अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए ने कई यूरोपीय सरकारों को एक गंभीर चेतावनी दी है. अमेरिकी खुफिया जानकारी के अनुसार रूस स्पेन, फ्रांस या इटली जैसे भूमध्यसागरीय देशों में से किसी एक पर रूसी ड्रोन हमले या हाइब्रिड अटैक की तैयारी कर रहा हो सकता है. यह जानकारी कई यूरोपीय देशों के साथ साझा की गई है.
चेतावनी के केंद्र में समुद्र से किए जाने वाले संभावित हमले का जिक्र है. ड्रोन को जहाज पर कंटेनरों में छिपाकर ले जाया जा सकता है और समुद्र से लॉन्च किया जा सकता है. लिथुआनिया के रक्षा मंत्रालय के करीबी एक स्रोत ने बताया कि ड्रोन का प्रकार गेरबेरा हो सकता है. यह ड्रोन करीब 18 किलोग्राम तक वजन का होता है.
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इसकी घोषित रेंज 600 किलोमीटर तक बताई जाती है. एक व्यापारिक जहाज पर कई ऐसे ड्रोन ले जाए जा सकते हैं. यह जानकारी सीआईए निदेशक जॉन रैटक्लिफ की 25 अगस्त को मॉस्को यात्रा के तुरंत बाद लिथुआनिया और अन्य देशों को मिली. रैटक्लिफ अमेरिकी सैन्य विमान से गए थे जो रास्ते में रीगा रुका था.
समुद्र से ड्रोन हमले की संभावना क्यों चिंताजनक है?
पारंपरिक हवाई हमलों की तुलना में समुद्र से छिपे हुए ड्रोन लॉन्च करना ज्यादा जटिल और छिपाने में आसान हो सकता है. व्यापारिक जहाजों पर कंटेनर आम बात है इसलिए इनमें ड्रोन छिपाना मुश्किल से पता चलता है. गेरबेरा जैसे छोटे ड्रोन की रेंज 600 किलोमीटर तक होने से तट से काफी दूर समुद्र में रहकर भी लक्ष्य तक पहुंचा जा सकता है.
एक जहाज पर कई ड्रोन होने से एक साथ कई लक्ष्य निशाना बनाए जा सकते हैं या एक ही इलाके पर लगातार हमले किए जा सकते हैं. यूरोपीय देशों के लिए यह खतरा इसलिए बड़ा है क्योंकि स्पेन, फ्रांस और इटली भूमध्यसागर के महत्वपूर्ण देश हैं.
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यहां बड़े बंदरगाह, सैन्य ठिकाने, ऊर्जा सुविधाएं और घनी आबादी वाले शहर हैं. अगर कोई ड्रोन हमला होता है तो न सिर्फ भौतिक नुकसान हो सकता है बल्कि क्षेत्र में सुरक्षा का माहौल भी बिगड़ेगा. खुफिया जानकारी के अनुसार यह हमला किसी एक देश पर केंद्रित हो सकता है लेकिन इससे पूरे यूरोप में सतर्कता बढ़ गई है.
रैटक्लिफ की मॉस्को यात्रा और जानकारी का समय
सीआईए निदेशक जॉन रैटक्लिफ की 25 अगस्त को मॉस्को यात्रा के बाद यह चेतावनी आई. उनके विमान का रीगा में रुकना भी चर्चा का विषय बना. लिथुआनिया जैसे बाल्टिक देश पहले से ही रूस के साथ तनाव के कारण सतर्क रहते हैं. यात्रा के तुरंत बाद जानकारी मिलने से कई पर्यवेक्षक इसे अमेरिकी खुफिया आकलन से जोड़कर देख रहे हैं. आधिकारिक तौर पर यात्रा का मकसद और चेतावनी के बीच सीधा संबंध स्पष्ट नहीं किया गया है.
यूरोपीय सरकारें अब अपनी तटीय सुरक्षा और बंदरगाह निगरानी बढ़ा सकती हैं. व्यापारिक जहाजों की जांच सख्त होने की संभावना है. ड्रोन की पहचान और उन्हें रोकने के लिए मौजूदा एयर डिफेंस सिस्टम को और सक्रिय किया जा सकता है. छोटे ड्रोन पारंपरिक रडार पर आसानी से नहीं पकड़ में आते इसलिए नई तकनीक और ज्यादा निगरानी की जरूरत पड़ सकती है.
यह चेतावनी यूरोप में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव के बीच आई है. रूस और पश्चिमी देशों के बीच संबंध पहले से तनावपूर्ण हैं. ड्रोन हमले की संभावना से न सिर्फ सैन्य बल्कि नागरिक सुरक्षा के पहलू भी जुड़ते हैं. अगर ड्रोन व्यापारिक मार्गों या नागरिक इलाकों के पास लॉन्च होते हैं तो अंतरराष्ट्रीय कानून और समुद्री सुरक्षा के सवाल भी उठ सकते हैं.
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लिथुआनिया समेत कई देशों को जानकारी दिए जाने से साफ है कि अमेरिका अपने सहयोगियों को पहले से आगाह करना चाहता है. छोटी लेकिन लंबी रेंज वाली ड्रोन तकनीक अब संघर्षों में आम होती जा रही है. गेरबेरा जैसी प्रणालियां कम लागत में ज्यादा असर डाल सकती हैं इसलिए इनके खिलाफ बचाव भी जरूरी हो गया है.
अभी यह केवल चेतावनी है और कोई हमला हुआ हो ऐसा आधिकारिक पुष्टि नहीं है. लेकिन खुफिया जानकारी के आधार पर यूरोपीय देश अपनी तैयारियां तेज कर सकते हैं. बंदरगाहों पर कंटेनर स्कैनिंग, समुद्री गश्त और ड्रोन डिटेक्शन सिस्टम पर जोर दिया जा सकता है. जनता के स्तर पर अफवाहों से बचने और आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की सलाह दी जा सकती है.
ऋचीक मिश्रा