scorecardresearch
 

US Economy Crisis: टैरिफ, बैन और मनमाने फैसले से खुद घिरा अमेरिका... एक साथ ये चार संकट!

US Stagflation risk: अमेरिका ने दूसरों के लिए जो टैरिफ और प्रतिबंधों की दीवारें खड़ी की थीं, अब वही दीवारें उसके घरेलू बाजारों में महंगाई, महंगे कर्ज और सुस्ती का कारण बन चुकी हैं.

Advertisement
X
आर्थिक संकटों से घिरता जा रहा है अमेरिका. (Photo: AP)
आर्थिक संकटों से घिरता जा रहा है अमेरिका. (Photo: AP)

अमेरिकी अर्थव्यवस्था फिलहाल संकट में है. लेकिन आर्थिक तौर पर मजबूत होने की वजह से इसी अमेरिका ने अपनी नीतियों को कई देशों पर जबरन थोपा है. दुनिया में तमाम ऐसे देश हैं, जो खुलकर अमेरिका की आलोचना करते हैं. 

दरअसल,  अमेरिका ने वर्षों से प्रतिबंधों, डॉलर के दबदबे और आक्रामक टैरिफ नीतियों के जरिए दूसरे देशों पर दबाव बनाने की कोशिश की है, भारत भी अछूता नहीं है. लेकिन अब अमेरिका की गलत नीतियां उसे ही चौतरफा घेर रही हैं. इस समय अमेरिकी अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से 4 बड़े मोर्चों पर उलझी नजर आ रही हैं. 

1. अमेरिका को महंगाई कर रही परेशान
अमेरिका ने ट्रेड-वॉर रोकने और दुनिया को आर्थिक संकट से बचाने के नाम पर भारत, चीन और यूरोपीय देशों से आने वाले सामानों पर भारी टैरिफ लगाए. अमेरिका का इरादा दूसरे देशों को आर्थिक चोट पहुंचाने का था. लेकिन इसका सीधा बोझ वहां की कंपनियों और उपभोक्ताओं पर आ पड़ा है. अमेरिकी कंपनियों के पास जमा पुराना स्टॉक खत्म होने के साथ ही आयातित वस्तुओं के दाम बढ़ रहे हैं, जिससे वहां महंगाई फिर से बेकाबू होने लगी है. 

Advertisement

अमेरिका की सालाना उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) महंगाई दर इस समय 3.4% सालाना के आसपास है. यूएस फेडरल रिजर्व (Fed) का आदर्श महंगाई लक्ष्य 2.0% है, ऐसे में महंगाई दर फिलहाल इस लक्ष्य से काफी ऊपर बनी हुई है. 

2. कच्चे तेल में उबाल से बॉन्ड यील्ड में भी इजाफा
मध्य-पूर्व में चल रहे युद्ध और भू-राजनीतिक संकट की वजह से कच्चे तेल और ईंधन के दाम फिर उफान पर हैं. ब्रेंट क्रूड $91 प्रति बैरल के पार पहुंच गया है. दरअसल, रविवार को अमेरिकी सेना की ओर से ईरान के लारक द्वीप पर किए गए हमलों और उसके जवाब में अमेरिकी ठिकानों पर हुए हमलों के बाद तनाव काफी बढ़ गया है. अमेरिका तेल का बड़ा उत्पादक होने के बावजूद अपनी घरेलू मांग और ऊर्जा परिवहन लागत में बढ़ोतरी को रोक नहीं पा रहा है, जिससे उसकी पूरी सप्लाई-चैन प्रभावित हो रही है. 

कच्चे तेल में तेजी के कारण महंगाई दर लंबे समय तक ऊंची रहने की चिंताओं ने बाजार को झकझोर दिया है. 10-वर्षीय अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़कर 4.79% हो गई, जो जनवरी 2025 के बाद सबसे उच्चतम स्तर है. वहीं 30-वर्षीय बॉन्ड यील्ड भी 5.25% से ऊपर पहुंच गई. 

इसकी बड़ी वजह ये है कि अमेरिका का सरकारी कर्ज बढ़कर जीडीपी के 120% से अधिक पहुंच गया है. ऊंची बॉन्ड यील्ड का मतलब है कि अमेरिकी सरकार को अपने पुराने कर्ज पर भारी ब्याज चुकाना पड़ रहा है, जिससे उनका बजट घाटा और विकराल होता जा रहा है.

Advertisement

3. फेडरल रिजर्व (Fed) भी धर्मसंकट में 
फेडरल रिजर्व के चेयर Kevin Warsh द्वारा दिए गए सख्त बयानों ने बाजार की चिंताएं और बढ़ा दी हैं. उन्होंने संकेत दिया है कि अगर महंगाई 2% के लक्ष्य पर वापस नहीं आती है, तो केंद्रीय बैंक को दरों पर और सख्त कदम उठाने होंगे. जबकि कुछ महीने पहले ब्याज दरें घटाने की बातें हो रही थीं, अब बढ़ती महंगाई और कच्चे तेल की वजह से ब्याज दरें बढ़ाने या लंबे समय तक ऊंची रखने के संकेत देने पड़ रहे हैं. ब्याज दरें ऊंची रहने से वहां होम लोन, कार लोन और कॉर्पोरेट कर्ज बेहद महंगे हो गए हैं, जिससे अमेरिकी उपभोक्ता पिस रहा है. 

4. डी-डॉलरलाइजेशन से संकट
जब अमेरिका ने भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर प्रतिबंधों और टैरिफ से दबाव बनाया तो भारत, चीन, रूस और BRICS देशों ने आपस में स्थानीय मुद्राओं (जैसे रुपये-दिरहम या रुपये-रुबल) में व्यापार करना तेज कर दिया. जिससे दुनिया भर में अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता धीरे-धीरे घट रही है और अमेरिका का वैश्विक वित्तीय दबदबा कमजोर पड़ रहा है.

अमेरिका ने दूसरों के लिए जो टैरिफ और प्रतिबंधों की दीवारें खड़ी की थीं, अब वही दीवारें उसके घरेलू बाजारों में महंगाई, महंगे कर्ज और सुस्ती का कारण बन चुकी हैं. अमेरिका अब इस दुविधा में है कि महंगाई रोकें या अर्थव्यवस्था को मंदी से बचाएं. 

Advertisement

वैश्विक वित्तीय बाजार में इस उथल-पुथल के पीछे मुख्य रूप से मध्य-पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच फिर से भड़का सैन्य संघर्ष, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की मजबूत आशंकाएं हैं.
 

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement