बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के सामने एक बार फिर बड़ी राजनीतिक चुनौती है. विधान परिषद की 8 सीटों पर 23 अक्टूबर को चुनाव होना है. इस चुनाव में सम्राट चौधरी के सामने विपक्ष को चुनौती देने के साथ-साथ NDA को एकजुट रखने की भी परीक्षा है.
सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद इसे उनकी दूसरी बड़ी राजनीतिक परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है. इससे पहले बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में BJP को हार का सामना करना पड़ा था. उस चुनाव में जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने BJP के उम्मीदवार नीरज कुमार को हराया था.
चुनाव आयोग के मुताबिक, प्रशांत किशोर को 64,151 वोट मिले, जबकि BJP उम्मीदवार को 44,827 वोट मिले. प्रशांत किशोर ने 19,324 वोटों से जीत दर्ज की.
MLC चुनाव सम्राट चौधरी के लिए दूसरी बड़ी परीक्षा
प्रशांत किशोर ने बांकीपुर के नतीजे को सम्राट चौधरी के नेतृत्व और सरकार की लोकप्रियता से जोड़ते हुए इसे जनमत संग्रह बताया था. 23 अक्टूबर को होने वाले MLC चुनाव सम्राट चौधरी के लिए दूसरी बड़ी परीक्षा है. इस चुनाव में चार स्नातक और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की सीटों पर मतदान होना है.
सम्राट चौधरी के सामने चुनौती अपने उम्मीदवारों को जिताने के साथ-साथ गठबंधन के भीतर पैदा हुए मतभेदों और अंतर्कलह, खासकर जनता दल यूनाइटेड के अंदर जो विवाद है उसे पर भी काबू पाने का है. विधान परिषद चुनाव से पहले NDA के भीतर दो सीटों पर विवाद सामने आया. पहला मामला सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का था, जहां राष्ट्रीय लोक मोर्चा यानी RLM के नेता रामपुकार सिन्हा ने NDA के आधिकारिक उम्मीदवार आनंद पुष्कर के खिलाफ निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया था.
रामपुकार सिन्हा को उपेंद्र कुशवाहा ने छह साल के लिए पार्टी से निलंबित कर दिया. बाद में उन्होंने NDA उम्मीदवार आनंद पुष्कर के समर्थन में प्रचार करने की घोषणा की. हालांकि, नाम वापसी की समय-सीमा खत्म होने के कारण उनका नाम मतपत्र पर बना रहेगा. इस तरह सारण में बगावत को शांत करने की कोशिश हुई है, लेकिन चुनाव में उनके नाम की मौजूदगी बनी रहेगी.
NDA में मतभेद
दूसरा और ज्यादा पेचीदा विवाद पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में है. यहां JDU ने नीरज कुमार को अपना आधिकारिक उम्मीदवार बनाया है. लेकिन मोकामा के JDU और बाहुबली विधायक अनंत सिंह ने पार्टी उम्मीदवार का समर्थन करने के बजाय जन सुराज के उम्मीदवार अनुज कुमार सिंह का समर्थन कर रहे हैं और लगातार उनके पक्ष में प्रचार प्रसार भी कर रहे है.
अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच विवाद ने JDU के भीतर मतभेदों को सार्वजनिक कर दिया है. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और NDA के वरिष्ठ नेताओं ने गठबंधन में एकजुटता बनाए रखने की अपील की है, लेकिन पटना सीट पर विवाद अब भी चुनाव का अहम मुद्दा बना हुआ है.
पटना स्नातक सीट पर राजनीतिक विवाद के बीच 2 दिन पहले JDU उम्मीदवार नीरज कुमार की तबीयत बिगड़ गई और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया. मंगलवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी उनसे मिलने अस्पताल पहुंचे और बेहतर इलाज के निर्देश दिए. नीरज कुमार की तबीयत बिगड़ने से चुनाव के अंतिम दौर में उनके प्रचार को लेकर सवाल उठ रहे हैं.
सम्राट चौधरी के सामने बड़ी चुनौती
दूसरी ओर, अनंत सिंह लगातार उनके खिलाफ खड़े हैं और जन सुराज उम्मीदवार अनुज कुमार सिंह का समर्थन कर रहे हैं. ऐसे में पटना स्नातक सीट पर मुकाबला राजनीतिक रूप से और चर्चा में आ गया है. सम्राट चौधरी के सामने चुनौती सिर्फ महागठबंधन के उम्मीदवारों से मुकाबला करने की नहीं है. उन्हें ये भी सुनिश्चित करना है कि NDA के सभी घटक दल साझा उम्मीदवारों के समर्थन में एकजुट होकर काम करें.
सारण में बगावत को शांत करने की कोशिश हुई है, लेकिन पटना में अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच टकराव अब भी चुनौती बना हुआ है. ऐसे में 23 अक्टूबर का मतदान और 27 अक्टूबर की मतगणना सम्राट चौधरी के लिए राजनीतिक रूप से बहुत अहम है. बांकीपुर उपचुनाव में BJP की हार के बाद अब MLC चुनाव में NDA का प्रदर्शन सम्राट चौधरी के नेतृत्व क्षमता को लेकर चर्चा का विषय भी बना हुआ है.
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अब सबसे बड़ा सवाल यही है- क्या सम्राट चौधरी NDA को एकजुट रखकर आठों सीटों पर गठबंधन को जीत दिलवा पाएंगे या पटना जैसी सीटों पर अंदरूनी टकराव गठबंधन को चुनावी नुकसान पहुंचाएगा?