दक्षिण अमेरिका (South America) के उत्तर में स्थित वेनेजुएला (Venezuela) एक ऐसा देश है, जो कभी तेल के खजाने और आर्थिक समृद्धि के लिए जाना जाता था, लेकिन आज यह गंभीर राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक संकट से जूझ रहा है. इसकी राजधानी काराकास है और यह कैरिबियन सागर से सटा हुआ एक प्रमुख तटीय राष्ट्र है.
वेनेजुएला की भौगोलिक स्थिति इसे एक अद्भुत प्राकृतिक संपदा वाला देश बनाती है. यहां ऐंजल फॉल्स (दुनिया का सबसे ऊंचा झरना), घने वर्षावन, अंडीज पर्वतमाला और विस्तृत मैदानी क्षेत्र (ललानोस) हैं. इसके अलावा वेनेजुएला तेल और खनिजों से भरपूर देश है.
20वीं सदी के मध्य तक वेनेजुएला को "तेल की दौलत" ने बेहद समृद्ध बना दिया था. लेकिन वर्तमान समय में यह देश गहरे आर्थिक संकट में डूबा हुआ है.
वेनेजुएला में लंबे समय से राजनीतिक अस्थिरता बनी हुई है. पूर्व राष्ट्रपति ह्यूगो शावेज़ (1999-2013) ने समाजवादी नीतियों को अपनाया. उनके बाद निकोलस मादुरो राष्ट्रपति बने, लेकिन उनका शासन विवादों और विरोध प्रदर्शनों से घिरा रहा है. 2019 में जुआन गुएइदो ने भी खुद को कार्यवाहक राष्ट्रपति घोषित किया, जिससे सत्ता संघर्ष और बढ़ गया. इस राजनीतिक अस्थिरता ने देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर किया है.
वेनेजुएला एक ऐसा देश है जिसकी धरती पर अपार प्राकृतिक और खनिज संपदा है, लेकिन राजनीतिक अस्थिरता और आर्थिक कुप्रबंधन ने इसे गंभीर संकट में डाल दिया है.
Venezuela Oil पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कब्जे के बाद इसकी खरीद-फरोख्त भी शुरू हो गई है. भारत की दो सरकारी रिफाइनरियों ने 20 लाख बैरल कच्चे तेल का सौदा किया है, जो अप्रैल तक उनके पास आ सकता है.
कांग्रेस नेता उदित राज ने भारत की तेल खरीदने के एग्रीमेंट को लेकर कहा कि सरकार ने वेनेजुएला से तेल खरीदने का एग्रीमेंट किया है. हालांकि, इसका ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बहुत अधिक है क्योंकि तेल बड़ी दूरी से आना होता है. हमारी रिफाइनरी गल्फ और रूस से आने वाले क्रूड ऑयल के लिए बनी है, इसलिए वेनेजुएला या अमेरिका से आने वाले तेल के लिए मशीनरी कैलिब्रेटेड नहीं है.
क्या बदलती विश्व व्यवस्था छोटे द्वीप राष्ट्रों के अस्तित्व के लिए खतरा बन रही है? 'विश्व सरकार शिखर सम्मेलन' में कैरेबियन नेताओं ने इसी सवाल का जवाब देते हुए एक ऐसी चेतावनी दी है, जो दुनिया के बड़े देशों को सोचने पर मजबूर कर देगी.
अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप के दावे - भारत रूस से तेल नहीं खरीदेगा, पर भारत के विदेश मंत्रालय ने स्थिति साफ कर दी है. मंत्रालय ने कहा है कि तेल आयात पर फैसला बाजार और राष्ट्रीय हित से होगा. भारत की एनर्जी पॉलिसी बाहरी दबाव से तय नहीं होगी. हमारे लिए 1.5 अरब लोगों की जरूरतों सर्वोच्च प्राथमिकता है.
आज भारत की कच्चा तेल खरीद नीति पर चर्चा महत्वपूर्ण है. भारत कभी भी रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर किसी विशेष करार में नहीं था. जब तक रूस से तेल खरीदकर फायदा था, भारत ने इस विकल्प को चुना. लेकिन जब रूस से पर्याप्त डिस्काउंट नहीं मिला तो भारत अन्य स्रोतों जैसे वेनेजुएला की ओर देखने लगा. वेनेजुएला से भारत पहले भी बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता था, खासकर यूक्रेन युद्ध से पहले. अमेरिका द्वारा वेनेजुएला पर प्रतिबंधों के बाद भारत ने रूस से कच्चा तेल खरीदना शुरू किया, क्योंकि वहां ज्यादा लाभ था. अब जब बाजार में परिस्थितियां बदल रही हैं, भारत उसी स्रोत से तेल खरीदेगा जहां उसे सर्वोत्तम लाभ मिल सके. यह निर्णय अमेरिका के दबाव के कारण नहीं बल्कि देश के स्वार्थों के तहत लिया जा रहा है.
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर सरकार ने साफ कर दिया है कि किसानों और डेयरी सेक्टर के हितों की पूरी सुरक्षा रखी गई है और इन संवेदनशील क्षेत्रों में किसी तरह का समझौता नहीं हुआ है. समझौते के तहत रणनीतिक ऊर्जा खरीद भी शामिल हो सकती है. भारत प्रतिबंध न होने पर वेनेजुएला समेत अन्य देशों से दरों के आधार पर कच्चा तेल खरीदेगा.
India-US Trade Deal पर सरकार का बयान. Farmers और dairy sector पूरी तरह सुरक्षित, 18% tariff लागू. Venezuela oil purchase और 500 billion dollar trade की उम्मीद.
