जापान की अंतरिक्ष एजेंसी जाक्सा (JAXA) मंगल के चंद्रमा फोबोस से नमूने लाने वाले दुनिया के पहले मिशन के लिए तैयार है. मार्शियन मून्स एक्सप्लोरेशन (MMX) नाम का रोबोटिक अंतरिक्ष यान 20 अक्टूबर 2026 को सुबह 4:41 बजे जापानी समयानुसार तानेगाशिमा स्पेस सेंटर से एच3 रॉकेट पर लॉन्च होने वाला है.
18 अक्टूबर को प्री-लॉन्च ब्रीफिंग भी हुई. यह मिशन फोबोस से कम से कम 10 ग्राम सामग्री इकट्ठा करेगा. मंगल के दोनों चंद्रमाओं का अध्ययन करेगा. 2031 में नमूनों को पृथ्वी पर वापस लाएगा. फोबोस और डीमोस मंगल के दो छोटे चंद्रमा हैं. वैज्ञानिक लंबे समय से बहस करते रहे हैं कि ये कैसे बने.
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एक सिद्धांत कहता है कि ये क्षुद्रग्रह हैं जिन्हें मंगल के गुरुत्वाकर्षण ने पकड़ लिया. दूसरा मानता है कि किसी बड़े टक्कर से मंगल से निकला मलबा इकट्ठा होकर चंद्रमा बना. MMX मिशन इन सवालों के जवाब ढूंढेगा. फोबोस की मिट्टी में पानी और कार्बनिक पदार्थों के संकेत मिल सकते हैं, जो सौर मंडल में जीवन की उत्पत्ति को समझने में मददगार साबित होंगे.
मिशन सिर्फ नमूने लाने तक सीमित नहीं है. यह फोबोस की सतह का नक्शा बनाएगा, उसकी संरचना का अध्ययन करेगा और डीमोस का भी फ्लाईबाई करेगा. इससे मंगल प्रणाली के विकास की बेहतर तस्वीर सामने आएगी. जाक्सा के अनुसार ये नमूने भविष्य में मंगल पर मानव मिशन के लिए भी उपयोगी होंगे, क्योंकि फोबोस को संभावित बेस स्टेशन के रूप में देखा जा सकता है.
मिशन की योजना और तकनीक
अंतरिक्ष यान लगभग एक साल में मंगल के पास पहुंचेगा. अगस्त 2027 में मंगल की कक्षा में प्रवेश के बाद यह फोबोस के साथ क्वासी-सैटेलाइट ऑर्बिट में रहेगा. सतह का विस्तृत अध्ययन करने के बाद यह एक या दो बार लैंड करेगा. नमूने इकट्ठा करने के लिए विशेष सिस्टम लगे हैं. इसके साथ फ्रांसीसी-जर्मन रोवर आईडीईफिक्स (IDEFIX) भी जाएगा, जो सतह पर घूमेगा और लैंडिंग के लिए सुरक्षित जगह चुनने में मदद करेगा.
नमूने इकट्ठा करने के बाद यान पृथ्वी की ओर लौटेगा और 2031 में नमूने वापस लाएगा. यह जाक्सा के हायाबुसा-2 मिशन की सफलता पर आधारित है, जिसमें क्षुद्रग्रह से नमूने लाए गए थे. MMX उससे कहीं अधिक जटिल है क्योंकि इसमें मंगल की गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में काम करना होगा.
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अंतरराष्ट्रीय सहयोग और चुनौतियां
इस मिशन में नासा, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए), फ्रांसीसी एजेंसी सीएनईएस और जर्मन डीएलआर का सहयोग है. कई उपकरण और रोवर इन देशों की देन हैं. यह वैश्विक साझेदारी का अच्छा उदाहरण है. हालांकि चुनौतियां भी कम नहीं. फोबोस का गुरुत्वाकर्षण बहुत कम है, लैंडिंग और टेकऑफ मुश्किल होंगे. लंबी यात्रा में संचार और ऊर्जा प्रबंधन भी जटिल है.
जापान के लिए यह मिशन महत्वाकांक्षी है. एच3 रॉकेट पर निर्भरता और सटीक समय पर लॉन्च विंडो का उपयोग जरूरी है. सफल होने पर जापान अंतरिक्ष अन्वेषण में नई ऊंचाई छूएगा और मंगल प्रणाली के अध्ययन में अग्रणी बन जाएगा.
MMX के नतीजे न सिर्फ वैज्ञानिक ज्ञान बढ़ाएंगे बल्कि भविष्य के मानव मिशनों के लिए रास्ता भी साफ करेंगे. फोबोस की मिट्टी का विश्लेषण बताएगा कि वहां संसाधन उपलब्ध हैं या नहीं. यह सौर मंडल की उत्पत्ति और जीवन की संभावनाओं को समझने का नया अध्याय खोलेगा. जापान की यह पहल अंतरिक्ष क्षेत्र में उसकी बढ़ती भूमिका को रेखांकित करती है.
आजतक साइंस डेस्क