क्लाउड मैप में पूरा भारत दिख रहा व्हाइट, क्यों इसे मॉनसून के नए फेज का संकेत बताया जा रहा

क्लाउड मैप में पूरा भारत सफेद दिखने का मतलब है घने मॉनसूनी बादलों का फैलाव. जून में कमजोर मॉनसून के बाद जुलाई में नया एक्टिव फेज शुरू हुआ है, जिससे उत्तर और पूर्वी भारत में भारी बारिश हो रही है.

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भारत के मौसम विभाग द्वारा जारी नक्शे में पूरे देश में बादल दिख रहे हैं. (Photo: IMD) भारत के मौसम विभाग द्वारा जारी नक्शे में पूरे देश में बादल दिख रहे हैं. (Photo: IMD)

आजतक साइंस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 21 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 11:05 AM IST

भारत के मौसमी क्लाउड मैप पर इन दिनों पूरा देश सफेद रंग से ढका नजर आ रहा है. लग रहा है कि पूरे भारत पर बादल छाए हुए हैं. दरअसल, ISRO के INSAT-3DR सैटेलाइट और IMD की इमेजेस में व्हाइट या ब्राइट एरिया मोटे और घने बादलों को दर्शाते हैं. ये क्लाउड्स सूर्य की रोशनी को ज्यादा ब्लॉक करते हैं या फिर उनके टॉप बहुत ठंडे होते हैं, जो ऊंचे-नमी से भरे बादलों का संकेत देते हैं. 

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पिछले जून महीने में मॉनसून काफी कमजोर और डिले रहा था. कई राज्यों में क्लाउड कवर बहुत कम था और बारिश की गतिविधि घट गई थी. किसान चिंतित थे, सूखे जैसे हालात बन रहे थे. लेकिन अब जुलाई के मध्य में स्थिति पूरी तरह बदल गई है. मॉनसून ट्रफ सक्रिय हो गया है.

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अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से नमी का मजबूत प्रवाह शुरू हुआ है. इसी वजह से क्लाउड मैप पर व्यापक सफेदी दिख रही है, जिसे मौसम विशेषज्ञ मॉनसून के नए एक्टिव फेज बता रहे हैं. यह फेज भारी बारिश, गरज-चमक वाले तूफान और मॉनसून की ताकत को बढ़ाने वाला है.

भारी बारिश की संभावना  

IMD के फोरकास्ट के मुताबिक अगले 4-5 दिनों में नॉर्थवेस्ट और नॉर्थईस्ट इंडिया में एक्टिव मॉनसून कंडीशंस रहने वाले हैं. जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, असम और मेघालय में 21 जुलाई को हैवी टू वेरी हैवी रेनफॉल के साथ एक्सट्रीमली हैवी रेनफॉल की आशंका है.

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नॉर्थवेस्ट इंडिया में 24 जुलाई तक जम्मू-कश्मीर-लद्दाख में फेयरली वाइडस्प्रेड टू वाइडस्प्रेड बारिश होगी. हिमाचल और उत्तराखंड में 26 जुलाई तक यही स्थिति रहेगी. पूर्वी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, पंजाब में 23 जुलाई तक अच्छी बारिश होने की उम्मीद है. पूर्वी राजस्थान में 23 से 26 जुलाई तक बारिश बढ़ेगी. 

साथ ही आइसोलेटेड थंडरस्टॉर्म, लाइटनिंग और तेज हवाएं (40-50 किमी प्रति घंटा) चलने की संभावना है. सेंट्रल इंडिया में छत्तीसगढ़, पूर्वी मध्य प्रदेश और विदर्भ में 26 जुलाई तक बारिश हो सकती है. ईस्ट इंडिया में बिहार, झारखंड, वेस्ट बंगाल और सब-हिमालयन वेस्ट बंगाल में भारी बारिश का अलर्ट है.

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नॉर्थईस्ट में अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय और अन्य राज्यों में लगातार बारिश चलेगी. वेस्ट इंडिया में कोंकण-गोवा, मध्य महाराष्ट्र और गुजरात रीजन में बारिश बढ़ेगी. हालांकि साउथ इंडिया में वेस्ट सेंट्रल और साउथ पेनिनसुला में बारिश अब भी सुब्ड्यूड रहेगी. केरल, कर्नाटक, आंध्र और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में फैली हुई बारिश ही होगी.

मॉनसून रिवाइवल के पीछे वैज्ञानिक कारण  

जून में वेस्टर्ली जेट स्ट्रीम का साउथ शिफ्ट होने से मॉनसून सर्कुलेशन कमजोर पड़ा था. ऊपरी वायुमंडल में ईस्टरली जेट दब गया था, जिससे क्लाउड फॉर्मेशन रुक गया. अब स्थिति उलट गई है. मॉनसून ट्रफ की पोजीशन नॉर्दन इंडिया के ऊपर मजबूत हुई है, जिससे नमी का इनफ्लो बढ़ा. अरब सागर ब्रांच और बंगाल की खाड़ी ब्रांच दोनों सक्रिय हैं. इससे क्लाउड कवर बढ़ा और नया फेज शुरू हुआ.

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यह बदलाव किसानों के लिए राहत भरा है. जहां जून में सूखे की आशंका थी, वहां अब जलाशय भरने, फसलों को पानी मिलने और कृषि गतिविधियों को बूस्ट मिलेगा. लेकिन भारी बारिश के नुकसान भी हैं. पहाड़ी इलाकों में लैंडस्लाइड, नदियों में बाढ़ और शहरी इलाकों में जलभराव की आशंका बढ़ गई है. इसलिए IMD ने अलग-अलग राज्यों के लिए स्पेसिफिक अलर्ट जारी किए हैं.

अगले कुछ दिनों में नॉर्थ और ईस्ट भारत में मॉनसून की ताकत बनी रहेगी. 22-24 जुलाई के आसपास कुछ इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है. उसके बाद 25-26 जुलाई को कुछ हिस्सों में बारिश थोड़ी कम हो सकती है, लेकिन कुल मिलाकर जुलाई का यह फेज सामान्य से ज्यादा एक्टिव साबित हो रहा है. साउथ और वेस्ट सेंट्रल भारत में बारिश कम रहने से सूखे जैसे हालात बने रह सकते हैं.

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मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि क्लाउड मैप की यह सफेदी सिर्फ एक फोटो नहीं, बल्कि मॉनसून सिस्टम की हेल्थ का इंडिकेटर है. जब क्लाउड कवर 60 प्रतिशत से ऊपर जाता है और डीप कन्वेक्टिव क्लाउड्स बढ़ते हैं, तो मॉनसून को मजबूत माना जाता है. यह 2026 के मॉनसून सीजन के लिए पॉजिटिव साइन है, हालांकि डिस्ट्रीब्यूशन अब भी बेतरतीब है. 

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यह नया फेज मॉनसून की पारंपरिक ताकत को दिखाता है. क्लाउड मैप की सफेदी डरावनी नहीं, बल्कि बारिश और राहत की खबर ले कर आई है. फिर भी बैलेंस जरूरी है – ज्यादा बारिश जहां फायदेमंद है, वहीं कुछ क्षेत्रों में अब भी बारिश की कमी बनी हुई है. मौसम विभाग लगातार निगरानी कर रहा है. आगे के फोरकास्ट में बदलाव के अनुसार अपडेट जारी करेगा.

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