वृंदावन में संत प्रेमानंद महाराज के शिष्य दीपक लोधी उर्फ रसिक दुलारी शरण की मौत का मामला इन दिनों चर्चा में है. 25 सितंबर गुरु कृपा कुंज आश्रम की चौथी मंजिल से कूदकर उन्होंने आत्महत्या कर ली थी. इस घटना से जुड़ा सीसीटीवी फुटेज भी सामने आ चुका है. वैसे तो वृंदावन में प्रेमानंद महाराज के कई शिष्य अलग-अलग आश्रमों में रहते हैं. लेकिन बात जब उनके सबसे करीबी शिष्य की आती है तो नवल नागरी बाबा का नाम सबसे ऊपर आता है. आइए आज आपको प्रेमानंद महाराज के सबसे करीबी शिष्य के बारे में बताते हैं.
कौन हैं नवल नागरी बाबा?
प्रेमानंद महाराज के केली कुंज आश्रम में जब भक्तों का दरबार लगता है तो उसमें अक्सर नवल नागरी बाबा नजर आते हैं. वह अक्सर भक्तों की चिट्ठियां बाबा को पढ़कर सुनाते हुए दिखाई देते हैं. आपको जानकार हैरानी होगी कि नवल नागरी बाबा पहले भारतीय सेना में ऑफिसर थे. वह पठानकोट के रहने वाले हैं. उनके पिता भी सेना में एक अधिकारी थे. इसलिए उन्हें बचपन से ही डिफेंस के माहौल में ढलने का मौका मिल गया. फिर आगे चलकर उन्होंने भी देश की सेवा का संकल्प लिया और इंडियन आर्मी ज्वॉइन की. नवल नागरी बाबा ने साल 2008 से साल 2017 तक आर्मी में सेवाएं दी.
प्रेमानंद महाराज से कैसे जुड़े?
नवल नागरी बाबा ने एक बार बताया था कि साल 2016 में जब वह पहली बार वृंदावन आए थे, तब उनकी पोस्टिंग कारगिल में थी. प्रेमानंद महाराज से मिलने के बाद वह लगातार उनके प्रवचन सुनने लगे. फिर धीरे-धीरे उनका झुकाव आध्यात्मिक जीवन की ओर बढ़ने लगा और उन्होंने साधु जीवन अपनाने का फैसला कर लिया. साल 2017 में उन्होंने आर्मी की नौकरी छोड़ दी और अपना संपूर्ण जीवन आध्यात्म को समर्पित कर दिया.
नवल नागरी बाबा आज प्रेमानंद महाराज के सबसे खास और करीबी शिष्यों में गिने जाते हैं. प्रेमानंद महाराज के लगभग हर वीडियो में वह कहीं न कहीं साथ दिख ही जाते हैं. हालांकि प्रेमानंद महाराज के शिष्यों में नागरी बाबा अकेले इतने पढ़े-लिखे नहीं हैं. उनके शिष्य में कई इंजीनियर, प्रोफेसर, डॉक्टर और सीए भी हैं, जो कई बड़ी-बड़ी कंपनियों में काम करके प्रेमानंद की शरण में आए हैं.