जामनगर रिफाइनरी से अमेरिका में दूर होगा ऊर्जा संकट? समझिए रुबियो के भारत दौरे के मायने

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने जामनगर में दुनिया की सबसे बड़ी सिंगल साइट रिफाइनरी का दौरा किया. इस दौरे का मकसद भारत-अमेरिका के बीच ऊर्जा सहयोग को मजबूत करना है. ये समझौता अमेरिकी ऊर्जा संकट को कम करने और भारत के वैश्विक रिफाइनिंग प्रभुत्व को बढ़ावा देने में खास भूमिका निभाएगा.

Advertisement
मार्को रुबियो ने जामनगर रिफाइनरी का दौरा किया. (Photo- PTI) मार्को रुबियो ने जामनगर रिफाइनरी का दौरा किया. (Photo- PTI)

आजतक ब्यूरो

  • नई दिल्ली,
  • 21 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 1:43 AM IST

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो तीन दिन के भारत दौरे पर आए थे. इस दौरान वो जामनगर स्थित रिफाइनरी का मुआयना करने पहुंचे. ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर रुबियो के इस रिफाइनरी का दौरान करने की वजह क्या है.
 
दरअसल जब भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए रूस से कच्चे तेल की खरीद बढ़ाई थी, तब अमेरिका नाराज हो गया था. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार कहते रहे कि भारत रूस से तेल खरीदकर उसकी मदद कर रहा है और युद्ध को बढ़ावा दे रहा है.

Advertisement

रूस से तेल की खरीद रोकने के लिए ट्रंप ने भारत पर दबाव बनाने की हर संभव कोशिश की. पिछले साल अगस्त में ट्रंप ने सजा के तौर पर भारतीय सामानों पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया था, जबकि 25 प्रतिशत टैरिफ पहले से लागू था. इस तरह कुल टैरिफ लगभग 50 प्रतिशत तक पहुंच गया.

(Photo- X/Sergio Gor)

पहले टैरिफ की धमकी, अब कच्चे तेल के लिए भारत की मदद

इसके बावजूद जब भारत नहीं झुका, तो पिछले महीने ट्रंप एक नया बिल लेकर आए, जिसमें रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत टैरिफ का प्रावधान किया गया. इसके जरिए भी भारत को धमकाने की कोशिश की गई. लेकिन भारत ने अमेरिका की किसी भी धमकी को तवज्जो नहीं दी. 

भारत को अपनी औद्योगिक और रणनीतिक क्षमता का बखूबी अंदाजा था. आज स्थिति ये है कि अमेरिका को खुद कच्चे तेल से बनने वाले उत्पादों के लिए भारत की सख्त जरूरत आन पड़ी है. यही वजह है कि जिस ट्रेड डील पर पिछले दो सालों से पेच फंसा हुआ था, उसे लेकर मार्को रुबियो कह रहे हैं कि डील अब अंतिम चरण में है. इतना ही नहीं, ट्रंप ने तो इस डील में कुछ नई चीजों के जुड़ने के भी संकेत दिए हैं.

Advertisement
(Photo- ITGD)

जामनगर रिफाइनरी: अमेरिकी ऊर्जा संकट की 'संजीवनी'

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने जामनगर स्थित उस रिफाइनरी का दौरा किया, जिसे अमेरिका की वर्तमान ऊर्जा जरूरतों के लिए संजीवनी माना जा रहा है. रुबियो ने बहुत करीब से इस रिफाइनरी का निरीक्षण किया और इसके उन्नत परिचालन को देखकर काफी प्रभावित हुए. अगर ऐसा न होता तो अमेरिकी विदेश मंत्री भारत को 'दुनिया का रिफाइनिंग सुपरपावर' करार न देते.

मार्को रुबियो की ये बात पूरी तरह सच है. भारत के पास भले ही दुनिया के कुल कच्चे तेल के भंडार का एक प्रतिशत से भी कम हिस्सा हो, लेकिन कच्चे तेल को रिफाइन करने के मामले में भारत एक वैश्विक सुपरपावर है.

वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की रिफाइनिंग करने वाले देशों में भारत टॉप 5 में शामिल है. इस लिस्ट में अमेरिका पहले, चीन दूसरे, रूस तीसरे, भारत चौथे और दक्षिण कोरिया पांचवें स्थान पर है. दुनिया की लगभग 825 रिफाइनरियों में से 23 क्रियाशील रिफाइनरियां भारत में मौजूद हैं.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के प्रभावित होने से पैदा हुए ऊर्जा संकट के बीच उन देशों को सबसे ज्यादा परेशानी हुई, जिनके पास अपनी रिफाइनरियां नहीं थीं. ऐसे देश भारत से पेट्रोल और डीजल जैसे रिफाइंड प्रोडक्ट हासिल कर रहे हैं.

Advertisement
(Photo- X/Sergio Gor)

100 से ज्यादा देशों को एक्सपोर्ट

भारत दुनिया के 40 देशों से कच्चा तेल आयात करता है और 100 से ज्यादा देशों को रिफाइंड प्रोडक्ट निर्यात करता है. इनमें अमेरिका, यूरोपीय देश, सिंगापुर, मलेशिया, ऑस्ट्रेलिया और यहां तक कि सऊदी अरब, यूएई तथा कुवैत जैसे खाड़ी देश भी शामिल हैं.

रिफाइंड पेट्रोलियम निर्यात के मामले में भारत दुनिया में दूसरे स्थान पर है. वैश्विक रिफाइंड पेट्रोलियम निर्यात में भारत की हिस्सेदारी 7.34 प्रतिशत है और भारत सालाना औसतन 25 मिलियन टन रिफाइंड उत्पादों का निर्यात करता है.

यूक्रेन युद्ध और यूरोपीय बाजार की निर्भरता

अमेरिका को भारत की क्षमता का अंदाजा हमेशा से था. यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से जब अमेरिका ने रूसी तेल और गैस पर कड़े प्रतिबंध लगाए, तो इसका सबसे बुरा असर यूरोपीय देशों पर पड़ा. यूरोप पहले रूस से बड़ी मात्रा में ऊर्जा उत्पाद खरीदता था. अमेरिकी दबाव के बाद यूरोप ने रूस से सीधी खरीद कम कर दी, लेकिन अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए उसने भारत का रुख किया.

साल 2018-19 में यूरोप ने भारत से सिर्फ 9,740 टन पेट्रोलियम प्रोडक्ट आयात किए थे. लेकिन 2023-24 तक ये आंकड़ा अभूतपूर्व रूप से बढ़कर 2 करोड़ 47 लाख टन तक पहुंच गया. भारत ने अमेरिकी धमकियों की परवाह न करते हुए रूस से कच्चा तेल खरीदा, उसे रिफाइन किया और यूरोप को एक्सपोर्ट किया. इससे यूरोप, रूस और भारतीय रिफाइनिंग कंपनियां तीनों संतुष्ट थीं, जबकि अमेरिका भारत की इस कूटनीति से हैरान और परेशान था.

Advertisement
(Photo- ITGD)

वेनेजुएला का हैवी क्रूड और जामनगर की ताकत

आज हालात ऐसे बन चुके हैं कि अमेरिका अपनी घरेलू ऊर्जा जरूरतों के लिए जामनगर रिफाइनरी की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहा है. जामनगर में मीडिया से बात करते हुए मार्को रुबियो ने अपनी जरूरतों का जिक्र किया.

दरअसल, मार्को रुबियो को वेनेजुएला से मिलने वाले हैवी क्रूड ऑयल को रिफाइन करने के लिए जामनगर रिफाइनरी की मदद चाहिए. वेनेजुएला के जिस तेल पर अब अमेरिका का प्रभाव है, उस तरह के भारी तेल को प्रोसेस करने की क्षमता दुनिया के बहुत कम देशों के पास है.

