने वाले व्यक्ति की निजी जरूरत को वास्तुकला का हिस्सा बनाने का उदाहरण भी था.
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‘बनाते हुए सीखना’ है Rural Studio का तरीका
लूसी कारपेट हाउस, रूरल स्टूडियो की उस व्यापक सोच का हिस्सा है जिसमें वास्तुकला को सिर्फ इमारत बनाने का काम नहीं माना जाता. 1993 में ऑबर्न यूनिवर्सिटी के दो प्रोफेसर हेल काउंटी पहुंचे थे, उस समय न्यूबर्न इलाका धूल भरी सड़कों और चर्चों से भरा एक छोटा समुदाय था और कई लोग पुराने तथा असुरक्षित घरों में रहते थे.
उनका विचार सीधा था छात्र समुदाय के बीच रहेंगे, हाथों से काम करके सीखेंगे और स्थानीय नागरिक ढांचे को मजबूत करने में मदद करेंगे, इसके बाद से रूरल स्टूडियो ने 200 से ज्यादा प्रोजेक्ट पूरे किए हैं और अलबामा के ब्लैक बेल्ट क्षेत्र में 1,200 से ज्यादा छात्रों को प्रशिक्षित किया है.
किताबों से नहीं, घर बनाकर सीखते हैं छात्र
हर साल करीब चार दर्जन छात्रों को इस संदर्भ आधारित सर्विस-लर्निंग प्रोग्राम में हिस्सा लेने का मौका मिलता है. वे स्थानीय लोगों के साथ रहकर और काम करके समाधान तैयार करते हैं. यानी डिजाइन किसी स्टूडियो में बैठकर अकेले नहीं बनाई जाती, बल्कि जिस समुदाय के लिए प्रोजेक्ट होता है, उसके साथ मिलकर तैयार की जाती है. कार्यक्रम में छात्रों को सिर्फ यह सोचने के लिए नहीं कहा जाता कि क्या बनाया जा सकता है, बल्कि यह भी सोचने के लिए कहा जाता है कि क्या बनाया जाना चाहिए.
उनके प्रोजेक्ट ऐसे होने चाहिए जो स्थानीय परिस्थितियों का सामना कर सकें, इसमें ‘डिक्सी एली’ कहे जाने वाले क्षेत्र के टॉरनेडो और गर्मियों और सर्दियों के अत्यधिक तापमान जैसी चुनौतियां भी शामिल हैं. रूरल स्टूडियो के निदेशक एंड्रयू फ्रीयर के मुताबिक, कार्यक्रम का उद्देश्य युवा आर्किटेक्ट्स को इस बात के लिए प्रेरित करना है कि वे अपने डिजाइन और निर्माण से जुड़े सामाजिक, राजनीतिक और पर्यावरणीय प्रभावों के प्रति अपनी नैतिक जिम्मेदारी को समझें.
सस्ता घर बनाना भी है बड़ा लक्ष्य
रूरल स्टूडियो का काम धीरे-धीरे किफायती आवास की समस्या पर भी केंद्रित हुआ. 2004 में उसने 20K Initiative शुरू किया. इसके तहत छात्रों को ऐसे स्वतंत्र घरों के डिजाइन पर काम करने को कहा गया, जिन्हें सामग्री और मजदूरी की लागत को एक किफायती सीमा में रखकर बनाया जा सके. इस पहल और स्टूडियो के दूसरे शोधों से किफायती आवास को बड़े स्तर पर लागू करने के तरीकों को लेकर काफी जानकारी विकसित हुई.
इसके बाद शुरू की गई Front Porch Initiative के जरिए इस काम को और आगे बढ़ाया जा रहा है. इसमें देशभर के हाउसिंग प्रोवाइडर्स और अन्य संस्थाओं के साथ मिलकर किफायती और बेहतर प्रदर्शन वाले ग्रामीण घरों के डिजाइन को बड़े स्तर पर लागू करने की कोशिश की जा रही है.
20K Initiative से विकसित घरों के डिजाइन और सहयोगियों के साथ तैयार किए जा रहे नए वित्तीय मॉडल के जरिए रूरल स्टूडियो किफायती आवास के मौजूदा मॉडल और तरीकों में बदलाव लाने की कोशिश कर रहा है.
गांवों को फिर से जीवंत करने की कोशिश
न्यूबर्न में रूरल स्टूडियो का काम उस ग्रामीण समुदाय की चुनौतियों से जुड़ा है, जिनका सामना दुनिया के कई छोटे कस्बे कर रहे हैं, जैसे-जैसे बुजुर्ग पीढ़ी खत्म हो रही है और युवा रोजगार तथा बेहतर अवसरों की तलाश में शहरों की ओर जा रहे हैं, छोटे समुदायों के लिए अपने नागरिक ढांचे को बनाए रखना मुश्किल होता जा रहा है.
पीढ़ियों से यहां ऐसा पर्याप्त नागरिक ढांचा नहीं था जो लोगों को अपने कस्बों से जोड़े रख सके, अब स्थानीय नेता अपने शहर के पतन को रोकने के लिए रूरल स्टूडियो की मदद लेते हैं. तीन दशक से ज्यादा समय में रूरल स्टूडियो के छात्रों ने स्थानीय जरूरतों को पूरा करने वाले कई प्रोजेक्ट तैयार किए हैं. इनमें पास के ग्रीन्सबोरो में बड़ा लायंस पार्क बनाना, पुराने बैंक भवन को न्यूबर्न लाइब्रेरी में बदलना और न्यूबर्न का टाउन हॉल बनाने के लिए साइप्रस की लकड़ियों का इस्तेमाल करना शामिल है.
छात्र प्रोजेक्ट से देशव्यापी आवास अभियान तक
आज रूरल स्टूडियो Front Porch Initiative के जरिए देशभर के हाउसिंग प्रोवाइडर्स और संगठनों के साथ काम कर रहा है. इसका लक्ष्य बेहतर गुणवत्ता वाले, किफायती ग्रामीण घरों के डिजाइन को बड़े स्तर पर व्यावहारिक और व्यावसायिक रूप देना है, Lucy Carpet House आज भी रूरल स्टूडियो के अनोखे नजरिए का एक खास उदाहरण है. हजारों रीसाइकिल कारपेट टाइल्स से बनी इसकी दीवारें दिखाती हैं कि सीमित संसाधनों को भी वास्तुकला के समाधान में बदला जा सकता है और साथ ही घर में रहने वाले लोगों की जरूरतों को डिजाइन के केंद्र में रखा जा सकता है.
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