
BAT BMS App E-Rickshaw Battery: ई-रिक्शा चलाने वाला ड्राइवर सड़क पर सवारी लेकर जा रहा है. तभी अचानक रिक्शा रुक जाता है. मोटर नहीं, बैटरी नहीं, बल्कि किसी मोबाइल ऐप पर दबाए गए एक बटन की वजह से. दावा है कि ब्लूटूथ के जरिए बैटरी का BMS दूर से लॉक किया जा सकता है. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कई वीडियो ने यही सवाल खड़ा कर दिया है कि, क्या ये संभव है. यदि हां तो, क्या सड़क पर दौड़ रहे लाखों ई-रिक्शा सुरक्षित हैं? BAT-BMS नाम की एक ऐप को लेकर छिड़ी इस बहस ने ड्राइवरों, बैटरी कंपनियों और पूरे ई-रिक्शा बाजार की चिंता बढ़ा दी है.
मुमकिन है कि, बीते दो-तीन दिनों से यदि आपने सोशल मीडिया यूज किया होगा तो BAT-BMS के वीडियोज आपकी स्क्रीन पर आए होंगे. दावा किया जा रहा है कि इस ऐप की मदद से ब्लूटूथ के जरिए ई-रिक्शा की बैटरी को दूर से कंट्रोल कर उसे लॉक या बंद किया जा सकता है. इन दावों के बीच उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले से सामने आए घटनाक्रम ने इस मामले को और अधिक चर्चा में ला दिया है. यहां कई ई-रिक्शा चालकों ने आरोप लगाया है कि चलते-चलते उनके वाहन अचानक लॉक हो रहे हैं, जिससे उनकी रोजी-रोटी प्रभावित हो रही है. आइये जानें क्या है पूरा मामला-
बिजनौर जिले के नगीना नगर में पिछले दो दिनों से बड़ी संख्या में ई-रिक्शा चालकों ने शिकायत की है कि उनके ई-रिक्शे चलते समय अचानक बंद या लॉक हो रहे हैं. चालकों का आरोप है कि यह किसी तरह का "साइबर अटैक" हो सकता है. रिक्शा चालक सलमान ने बताया कि कि अब तक जिले में करीब 80 ई-रिक्शा लॉक होने की शिकायतें सामने आ चुकी हैं. इसको लेकर चालक बड़ी संख्या में नगीना नगर के डबल फाटक स्थित चित्तौड़गढ़ चौकी पहुंचे और पुलिस से शिकायत दर्ज कराते हुए कार्रवाई की मांग की.
चालकों का कहना है कि अचानक वाहन बंद हो जाने से न केवल उनकी कमाई प्रभावित हो रही है, बल्कि सड़क पर दुर्घटना का खतरा भी बढ़ जाता है. उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि कथित तौर पर चर्चा में आए BAT-BMS ऐप पर तत्काल रोक लगाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं. स्थानीय जानकारी के अनुसार, नगीना में करीब एक हजार परिवार ई-रिक्शा चलाकर अपना जीवनयापन करते हैं. ऐसे में यदि तकनीकी समस्या या किसी अन्य कारण से वाहन लगातार बंद होते रहे तो इसका सीधा असर हजारों लोगों की आजीविका पर पड़ सकता है.
इन दिनों सोशल मीडिया पर कई वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिनमें दावा किया जा रहा है कि BAT-BMS ऐप के जरिए सड़क पर चल रहे किसी भी ई-रिक्शा को दूर से रोक दिया जा सकता है. कुछ वीडियो में इस ऐप के जरिए कथित तौर पर चलते वाहनों की बैटरी को डिसेबल करने या लॉक करते हुए भी दिखाया जा रहा है. इन वीडियो के वायरल होने के बाद ई-रिक्शा चालकों और इलेक्ट्रिक वाहन उपयोगकर्ताओं के बीच सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है.
BAT-BMS एक मोबाइल एप्लिकेशन है, जिसे शेनजे़न ग्रीनएनर्जी टेक्नोलॉजी (Shenzhen Greenenergy Technology) नाम की चीनी कंपनी ने डेवलप किया है. यह ऐप फिलहाल प्लेस्टोर पर डाउनलोड के लिए उपलब्ध है. शुरुआत में ये एप्पल ऐप स्टोर पर भी उपलब्ध था, लेकिन अब इसे वहां से हटा दिया गया है. जैसा कि कंपनी के आधिकारिकब वेबसाइट पर बताया जा रहा है मूल रूप से ये कंपनी बैटरियों की मैन्युफैक्चरिंग करती है और दुनिया के कई देशों में इनकी बिक्री भी करती है.
