अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले CEO के चयन की प्रक्रिया अब आखिरी दौर में पहुंच गई है. 5,585 आवेदनों से शुरू हुई तलाश अब तीन नामों तक सिमट गई है. सर्च कमेटी ने उम्मीदवारों की जांच और बातचीत पूरी करने के बाद 1 सितंबर को इन तीन नामों का पैनल ट्रस्ट को सौंप दिया. अब ट्रस्ट इन नामों पर विचार करेगा. इसके बाद पहले CEO के नाम पर अंतिम मुहर लगेगी.
इस अहम पद के लिए चयन प्रक्रिया पूरी तरह योग्यता और पारदर्शिता के आधार पर तय की गई थी. शुरुआत में मिले 5,585 आवेदनों की तकनीकी और मैन्युअल जांच के लिए दिल्ली-एनसीआर, पुणे और संबलपुर में अलग-अलग टीमें लगाई गई थीं. बारीकी से दस्तावेजों को परखने के बाद 16 उम्मीदवारों को फाइनल राउंड के लिए चुना गया. इन सभी के साथ पहले 3 से 6 अगस्त तक ऑनलाइन बातचीत हुई, फिर 11 और 12 अगस्त को अयोध्या बुलाकर आमने-सामने इंटरव्यू लिया गया.
विशेषज्ञों की कमेटी ने किया चयन
CEO के चयन के लिए बनी सर्च कमेटी में न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) प्रमोद कोहली, लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) वी.के. चतुर्वेदी और डॉ. सुरेश हावरे शामिल रहे. कमेटी के सदस्यों के पास न्यायपालिका, सेना और परमाणु विज्ञान के क्षेत्र का लंबा अनुभव है.
उम्मीदवारों को नेतृत्व क्षमता, प्रबंधन, काम का अनुभव, सत्यनिष्ठा और दूरदर्शिता जैसे मानकों पर परखा गया. कमेटी की अंतिम रिपोर्ट सौंपते समय गोविन्ददेव महाराज, संत दिनेंद्र दास, कृष्ण मोहन, शशांक त्रिपाठी, दिनेश, जगदीश आफले, जगन्नाथ गुलवे और बजरंग बागड़ा मौजूद रहे. वहीं, सर्च कमेटी के सचिव समीर पंडा ने बताया कि पूरी चयन प्रक्रिया तय समय से पहले पूरी कर ली गई.
1 जुलाई को शुरू हुई थी प्रक्रिया
CEO के चयन की शुरुआत 1 जुलाई को हुई थी. उस दिन चयन प्रक्रिया और पात्रता मानकों को लेकर पहली बैठक हुई. 6 जुलाई को चयन समिति का गठन किया गया. 14 जुलाई को समीर पंडा को कमेटी का सचिव बनाया गया. 18 जुलाई को आवेदन की प्रक्रिया बंद हुई.
इसके बाद जुलाई में आवेदनों की जांच की गई. अगस्त में ऑनलाइन बातचीत के बाद अंतिम 16 उम्मीदवारों से अयोध्या में आमने-सामने बातचीत हुई. अब 1 सितंबर को तीन नामों का पैनल ट्रस्ट को सौंप दिया गया है. अगले चरण में ट्रस्ट तीनों नामों पर विचार करेगा और एक नाम पर अंतिम फैसला लिया जाएगा.