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मुताबिक भारत ईरान और रूस से दूरी बनाते हुए वेनेजुएला से कच्चा तेल खरीदने की दिशा में बढ़ रहा है. वैश्विक ऊर्जा व्यापार में बदलाव, प्रतिबंधों और टैरिफ दबाव के बीच भारत सस्ते और वैकल्पिक तेल स्रोत तलाश रहा है.
अमेरिका ने भारत को संकेत दिया है कि वह वेनेजुएला से कच्चा तेल फिर खरीद सकता है, ताकि रूसी तेल के आयात में की जा रही बड़ी कटौती की भरपाई हो सके. रूसी तेल से जुड़े टैरिफ बढ़ने के बाद भारत आने वाले महीनों में आयात घटाकर 5 से 6 लाख बैरल प्रतिदिन तक ला सकता है. अमेरिका रूस की तेल आय से यूक्रेन युद्ध की फंडिंग रोकना चाहता है.
वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बातचीत अमेरिका के साथ तनाव और तेल पर उसकी राजनीति के बीच अहम माना जा रहा है. बता दें कि अमेरिका ने रूसी तेल खरीदने के लिए भारत पर 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाया है.
पहले सत्ता पर कब्जा, अब तेल का बिजनेस. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला के तेल का दोहन शुरू कर दिया है. अमेरिकी सरकार ने वेनेजुएला में तेल से जुड़े तमाम कामों का लाइसेंस अमेरिकी कंपनियों को दिया है. अब वेनेजुएला का तेल, रूस, चीन और भारत जैसे देशों के लिए पूरी तरह बंद हो जाएगा.
राष्ट्रपति ट्रंप ने वेनेजुएला का हवाई क्षेत्र फिर से खोलने और तेल कंपनियों को वहां भेजने का आदेश दिया है. मादुरो के हटने के बाद, अमेरिका अब वेनेजुएला के साथ राजनयिक संबंध बहाल कर रहा है. जल्द ही अमेरिकी नागरिक वहां सुरक्षित यात्रा कर सकेंगे.
कोलंबिया और वेनेज़ुएला की सीमा के पास एक जेट विमान अचानक लापता हो गया. यह विमान फ्लाइट नंबर NSE 8849 थी जो कुकुटा से ओकाना की ओर जा रही थी. इस विमान ने सुबह 11 बजकर 42 मिनट पर उड़ान भरी थी लेकिन लैंडिंग से पहले ही एयर ट्रैफिक कंट्रोल से संपर्क टूट गया. राडार से इस विमान का अचानक गायब होना चिंता का विषय है.
मैडमैन थ्योरी एक रणनीति है, जिसमें नेता खुद को बेहद खतरनाक दिखाते हैं ताकि दुश्मन डर जाए और टकराव से पहले ही झुक जाए. अमेरिका के राष्ट्रपति समय-समय पर यह तरीका आजमाते रहे. अब डोनाल्ड ट्रंप को लेकर भी यही कहा जा रहा है. वे एक साथ कई देशों को कभी जंग, कभी टैरिफ के बहाने डरा रहे हैं.
राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने कहा कि अपने सहयोगियों को बचाने के लिए उन्हें अमेरिका के आगे झुकना पड़ा. अमेरिकी फोर्स ने 15 मिनट का वक्त देते कहा था कि वे उनकी शर्तें मांग लें, नहीं तो सभी को गोली मार दी जाएगी.
अमेरिकी सेना ने पूर्वी प्रशांत महासागर में ड्रग्स तस्करी के आरोप में एक नाव पर घातक हमला किया. इसमें दो संदिग्ध तस्कर मारे गए और एक व्यक्ति जीवित बच गया. अमेरिकी साउदर्न कमांड के मुताबिक यह कार्रवाई 23 जनवरी को युद्ध मंत्री पीट हेगसेथ के निर्देश पर ऑपरेशन साउदर्न स्पीयर के तहत की गई. खुफिया जानकारी में नाव के नार्को-तस्करी और आतंकी संगठनों से जुड़े होने की पुष्टि हुई थी.
ट्रंप टीम से जुड़े लोगों ने बताया कि क्यूबा में इस संभावित एक्शन का पुरजोर समर्थन अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो कर रहे हैं. वे लंबे वक्त से क्यूबा सरकार के खिलाफ कठोर फैसले का समर्थन करते रहे हैं.
डोनाल्ड ट्रंप अपनी दबंगई और रियल एस्टेट मानसिकता के जरिए एक नया वर्ल्ड ऑर्डर बना रहे हैं. वेनेजुएला, ग्रीनलैंड और पनामा जैसे क्षेत्रों को वो सैन्य और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण 'असेट्स' मानते हैं और इन पर किसी भी तरह से नियंत्रण करना चाहते हैं.
अमेरिका ने चीन को वेनेजुएला का तेल खरीदने की अनुमति दी है, लेकिन शर्त रखी है कि यह तेल अब मादुरो के दौर की तरह सस्ती या अंडरकट कीमतों पर नहीं, बल्कि फेयर मार्केट प्राइस पर ही बेचा जाएगा. ट्रंप प्रशासन का कहना है कि मादुरो को हटाने के बाद अमेरिका वेनेजुएला के तेल निर्यात को नियंत्रित कर रहा है और इसका बड़ा हिस्सा अमेरिका को बेचा जा रहा है.
चीन को वेनेजुएला का तेल मिलेगा लेकिन. अमेरिका ने रख दी बड़ी शर्त. अमेरिका ने साफ किया है कि चीन वेनेजुएला का तेल खरीद सकता है, लेकिन अब उसे ये तेल बेहद सस्ती या ‘अंडरकट’ कीमतों पर नहीं मिलेगा