दुनिया का सबसे बड़ा कॉम्प्लेक्स

जामनगर रिफाइनरी का संचालन रिलायंस इंडस्ट्रीज करती है और यहे दुनिया की सबसे बड़ी 'सिंगल साइट रिफाइनरी' है. वैश्विक कच्चे तेल की रिफाइनिंग क्षमता में इसकी हिस्सेदारी लगभग 1.5 प्रतिशत है. इस रिफाइनरी का 'कॉम्प्लेक्सिटी इंडेक्स' 21.1 है, जो दुनिया में सबसे ज्यादा है. कॉम्प्लेक्सिटी इंडेक्स ये दिखाता है कि कोई रिफाइनरी कितने खराब या भारी कच्चे तेल को रिफाइन कर सकती है.

डोनाल्ड ट्रंप का राजनीतिक गणित और टेक्सास डील

ट्रंप सरकार भारत के साथ इस सहयोग के जरिए अपने घरेलू राजनीतिक परिदृश्य को भी साधना चाहती है. ईरान संकट और बढ़ती महंगाई के कारण अमेरिकी जनता में असंतोष है. तेल की कीमतें 40 प्रतिशत तक बढ़ चुकी हैं और व्यापार घाटा भी चिंता का विषय बना हुआ है. ट्रंप अमेरिकी जनता को ये दिखाना चाहते हैं कि भारत के साथ हो रही डील से उन्हें सीधा फायदा होगा.

Advertisement

इसी रणनीति के तहत ट्रंप प्रशासन ने भारतीय कंपनी रिलायंस के साथ 28 लाख 32 हजार करोड़ रुपये के एक विशाल समझौते पर चर्चा की है. इसके तहत रिलायंस टेक्सास के ब्राउन्सविले में जामनगर जैसी उन्नत रिफाइनरी स्थापित करेगी. अमेरिका के पिछले पांच दशकों के इतिहास में ये पहली बार होगा जब कोई विदेशी कंपनी वहां इतनी बड़ी रिफाइनरी का निर्माण करेगी.

टेक्सास में रिफाइनरी बनने से वेनेजुएला के हैवी क्रूड को रिफाइन करना आसान होगा, जिससे अमेरिका में ईंधन सस्ता होगा और उसका तेल निर्यात बढ़ेगा. इसके अलावा, टेक्सास में उत्पादित रिफाइंड तेल का बड़ा हिस्सा भारत खरीद सकता है, जिससे अमेरिका का भारत के साथ व्यापार घाटा भी कम होगा.

अंबानी परिवार ने किया रुबियो का स्वागत

रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड की ओर से जारी बयान में बताया कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर को रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स का विस्तृत दौरा कराया गया, जहां उन्होंने इसके व्यापक पैमाने, उन्नत तकनीक को करीब से देखा. इस दौरान रुबियो और गोर को रिलायंस की न्यू एनर्जी गीगा-फैक्ट्रीज और निर्माणाधीन डेटा सेंटरों के बारे में भी जानकारी दी गई. मुकेश अंबानी और अनंत अंबानी ने जामनगर कॉम्प्लेक्स को डीप-टेक, नवाचार और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग के वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित करने के अपना दूरदर्शी नजरिया शेयर किया.

Advertisement
(Photo- ITGD)

यह भी पढ़ें: मार्को रुबियो ने जामनगर ऑयल रिफाइनरी का किया दौरा, सर्जियो गोर ने शेयर की फोटो

कुल मिलाकर, मार्को रुबियो का ये जामनगर दौरा और ट्रेड डील को जल्द फाइनल करना सिर्फ एक व्यावसायिक समझौता नहीं है, बल्कि इसके पीछे अमेरिका की अपनी ऊर्जा जरूरतें जुड़ी हुई हैं. अब मार्को रुबियो आज की रात जामनगर में ही रुकेंगे. वो गुरुवार को सुबह 6 बजे अमेरिका के लिए रवाना होंगे.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »