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NEET 2024 पेपर लीक मामले में संजीव मुखिया को राहत, हिरासत से मुक्त करने का आदेश 

NEET 2024 पेपर लीक मामले में जेल में बंद संजीव मुखिया को बड़ी राहत मिली है. पटना सीबीआई की विशेष अदालत ने संजीव मुखिया को इस मामले में न्यायिक हिरासत से मुक्त करने का आदेश दिया है. हालांकि, नीट पेपर लीक मामले में राहत मिलने के बावजूद वह आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की ओर से दर्ज मामले में जेल में ही रहेगा. 

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संजीव मुखिया को मिली राहत. (Credits: India Today)
संजीव मुखिया को मिली राहत. (Credits: India Today)

साल 2024 के नीट पेपर लीक मामले में संजीव मुखिया को बड़ी राहत देते हुए सीबीआई की विशेष अदालत ने न्यायिक हिरासत से मुक्त करने का ऐलान किया है. लेकिन आर्थिक अपराध इकाई के केस के चलते उसकी जेल से तत्काल रिहाई नहीं होगी. बता दें कि संजीव मुखिया मई 2025 से न्यायिक हिरासत में बेऊर जेल में बंद है. बताया गया है कि नीट पेपर लीक मामले में सीबीआई ने उसके खिलाफ आरोपपत्र दाखिल नहीं किया था. इसके बाद सीबीआई की विशेष अदालत ने उसे नियमित जमानत दे दी. 

सीबीआई जांच में नहीं मिला पेपर लीक का सबूत

जानकारी के मुताबिक, सीबीआई की जांच के दौरान संजीव मुखिया के खिलाफ नीट पेपर लीक करने से जुड़ा कोई सबूत नहीं मिला. इसी आधार पर अदालत ने उसे इस मामले में न्यायिक हिरासत से मुक्त करने का आदेश दिया है. नीट 2024 पेपर लीक मामले में पटना के शास्त्रीनगर थाने की पुलिस ने सबसे पहले एफआईआर दर्ज की थी. इसके बाद आर्थिक अपराध इकाई ने मामले की जांच संभाली और संजीव मुखिया से कई दिनों तक रिमांड पर पूछताछ की थी. बाद में सीबीआई ने मामला अपने हाथ में लेकर नए सिरे से केस दर्ज किया. सीबीआई ने भी संजीव मुखिया को रिमांड पर लेकर पूछताछ की थी. 

45 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट

गौरतलब है कि, इस मामले में जांच के दौरान सीबीआई ने 45 आरोपियों के खिलाफ विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल की है. हालांकि, संजीव मुखिया के खिलाफ इस मामले में सीबीआई ने आरोपपत्र दाखिल नहीं किया था. इस तरह नीट पेपर लीक मामले में अदालत के आदेश से संजीव मुखिया को राहत मिली है, लेकिन आर्थिक अपराध इकाई की ओर से दर्ज मामले के कारण उसकी जेल से तत्काल रिहाई नहीं होगी. 

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क्या था विवाद? 

NEET-UG 2024 की परीक्षा 5 मई 2024 को हुई थी. इसके बाद बिहार के पटना में पेपर लीक होने के आरोप सामने आए. जांच में सामने आया कि कुछ अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया गया था. बाद में मामला बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (EOU) से होते हुए CBI तक पहुंचा. विवाद केवल पेपर लीक तक ही सीमित नहीं रहा. रिजल्ट में 67 अभ्यर्थियों के 720 में से 720 अंक आने और कुछ अभ्यर्थियों को समय की कमी के बदले ग्रेस/क्षतिपूरक अंक दिए जाने पर भी सवाल उठे.

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