बिहार के भोजपुर में बाढ़ और कटाव से कई परिवारों की जिंदगी मुश्किलों में घिर गई है. इसी बीच भोजपुरी सिनेमा के ट्रेंडिंग स्टार खेसारी लाल यादव शुक्रवार देर शाम शाहपुर प्रखंड के दामोदरपुर पुल बांध के पास पहुंचे. यहां जवैनिया गांव से विस्थापित होकर रह रहे बाढ़ पीड़ित परिवारों से उन्होंने मुलाकात की और उनकी परेशानियों को करीब से जाना.
खेसारी लाल यादव के पहुंचने की खबर मिलते ही बांध के आसपास उनके समर्थकों की भीड़ जुट गई. हालांकि, उन्होंने करीब 15 मिनट का समय समर्थकों के बीच बिताने के बजाय बाढ़ से बेघर हुए परिवारों के साथ रहने को प्राथमिकता दी. इस दौरान उन्होंने पीड़ितों से एक-एक कर बातचीत की और उनकी समस्याएं सुनीं.
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खेसारी ने बाढ़ प्रभावित परिवारों के बीच करीब 200 पैकेट राहत सामग्री वितरित की. बाढ़ और कटाव की वजह से अपना घर और सामान गंवा चुके लोगों की स्थिति देखकर वह भावुक भी नजर आए. उन्होंने कहा कि काफी समय से जवैनिया के लोगों के बीच आने की इच्छा थी, लेकिन अब उन्हें इन परिवारों से सीधे मिलने का मौका मिला.
पीड़ितों का दर्द सुनकर भावुक हुए खेसारी
खेसारी लाल यादव ने कहा कि बाढ़ के कारण जिन परिवारों ने अपना घर और सामान खोया है, उनकी स्थिति बेहद कठिन है. उन्होंने सरकार से बाढ़ और कटाव से प्रभावित लोगों को जल्द मुआवजा देने की मांग की. साथ ही विस्थापित परिवारों के लिए सुरक्षित आवास की व्यवस्था किए जाने की भी अपील की.
उन्होंने अपनी टीम को स्पष्ट निर्देश दिया कि राहत का काम सिर्फ एक दिन तक सीमित नहीं रहना चाहिए. जरूरत के मुताबिक राशन, कपड़े और दूसरी जरूरी चीजें लगातार प्रभावित परिवारों तक पहुंचाई जाएं. उनका कहना था कि मुश्किल वक्त में उनकी टीम बाढ़ पीड़ितों के साथ खड़ी रहेगी.
राहत सामग्री मिलने के बाद विस्थापित परिवारों ने खेसारी लाल यादव का आभार जताया. परिवारों ने उनके बीच पहुंचकर उनकी समस्याएं सुनने और मदद उपलब्ध कराने के लिए धन्यवाद दिया. इस दौरान बांध के आसपास मौजूद लोगों में भी खेसारी को देखने के लिए उत्साह नजर आया.
अब चुनौती सिर्फ राहत नहीं, पुनर्वास की
भोजपुर में बाढ़ और कटाव के कारण कई परिवारों के सामने अब सिर्फ तत्काल राहत की जरूरत नहीं है, बल्कि दोबारा घर बसाने की चुनौती भी खड़ी है. जिन लोगों ने अपना आशियाना और घरेलू सामान खो दिया है, उनके लिए सुरक्षित ठिकाने और स्थायी पुनर्वास की जरूरत बनी हुई है.
खेसारी लाल यादव ने इसी ओर ध्यान दिलाते हुए सरकार से प्रभावित परिवारों के लिए मुआवजे और सुरक्षित आवास की व्यवस्था करने की मांग की. साथ ही उन्होंने भरोसा दिलाया कि उनकी टीम जरूरत के अनुसार आगे भी राहत सामग्री पहुंचाती रहेगी.
अब सवाल सिर्फ राहत का नहीं, बल्कि उन परिवारों को दोबारा बसाने का है, जिन्होंने बाढ़ और कटाव में अपना आशियाना खो दिया है. विस्थापित परिवारों के लिए स्थायी आवास और जरूरी सहायता की व्यवस्था उनके सामने सबसे बड़ी जरूरत बनी हुई है.