अमेरिकी नौसेना ने हाल के हफ्तों में ईरान के आसपास के समुद्री इलाकों से अपने बड़े जहाज हटा दिए हैं. सैटेलाइट तस्वीरों से साफ है कि ओमान की खाड़ी और अरब सागर में कोई अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर या डेस्ट्रॉयर मौजूद नहीं है. सितंबर की शुरुआत से ये जहाज वहां से गायब हो गए.
इस बदलाव का कारण ईरान की कासिम बसीर नाम की बैलिस्टिक मिसाइल बताया जा रहा है. ईरान का दावा है कि इस मिसाइल ने पहली बार असल मुकाबले में इस्तेमाल होकर अमेरिकी जहाजों के लिए मुश्किलें खड़ी कीं. सेंटकॉम यानी अमेरिकी मध्य कमान ने स्वीकार किया कि अमेरिकी जहाज मिसाइल हमलों की चपेट में आए.
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ईरान का कहना है कि इस मिसाइल ने अमेरिकियों के लिए जहन्नुम जैसा माहौल बना दिया. नाकाबंदी कागजों पर अब भी मौजूद है लेकिन उसे लागू करने वाले जहाज काफी पीछे हट गए हैं.
कासिम बसीर मिसाइल का असर
कासिम बसीर को ईरान कैरियर किलर यानी बड़े युद्धपोतों को निशाना बनाने वाली मिसाइल बताता है. इसकी रेंज करीब 1200 किलोमीटर बताई जाती है. इसमें थर्मल और ऑप्टिकल सीकर लगे होने का जिक्र है जो युद्धपोतों को खोजने में मदद करते हैं. पहली बार युद्ध में इस्तेमाल होने का दावा किए जाने के बाद अमेरिकी बेड़े ने अपनी स्थिति बदली.
अमेरिकी पक्ष से यूएसएस जॉर्ज वाशिंगटन, यूएसएस जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश, यूएसएस ट्रिपोली और कई आर्ली बर्क क्लास डेस्ट्रॉयर इस इलाके से हटे. यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड तो मध्य पूर्व से पूरी तरह बाहर चला गया. एक फोर्ड-क्लास कैरियर की कीमत करीब 13 अरब डॉलर और उस पर 4500 के करीब नाविक होते हैं. एक मिसाइल की लागत उसके मुकाबले बहुत कम होती है. इसी गणित ने नाकाबंदी को 1200 किलोमीटर से आगे धकेल दिया.
बड़े युद्धपोत समुद्र में ताकत का प्रतीक होते हैं लेकिन महंगे और कमजोर भी साबित हो सकते हैं अगर दुश्मन के पास लंबी दूरी की सटीक मिसाइलें हों. अमेरिकी नौसेना ने जोखिम कम करने के लिए जहाजों को मिसाइल की रेंज से बाहर रखा. इससे ईरान के तट के करीब सीधी मौजूदगी घटी है. नाकाबंदी अब दूर से बनाए रखने की कोशिश हो रही है लेकिन उसकी प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है.
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सैटेलाइट तस्वीरें बदलाव की पुष्टि करती हैं. पहले जहां नियमित गश्त दिखती थी वहां अब खाली समुद्र नजर आ रहा है. यह सैन्य रणनीति में लागत और जोखिम के संतुलन को दर्शाता है. एक महंगे कैरियर को खतरे में डालने के बजाय दूरी बनाए रखना बेहतर माना गया.
क्षेत्रीय प्रभाव और आगे की स्थिति
इस वापसी का असर खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है. अमेरिकी मौजूदगी कम होने से क्षेत्रीय देश अपनी सुरक्षा व्यवस्था पर फिर से विचार कर सकते हैं. ईरान इसे अपनी मिसाइल क्षमता की सफलता के रूप में पेश कर रहा है. वहीं अमेरिका के लिए यह तकनीक और रणनीति दोनों स्तर पर चुनौती है.
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नाकाबंदी कागजी रूप में कायम है लेकिन उसे लागू करने वाले जहाजों के पीछे हटने से व्यावहारिक स्थिति बदल गई है. समुद्री मार्गों की सुरक्षा और तेल शिपमेंट जैसे मुद्दे प्रभावित हो सकते हैं. दोनों पक्षों के बयान अलग-अलग हैं लेकिन सैटेलाइट सबूत और आधिकारिक स्वीकारोक्ति से साफ है कि अमेरिकी बेड़े ने दूरी बढ़ा ली है.
कासिम बसीर मिसाइल की चर्चा ने दिखाया कि आधुनिक संघर्ष में लंबी दूरी के हथियार बड़े जहाजों की भूमिका को प्रभावित कर सकते हैं. अमेरिकी नौसेना ने जोखिम कम करने का फैसला लिया. यह घटना लागत, सुरक्षा और रणनीतिक मौजूदगी के बीच संतुलन की मिसाल बन गई है. आने वाले दिनों में दोनों पक्ष अपनी स्थिति और स्पष्ट कर सकते हैं लेकिन फिलहाल अमेरिकी जहाज ईरान की मिसाइल रेंज से दूर रहना पसंद कर रहे हैं. यह बदलाव मिडिल ईस्ट की समुद्री सुरक्षा की तस्वीर को प्रभावित कर रहा है.
ऋचीक मिश्रा