कंपनी के पोर्टफोलियो में कई हैवी और स्मार्ट बैटरियां भी उपलब्ध हैं. जो संभवत: कंपनी के ऑफिशियल ऐप से कनेक्ट की जा सकती हैं. जिसका इस्तेमाल बैटरी के स्टेटस की जानकारी के लिए किया जाता है. जहां तक इस ऐप की बात है तो ये इसे ब्लूटूथ इनेबल्ड (Bluetooth Enabled) स्मार्ट लिथियम बैटरियों की निगरानी और मैनेजमेंट के लिए बनाया गया है. इसके जरिए यूजर अपनी बैटरी का चार्जिंग लेवल, वोल्टेज, डिस्चार्ज करंट, सेल वोल्टेज, टेंप्रेचर और बैटरी स्टेटस जैसी जानकारियां देख सकते हैं. कुछ स्मार्ट बैटरियों में चार्जिंग को ऑन-ऑफ करने जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध होती हैं.
सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावों की तकनीकी पड़ताल करने पर स्थिति अलग दिखाई देती है. ऐप को एंड्रॉएड मोबाइल पर डाउनलोड कर चेक किया गया. इस ऐप में बैटरी से कनेक्ट होने और उसकी जानकारी देखने के विकल्प मौजूद हैं. इसके अलावा चार्जिंग को ऑन-ऑफ करने और यहां तक की बैटरी के स्टेटस, कनेक्टिविटी, वोल्टेज और थर्मल-हीट जैसी जानकारियां भी दिखाई दे रही हैं. लेकिन किसी भी ई-रिक्शा को सीधे बंद या लॉक करने का अलग से कोई ऑप्शन नहीं मिलता.
हमने इस ऐप को सड़क पर खड़े कुछ ई-रिक्शा के बीच जाकर चेक किया गया. चेकिंग के दौरान फोन का ब्लूटूथ ऑन करने के बाद ऐप किसी अनजान डिवाइस से कनेक्ट होता हुआ दिखा. जिसके बाद चार्ज-स्विच ऑन और ऑफ का टैब ब्लू हो जाता है. लेकिन इसे टैप (दबाने) करने के बाद कोई प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी. कंट्रोल सेक्शन में जाने के बाद एक बॉक्स पॉप-अप हुआ जिसमें पासवर्ड दर्ज करने की मांग हुई. इसमें कुछ जेनरिक पासवर्ड (1234 और 0000) इत्यादि दर्ज किए गए, लेकिन प्रोसेस आगे नहीं बढ़ा.

ऐप में दिए गए बेसिक इंफॉर्मेशन सेक्शन में जाने पर कनेक्ट हुए डिवाइस के बार कोड, डिवाइस मॉडल, बीएमएस मॉडल, वर्जन, रेट चार्ज करंट, रेटेड डिस्चार्ज करंट जैसी जानकारियां सामने आईं. यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि, ये ऐप किसी पास के ई-रिक्शा से कनेक्ट हुआ या नहीं. इसलिए ये कह पाना मुश्किल है, कि इस ऐप से किसी ई-रिक्शा को कनेक्ट कर रोका या लॉक किया जा सकता है.
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी भी स्मार्ट बैटरी से ब्लूटूथ के जरिए कनेक्ट होने के लिए पहले उस बैटरी की पेयरिंग प्रक्रिया पूरी करनी होती है, जिसमें संबंधित डिवाइस का एक्सेस या पेयरिंग कोड आवश्यक होता है. जैसा आप किसी डिवाइस को ब्लूटूथ बिना अनुमति या पेयरिंग के किसी भी राह चलते वाहन की बैटरी से कनेक्ट होना सामान्य परिस्थितियों में संभव नहीं माना जाता.
बता दें कि, BAT-BMS ऐप केवल उन स्मार्ट लिथियम बैटरियों के साथ काम करता है जिनमें ब्लूटूथ आधारित बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) मौजूद होता है. भारत में चल रहे अधिकांश ई-रिक्शा अभी भी सामान्य लिथियम बैटरियों या पारंपरिक लीड-एसिड बैटरियों का उपयोग करते हैं, जिनमें इस प्रकार की स्मार्ट ब्लूटूथ सुविधा उपलब्ध नहीं होती. हालांकि कुछ कंपनियां अपने ई-रिक्शा में ब्लूटूथ की सुविधा देती हैं, जो थर्मल हीट या किसी तरह की गड़बड़ी पर नज़र रखने के लिए इस्तेमाल होता है.
जब इस मामले में आज तक ने नगीना थाना के SHO विकास कुमार से बात कि तो उन्होंने बताया कि यह मामला उनके संज्ञान में आया है, उन्होंने बताया कि कुछ लोग इंस्टाग्राम पर वीडियो देखर ट्रेंड फॉलो कर रहे है, हम इस मामले में जाँच कर रहे है. अभी तक यह पुष्टि नहीं हुई है कि इन घटनाओं का BAT-BMS ऐप से कोई सीधा संबंध है या फिर इसके पीछे कोई तकनीकी खराबी, बैटरी, कंट्रोलर अथवा अन्य कारण जिम्मेदार हैं. फिलहाल वायरल दावों और वास्तविक तकनीकी तथ्यों के बीच अंतर समझना जरूरी है. वहीं, बिजनौर में सामने आए मामले की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि ई-रिक्शों के अचानक लॉक होने की असली वजह क्या है.