बिहार के बांकीपुर उपचुनाव में वोटिंग पैटर्न ने सियासी दलों की टेंशन बढ़ा दी है. उपचुनाव में 35 फीसदी से भी कम वोटिंग हुई और अब सबकी नजरें तीन अगस्त को होने वाली काउंटिंग पर जा टिकी है. मैदान में जन सुराज के प्रशांत किशोर, बीजेपी के नीरज कुमार सिन्हा और आरजेडी की रेखा गुप्ता हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि कम वोटिंग से किस दल को फायदा होगा?
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में 34.3% फीसदी मतदान हुआ. यह 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में हुए 40.97% मतदान की तुलना में काफी कम है. वोटिंग में आई इस गिरावट के बाद यह बहस शुरू हो गई है कि कम मतदान का फायदा किस पार्टी को मिलेगा?
सियासी पंडितों का मानना है कि केवल कम वोटिंग होने से यह नहीं कहा जा सकता कि इसका फायदा किसी एक पार्टी को मिलेगा. नतीजा इस बात पर निर्भर करेगा कि किस राजनीतिक दल के समर्थक अधिक संख्या में मतदान करने पहुंचे.
2025 के विधानसभा चुनाव में कैसी हुई थी वोटिंग?
2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में बीजेपी उम्मीदवार और अब पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने 98,299 वोट (63.25%) हासिल कर बांकीपुर सीट जीती थी. आरजेडी कैंडिडेट रेखा कुमारी को 46,363 वोट (29.83%) मिले. प्रशांत किशोर की जन सुराज की वंदना कुमारी को 7,717 वोट (4.97%) मिले थे. बीजेपी यह सीट 51,936 वोटों के अंतर से जीती थी.
इस बार करीब सात फीसदी कम वोटिंग हुई है. हालांकि केवल कम मतदान के आधार पर किसी एक पार्टी को बढ़त मिलने का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता. यदि बीजेपी के समर्थक अपेक्षाकृत अधिक संख्या में मतदान के लिए निकले हैं, तो पार्टी को फायदा मिल सकता है.
कम वोटिंग से किसे फायदा?
वहीं, यदि विपक्षी दलों के समर्थकों ने अधिक उत्साह के साथ मतदान किया है और बीजेपी के कुछ समर्थक मतदान केंद्रों तक नहीं पहुंचे, तो मुकाबला कड़ा हो सकता है. अंतिम नतीजा इस बात पर निर्भर करेगा कि किस पार्टी ने अपने समर्थकों को मतदान के लिए प्रभावी तरीके से उत्साहित किया.
बीजेपी के लिए कम वोटिंग गुड न्यूज भी हो सकती है, यदि उसके पारंपरिक वोटर बड़ी संख्या में मतदान करने पहुंचे हों. बांकीपुर लंबे समय से बीजेपी का मजबूत गढ़ रहा है. पार्टी का इस विधानसभा क्षेत्र में मजबूत संगठनात्मक नेटवर्क है.
प्रशांत किशोर की साख दांव पर
वहीं, आरजेडी के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या उसके वोटर्स पोलिंग बूथ पर पहुंचे. यदि महागठबंधन के समर्थक घरों में ही रहा, तो कम मतदान पार्टी के लिए खतरे का संकेत है. संभव है कि पार्टी को 2025 विधानसभा चुनाव से कम वोट मिले.
यह उपचुनाव प्रशांत किशोर की जन सुराज के लिए भी महत्वपूर्ण परीक्षा माना जा रहा है. पार्टी ने आक्रामक चुनाव प्रचार किया. प्रशांत किशोर ने खुद को बीजेपी और आरजेडी दोनों के विकल्प के रूप में पेश करने की कोशिश की.
कम मतदान ने इस बात पर सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या वे नए वोटर्स को आकर्षित करने में सफल रहे. अंतिम नतीजे से साफ होगा कि पार्टी अपने चुनावी अभियान को वोटों में बदल पाई या नहीं.
क्या अपनी ताकत दिखा पाएंगे PK?
यहां यह भी साफ करना जरूरी है कि केवल मतदान प्रतिशत के आधार पर किसी चुनाव के विजेता का अनुमान नहीं लगाया जा सकता. सबसे अहम सवाल यह नहीं है कि कितने लोगों ने वोट डाले, बल्कि यह है कि मतदान करने वाले लोग किस पार्टी के समर्थक थे. 34.3 प्रतिशत मतदान में जिस पार्टी के समर्थकों की हिस्सेदारी सबसे अधिक होगी, उसे बढ़त मिलने की संभावना रहेगी.
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव पर सभी सियासी दलों की नजरें हैं. इसे तीनों पार्टियों के लिए अहम राजनीतिक मुकाबले के रूप में देखा जा रहा है. बीजेपी अपने गढ़ को बरकरार रखने की कोशिश में है. आरजेडी अपने प्रदर्शन में सुधार की उम्मीद कर रही है. प्रशांत किशोर इस बार चौंकाने का दावा कर रहे हैं.
अब तीन अगस्त को होने वाली मतगणना के बाद ही यह साफ होगा कि कम मतदान का सबसे अधिक फायदा किस पार्टी को मिला.