अमेरिका में फ्यूल की क्राइसिस दिखाई दे रही है, क्योंकि यहां ईंधन की कीमतें रिकॉर्ड हाई पर पहुंच चुकी है. इस बीच, ट्रंप ने यूरोप को अपना रिजर्व जारी करने को कहा है. वहीं, चीन ने भी फ्यूल के एक्सपोर्ट पर भी रोक लगा दी है. इसके अलावा, कच्चे तेल का दाम 102 डॉलर प्रति बैरल पर आ चुका है.
साथ ही होर्मुज में तनाव बढ़ने के कारण भी दुनिया भर में फ्यूल का संकट छाया हुआ है. इस बीच, भारत ने कमाल किया है. सितंबर महीने के दौरान कच्चे तेल का आयात सबसे ज्यादा हुआ है. खासकर खाड़ी देशों से तेल की सप्लाई अचानक से बढ़ी है, जिस कारण इस साल सितंबर में रिकॉर्ड लेवल पर कच्चे तेल का आयात हुआ है.
सितंबर महीने के दौरान भारत का कच्चा तेल आयात 5.26 मिलियन बैरल प्रति दिन के सालाना रहा. ईटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी में ईरान-अमेरिका जंग शुरू हुई थी, जिसके बाद पहली बार इराक, रूस के बाद भारत का दूसरा सबसे बड़ा सप्लायर बनकर उभरा है.
भातर कहां से मंगा रहा सबसे ज्यादा तेल
Kpler के अनुसार, सितंबर में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में सऊदी अरब, इराक, UAE, कुवैत, ओमान और कतर की हिस्सेदारी 39% थी. इराक ने हरदिन 5,25,000 बैरल कच्चे तेल की सप्लाई की है. इसके बाद सऊदी अरब ने 5,17,000 बैरल और UAE ने 4,38,000 बैरल तेल की सप्लाई की है. वहीं कुवैत ने 3,35,000 बैरल तेल की सप्लाई की है.
सबसे ज्यादा रूस से भारत ने 1,872,000 बैरल कच्चे तेल का आयात किया है. अमेरिका से 1,25,000 बैरल प्रति बैरल तेल का आयात भारत ने किया है. इसके अलावा, वेनेजुएला, नाइजिरिया और ओमान जैसे देशों से भी भारत ने सबसे ज्यादा तेल मंगाया है.
100 डॉलर के ऊपर बना है कच्चा तेल
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव फिर से बढ़ने के कारण कच्चे तेल के दाम में फिर से तेल आई है और अब ये 100 डॉलर के ऊपर लगातार बना हुआ है. एक्सपर्ट्स का दावा है कि अगर ये लंबे समय तक इसी तरह ऊपर बना रहता है तो देश में भी पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ सकते हैं. साथ ही महंगाई भी देश की आर्थिक स्थिति को प्रभावित कर सकती है.