आयकर विभाग ने बड़े विदेशी रेमिटेंस के मामलों में देशभर में व्यापक वेरिफिकेशन अभियान शुरू किया है. इस जांच के दायरे में 394 इकाइयां (ट्रस्ट और फर्म) और 36 प्रोफेशनल्स आए हैं. आयकर विभाग का फोकस उन मामलों पर है, जहां कम कारोबार दिखाने वाली या आयकर रिटर्न दाखिल नहीं करने वाली इकाइयों ने बड़ी रकम विदेश भेजी. घोषित बिजनेस प्रोफाइल और विदेश भेजी गई रकम के बीच अंतर मिलने के बाद इन मामलों को जांच के लिए चुना गया है.
रेमिटेंस का मतलब किसी दूसरे देश में काम कर रहे व्यक्ति, फर्म या ट्रस्ट का अपने मूल देश में पैसे भेजने से है. यह अभियान 18 अगस्त 2026 से शुरू हुआ. केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के मुताबिक, विदेशी रेमिटेंस से जुड़े डेटा के विश्लेषण और जमीनी स्तर से मिले इनपुट के आधार पर संदिग्ध इकाइयों की पहचान की गई. विभाग का कहना है कि वेरिफिकेशन का फोकस शेल इकाइयों, उनसे जुड़े लोगों और फॉर्म 15CB जारी करने वाले प्रोफेशनल्स पर भी है.
बॉर्डर वाले राज्यों में 117 इकाइयां
इस पूरे वेरिफिकेशन अभियान में 117 इकाइयों का लैंड-बॉर्डर वाले राज्यों में होना भी एक महत्वपूर्ण पहलू है. विभाग इन मामलों में विदेशी रेमिटेंस, कारोबारी गतिविधियों और संबंधित संस्थाओं के बीच संभावित कनेक्शन की जांच कर रहा है. लैंड-बॉर्डर वाले राज्यों का मतलब ऐसे राज्यों से है जिनकी सीमाएं पड़ोसी देशों के साथ लगती हैं.
सर्च ऑपरेशन के बाद बढ़ी जांच
यह कार्रवाई फर्जी चैरिटेबल ट्रस्टों से जुड़े एक सर्च ऑपरेशन के बाद आगे बढ़ी है. इन ट्रस्टों पर फर्जी डोनेशन और कंट्रीब्यूशन के बदले एंट्री देने के आरोपों की जांच की गई थी. इसी प्रक्रिया के दौरान आयकर विभाग को ऐसी कई इकाइयों के बारे में जानकारी मिली, जो या तो आयकर रिटर्न दाखिल नहीं कर रही थीं या उनका घोषित टर्नओवर विदेश भेजी गई रकम की तुलना में काफी कम था.
रेमिटेंस और बिजनेस प्रोफाइल में अंतर
सीबीडीटी के मुताबिक, पिछले तीन वर्षों के डेटा की जांच में सामने आया कि कुछ इकाइयों ने बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा विदेश भेजी. इसके बावजूद उनका घोषित कारोबार बेहद कम था या उन्होंने आयकर रिटर्न ही दाखिल नहीं किया था. कुछ मामलों में विदेश भेजी गई रकम का घोषित उद्देश्य भी संबंधित इकाई की वित्तीय प्रोफाइल से मेल नहीं खाता दिखा. इनमें फ्रेट, सॉफ्टवेयर इंपोर्ट और कंसल्टिंग सर्विसेज के भुगतान जैसे लेनदेन शामिल हैं.
आधिकारिक पते पर नहीं मिलीं कुछ फर्म
जमीनी स्तर पर मिले इनपुट में कुछ ऐसी इकाइयों की जानकारी भी सामने आई, जो आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज पते पर कारोबार करती हुई नहीं मिलीं. इससे उनके शेल फर्म होने की आशंका और बढ़ी. डेटा विश्लेषण में यह भी संकेत मिला कि विदेश भेजी गई रकम का एक पैटर्न था. कुछ मामलों में रेमिटेंस एक तरह के क्लस्टर के रूप में चुनिंदा इकाइयों तक पहुंचते हुए दिखाई दिए. आयकर विभाग अब ऐसे पैटर्न और संबंधित लेनदेन की जांच कर रहा है.
फॉर्म 15CB जारी करने वालों की भी जांच
वेरिफिकेशन में फॉर्म 15CB को लेकर भी सवाल उठे हैं. डेटा विश्लेषण के दौरान पाया गया कि अपेक्षाकृत कम संख्या वाले प्रोफेशनल्स के ग्रुप ने बड़ी संख्या में फॉर्म 15CB सर्टिफिकेट जारी किए. फॉर्म 15CB में अकाउंटेंट को करदाता की बही-खातों और दूसरे दस्तावेजों के आधार पर विदेश भेजी जा रही रकम पर लागू टैक्स देनदारी की जांच करनी होती है. सीबीडीटी के अनुसार, इस पैटर्न ने यह सवाल खड़ा किया है कि कुछ मामलों में सर्टिफिकेट जारी करने से पहले जरूरी जांच-पड़ताल और उचित सावधानी बरती गई थी या नहीं.
अकाउंटेंट की जिम्मेदारी भी अहम होती है
आयकर नियम, 2026 के तहत फॉर्म 146 और रूल 220 का मौजूदा ढांचा पहले के फॉर्म 15CB और रूल 37BB से संबंधित व्यवस्था को आगे बढ़ाता है. सीबीडीटी ने कहा है कि फॉर्म 15CB या फॉर्म 146 जारी करने वाले अकाउंटेंट्स से उचित सावधानी, मेहनत और प्रोफेशनलिज्म की अपेक्षा की जाती है. किसी विदेशी रेमिटेंस को सर्टिफिकेट जारी करने से पहले उन्हें लेनदेन, सपोर्टिंग डॉक्यूमेंट्स और उससे जुड़े जरूरी तथ्यों की पर्याप्त जांच करनी होती है. इसलिए अब विभाग की जांच में संबंधित सर्टिफिकेट जारी करने की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण हिस्सा होगी.