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रुपये की डॉलर पर लगातार 8वें दिन बढ़त! Jio IPO और RBI की स्ट्रेटजी ने दिया सहारा

Rupee vs Dollar: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की मजबूती लगातार आठवें ट्रेडिंग सेशन में भी जारी रही. बुधवार को रुपया शुरुआती कारोबार में 29 पैसे चढ़कर 94.62 प्रति डॉलर तक पहुंच गया. जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ से जुड़े विदेशी डॉलर इनफ्लो और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के समर्थन ने रुपये को सहारा दिया. हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें अब भी चुनौती बनी हुई हैं.

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अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की मजबूती लगातार आठवें ट्रेडिंग सेशन में भी जारी रही. (File Photo)
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की मजबूती लगातार आठवें ट्रेडिंग सेशन में भी जारी रही. (File Photo)

भारतीय रुपये की अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूती लगातार आठवें ट्रेडिंग सेशन में भी जारी रही. रुपया 21 अक्टूबर को शुरुआती कारोबार में 29 पैसे चढ़कर 94.62 प्रति डॉलर तक पहुंच गया. रुपये को जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ (Jio Platforms IPO) से जुड़े फॉरेन डॉलर इनफ्लो और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के कदमों से मजबूती मिली. हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और मजबूत अमेरिकी डॉलर ने रुपये की बढ़त को सीमित रखा.

इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में रुपया बुधवार को 94.78 प्रति डॉलर पर खुला. इसके बाद इसमें और मजबूती आई और यह 94.62 प्रति डॉलर तक पहुंच गया. इससे पहले सोमवार को रुपया 94.91 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था. मंगलवार को दशहरा होने के कारण फॉरेन एक्सचेंज मार्केट बंद था.

जियो IPO से कैसे मजबूत हुआ रुपया?

रुपये को मजबूती मिलने की एक प्रमुख वजह जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ से जुड़ा विदेशी निवेशकों का डॉलर इनफ्लो है. यह आईपीओ बुधवार को पब्लिक इंवेस्टमेंट के लिए खुला. विश्लेषकों के मुताबिक, जियो के आईपीओ अलॉटमेंट की प्रक्रिया के दौरान विदेशी निवेशक डॉलर बेचकर रुपये हासिल करने की रणनीति अपना रहे हैं. इससे डोमेस्टिक फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में डॉलर का इनफ्लो बढ़ा है और रुपये को सपोर्ट मिल रहा है.

चॉइस ब्रोकिंग के कमोडिटी और करेंसी एनालिस्ट आमिर मकदा के मुताबिक, जियो आईपीओ से जुड़े विदेशी डॉलर इनफ्लो के साथ RBI के कदमों ने भी रुपये को मजबूती दी है. उन्होंने बताया कि आईपीओ अलॉटमेंट के दौरान विदेशी निवेशक बड़े पैमाने पर सेल-बाय स्वैप (Sell/Buy Swap) का इस्तेमाल कर रहे हैं. इसमें निवेशक स्पॉट मार्केट में डॉलर बेचकर रुपये लेते हैं और तय अवधि के बाद डॉलर वापस खरीदने का समझौता करते हैं. ऐसे सौदों की अवधि आमतौर पर एक सप्ताह से कम हो सकती है.

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RBI के दखल से भी मिला सहारा

रुपये को भारतीय रिजर्व बैंक के हस्तक्षेप से भी समर्थन मिला. RBI फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में जरूरत के मुताबिक डॉलर की खरीद या बिक्री करके रुपये में बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने की कोशिश कर सकता है. बुधवार को डॉलर की मांग को सीमित करने के लिए RBI के समर्थन को भी रुपये की मजबूती की एक वजह माना गया. हालांकि, रुपये की तेजी के बावजूद फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में दबाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत के लिए चिंता का कारण बनी हुई हैं, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है. तेल महंगा होने पर आयातकों को डॉलर खरीदने के लिए ज्यादा रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ सकता है.

डॉलर इंडेक्स और कच्चे तेल का हाल

अमेरिकी डॉलर इंडेक्स बुधवार को 0.06 फीसदी की मामूली बढ़त के साथ 101.58 पर कारोबार कर रहा था. यह इंडेक्स छह प्रमुख विदेशी मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की मजबूती को मापता है. वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 1.42 फीसदी चढ़कर 110.33 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी रुपये के लिए चुनौती बनी हुई है. इससे पहले मंगलवार को अमेरिकी डॉलर इंडेक्स करीब 0.2 फीसदी गिरकर तीन सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंच गया था. अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से डॉलर का आकर्षण कम हुआ था.

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रुपये को लेकर एक्सपर्ट का अनुमान

चॉइस ब्रोकिंग के आमिर मकदा के मुताबिक, बुधवार के कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 94.00 से 94.75 के दायरे में रह सकता है. हालांकि, बाजार की दिशा विदेशी निवेश से जुड़े डॉलर इनफ्लो, RBI के कदमों और कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगी. फिनरेक्स ने भी आयातकों और निर्यातकों के लिए अलग-अलग रणनीति बताई है. उसके मुताबिक, 94.73 प्रति डॉलर का स्तर नजदीकी अवधि में आयातकों के लिए डॉलर खरीदने का अच्छा मौका हो सकता है.

वहीं, निर्यातकों को डॉलर बेचने या हेजिंग के लिए 94.95 के स्तर का इंतजार करने की सलाह दी गई है. फिनरेक्स ने ऊंचे प्रीमियम से बचने के लिए आयातकों को फिलहाल अक्टूबर की जरूरत के मुताबिक ही खरीदारी करने का सुझाव दिया. यह सलाह बाजार की मौजूदा परिस्थितियों पर आधारित है. वास्तविक खरीद-बिक्री का फैसला कारोबार की जरूरत, बैंक के भाव और जोखिम के हिसाब से लेना चाहिए.

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