दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र यानी NCR में इन दिनों हवा की गुणवत्ता बेहद चिंताजनक बनी हुई है. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यानी CPCB के आंकड़ों के अनुसार दिल्ली का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी AQI सुबह के समय 367 से 482 के बीच दर्ज किया जा रहा है. यह बहुत खराब से गंभीर श्रेणी में आता है.
दिवाली के करीब आने से स्थिति और बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है. शहर पर घना धुंध छाया हुआ है. लोग सांस लेने में तकलीफ महसूस कर रहे हैं. मुख्य प्रदूषण का कारण पीएम 2.5 है जो फेफड़ों और दिल के लिए खतरनाक माना जाता है. दिल्ली के विभिन्न इलाकों में AQI में काफी अंतर दिख रहा है.
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सबसे खराब स्थिति जहांगीरपुरी में है जहां AQI 450 से 459 तक पहुंच गया. पंजाबी बाग में 446, आईआईटी दिल्ली में 447, अलीपुर में 437, विवेक विहार में 434, नरेला और रोहिणी में भी 400 के पार की स्थिति है. आरके पुरम, बवाना, मुंडका और नॉर्थ कैंपस जैसे इलाके भी गंभीर श्रेणी में हैं. इन क्षेत्रों में वाहनों का घनत्व, निर्माण कार्य और औद्योगिक गतिविधियां ज्यादा हैं जिससे प्रदूषण बढ़ता है.
इसके विपरीत कुछ इलाके अपेक्षाकृत बेहतर हैं. आनंद विहार में AQI करीब 293 रहा जो खराब श्रेणी में है. लोधी रोड में 268 और कुछ दक्षिणी इलाकों जैसे वासुंधरा एन्क्लेव में 330 के आसपास दर्ज किया गया. इंडिया गेट और ओखला फेस-2 में भी 399 के करीब है जो बहुत खराब है लेकिन गंभीर से कम. कुल मिलाकर दिल्ली के 50 से ज्यादा मॉनिटरिंग स्टेशनों में से अधिकांश बहुत खराब या गंभीर श्रेणी में हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि ठंडी हवा और कम हवा की गति प्रदूषण को फैलने नहीं दे रही.
NCR के शहरों की स्थिति
नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद और फरीदाबाद में भी हवा खराब है. नोएडा का AQI 300 से ऊपर बहुत खराब श्रेणी में है. गुरुग्राम में भी 300 से अधिक दर्ज हो रहा है. गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा में खराब से बहुत खराब की स्थिति है. फरीदाबाद कुछ बेहतर है लेकिन फिर भी मध्यम से खराब श्रेणी में बना हुआ है. पूरे NCR में पराली जलाने, वाहनों के धुएं और मौसम का असर साफ दिख रहा है.
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देश में कहां बेहतर है हवा की गुणवत्ता
उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में प्रदूषण चरम पर है लेकिन दक्षिण भारत, पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों में स्थिति काफी बेहतर है. लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम और केरल जैसे राज्यों में AQI अक्सर अच्छी या संतोषजनक श्रेणी में रहता है.
लेह, आइजोल, गंगटोक, शिमला, नैनीताल, लैन्सडाउन और ऊटी जैसे पहाड़ी स्थानों में AQI 50 से नीचे या 100 के आसपास रहता है. ये क्षेत्र ऊंचाई पर होने, हरियाली ज्यादा होने और कम औद्योगिक गतिविधियों के कारण साफ हवा का आनंद देते हैं.
तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल और आंध्र प्रदेश के कई शहरों में भी AQI संतोषजनक या मध्यम श्रेणी में है. समुद्र तटीय क्षेत्रों में हवा का बहाव प्रदूषण को फैलाने में मदद करता है. मध्य प्रदेश और कुछ अन्य राज्यों के छोटे शहर भी अपेक्षाकृत साफ हैं.
मेट्रो शहरों में वायु गुणवत्ता का हाल
भारत के बड़े मेट्रो शहरों में दिल्ली सबसे खराब स्थिति में है. मुंबई का AQI 150 के आसपास अस्वास्थ्यकर या मध्यम श्रेणी में है. कोलकाता भी मध्यम से अस्वास्थ्यकर श्रेणी में घूम रहा है. बेंगलुरु का AQI 100 के आसपास मध्यम श्रेणी में है जो अपेक्षाकृत बेहतर है.
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चेन्नई और हैदराबाद में स्थिति सबसे अच्छी है जहां AQI 70 से 100 के बीच संतोषजनक श्रेणी में दर्ज हो रहा है. दक्षिण के मेट्रो शहर समुद्र की नजदीकी और बेहतर हवा के बहाव से लाभान्वित होते हैं जबकि उत्तर के शहर इंडो-गैंगेटिक मैदान में होने के कारण प्रदूषण का शिकार ज्यादा होते हैं.
इस प्रदूषण का मुख्य कारण पराली जलाना, वाहनों का धुआं, निर्माण धूल, औद्योगिक उत्सर्जन और मौसमी कारक हैं. सर्दियों में तापमान कम होने से प्रदूषण जमीन के पास जमा हो जाता है. स्वास्थ्य पर इसका बुरा असर पड़ता है. आंखों में जलन, सांस की तकलीफ, अस्थमा और दिल की बीमारियां बढ़ सकती हैं.
बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए. घर के अंदर रहें, एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें और बाहर जाते समय मास्क पहनें. सरकार ने जीआरएपी के तहत कुछ प्रतिबंध लगाए हैं लेकिन विशेषज्ञ लंबे समय के समाधान जैसे स्वच्छ ऊर्जा, सार्वजनिक परिवहन बढ़ावा और पराली प्रबंधन पर जोर देते हैं.
पहाड़ी और दक्षिणी राज्यों की साफ हवा हमें याद दिलाती है कि सही नीतियों से प्रदूषण नियंत्रित किया जा सकता है. फिलहाल दिल्ली-NCR के लोग मुश्किल दिनों से गुजर रहे हैं और राहत की उम्मीद मौसम परिवर्तन पर टिकी है.
आजतक साइंस डेस्क