Lohagad Fort Monsoon Trek: अगर आपको बारिश के मौसम में ट्रेकिंग करना पसंद है तो पुणे के पास स्थित लोहागढ़ किला आपके लिए बेहतरीन डेस्टिनेशन हो सकता है. मानसून के दौरान यह ऐतिहासिक किला हरियाली, बादलों और झरनों से घिर जाता है, जिससे इसकी खूबसूरती कई गुना बढ़ जाती है. सबसे अच्छी बात यह है कि यहां का ट्रेक ज्यादा कठिन नहीं है, इसलिए शुरुआती ट्रेकर्स और परिवार के साथ घूमने वालों के लिए भी यह बेहतरीन जगह है. आइए जानते हैं कि आखिर लोहागढ़ किला मानसून ट्रेकिंग के लिए इतना खास क्यों माना जाता है.
विंचू काटा रिज का रोमांच
लोहागढ़ किले की सबसे खास पहचान इसकी 'विंचू काटा' रिज है. इसका आकार बिच्छू की पूंछ जैसा दिखता है, इसलिए इसे यह नाम दिया गया है. बारिश के मौसम में चारों ओर फैले बादलों और हरियाली के बीच यहां चलने का अनुभव बेहद रोमांचक होता है.
शुरुआती ट्रेकर्स के लिए भी आसान
अगर आपने पहले कभी ट्रेकिंग नहीं की है, तब भी लोहागढ़ किला आपके लिए बेहतर ऑप्शन है. यहां तक पहुंचने के लिए पत्थरों की बनी सीढ़ियां हैं और बेस गांव लोहागढ़वाड़ी से किले तक पहुंचने में लगभग 1 से 1.5 घंटे का समय लगता है.
झरने और हरियाली का शानदार नजारा
मानसून में मालवली से किले तक का पूरा रास्ता हरियाली से ढक जाता है. रास्ते में कई छोटे-बड़े झरने और ठंडी धुंध ट्रेक का मजा और भी बढ़ा देते हैं. नेचर लवर्स और फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए यह जगह किसी जन्नत से कम नहीं है.
पावना झील और विसापुर किले का खूबसूरत नजारा
लोहागढ़ किले की चोटी से पावना झील का शानदार दृश्य दिखाई देता है. इसके अलावा सामने स्थित विसापुर किला भी मानसून में बेहद खूबसूरत नजर आता है. बादलों के बीच इन दोनों जगहों का नजारा देखने लायक होता है.
इतिहास और वास्तुकला का अनोखा मेल
लोहागढ़ किला सिर्फ प्राकृतिक खूबसूरती के लिए ही नहीं, बल्कि अपने इतिहास के लिए भी प्रसिद्ध है. यह किला कभी छत्रपति शिवाजी महाराज और बाद में पेशवाओं के अधीन रहा था. यहां के विशाल दरवाजे, प्राचीन दीवारें और चट्टानों को काटकर बनाए गए पानी के कुंड आज भी इसकी ऐतिहासिक विरासत की कहानी बताते हैं.
अगर आप इस मानसून में पुणे या लोनावला घूमने का प्लान बना रहे हैंतो लोहागढ़ किले की ट्रेकिंग जरूर करें. यहां आपको रोमांच, प्राकृतिक सुंदरता और इतिहास का शानदार अनुभव एक साथ मिलेगा.