पहले ड्रोन अटैक, फिर हूतियों का हमला... सऊदी की पाइपलाइन से लेकर समुद्री रास्ते तक चोक

इराक से आए ड्रोन हमलों ने सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के पंप स्टेशनों को नुकसान पहुंचाया. पाइपलाइन बंद हो गई जिससे रोजाना 4 मिलियन बैरल तेल निर्यात खतरे में है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और बाब अल-मंदेब प्रभावित होने से वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है.

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बाब-अल-मंदेब और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में दिक्कत चल रही है. उधर ईरान और इधर हूतीयों ने जहाजों का आना-जाना रोक रखा है. ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन भी विस्फोट के बाद बंद कर दिया गया है. (Photo: ITG) बाब-अल-मंदेब और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में दिक्कत चल रही है. उधर ईरान और इधर हूतीयों ने जहाजों का आना-जाना रोक रखा है. ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन भी विस्फोट के बाद बंद कर दिया गया है. (Photo: ITG)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 15 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 2:12 PM IST

सऊदी अरब ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने की आशंका को ध्यान में रखकर अरबों डॉलर खर्च कर ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन बनाई थी. यह पाइपलाइन पूर्वी तेल क्षेत्रों से लाल सागर के यानबू बंदरगाह तक कच्चा तेल पहुंचाती है ताकि फारस की खाड़ी में किसी भी संकट के समय वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध रहे. लेकिन हालिया ड्रोन हमले ने इसको गंभीर चुनौती दे दी है. 

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10 और 11 सितंबर 2026 को इराक से लॉन्च किए गए ड्रोनों ने रियाद और मदीना क्षेत्रों में स्थित पंप स्टेशनों को निशाना बनाया. पाइपलाइन को नुकसान पहुंचाने के बजाय हमलावरों ने पंपिंग मशीनरी को चुना जो मरम्मत में हफ्तों का समय ले सकती है. सऊदी ऊर्जा मंत्रालय ने सावधानी के तौर पर पूरी पाइपलाइन बंद कर दी.

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मरम्मत में पांच से छह सप्ताह लग सकते हैं. पाइपलाइन की क्षमता करीब सात मिलियन बैरल प्रतिदिन है लेकिन सामान्य रूप से चार से पांच मिलियन बैरल तेल इससे होकर गुजरता है. यह मात्रा वैश्विक तेल आपूर्ति का करीब चार से पांच प्रतिशत बैठती है. पंप स्टेशन विशेष मशीनरी वाले होते हैं जिन्हें जल्दी नहीं बदला जा सकता. पाइप में छेद हो जाए तो कुछ दिनों में ठीक हो जाता है लेकिन पंपिंग सिस्टम खराब होने से पूरा प्रवाह रुक जाता है.

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होर्मुज, बाब अल-मंदेब और पाइपलाइन का संयुक्त संकट

इस सैटेलाइट कॉम्बो तस्वीर में आप देख सकते हैं कि कैसे ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के पंप स्टेशन को हूती ड्रोन हमले से नुकसान पहुंचा है. जबकि वो पहले कैसा था. (Photo: Vantor)

वर्तमान में फारस की खाड़ी का स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ईरान युद्ध के कारण अपनी सामान्य क्षमता के बहुत कम हिस्से पर चल रहा है. सामान्य दिनों में यहां से करीब बीस मिलियन बैरल तेल प्रतिदिन गुजरता था जो अब काफी कम हो गया है. इसके अलावा बाब अल-मंदेब भी खतरे में है जहां हूती विद्रोही प्रभाव बढ़ा रहे हैं. 

इस रास्ते से भी करोड़ों बैरल तेल का आवागमन प्रभावित हो सकता है. ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन बंद होने से सऊदी के निर्यात पर सीधा असर पड़ा है. तीनों रास्तों को मिलाकर लगभग तीस मिलियन बैरल प्रतिदिन की आपूर्ति या तो बंद है या खतरे में है. वैश्विक बाजार रोजाना करीब सौ मिलियन बैरल तेल की खपत करता है इसलिए इतनी बड़ी मात्रा की रुकावट बेहद गंभीर है.

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तेल की कीमतें पहले ही सौ डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी हैं. यानबू बंदरगाह पर जमा स्टॉक कुछ दिनों में खत्म हो सकता है. इसके बाद निर्यात और भी प्रभावित होगा. सऊदी अरब की अतिरिक्त उत्पादन क्षमता का फायदा तभी होता है जब तेल को बंदरगाह तक पहुंचाया जा सके. पाइपलाइन बंद होने से यह अतिरिक्त क्षमता बेकार साबित हो रही है.

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हमले की रणनीति और क्षेत्रीय प्रभाव

हमलावरों ने पाइपलाइन के बजाय पंप स्टेशनों को चुना. यह रणनीति साफ बताती है कि लक्ष्य सिर्फ नुकसान पहुंचाना नहीं बल्कि लंबे समय तक आपूर्ति बाधित रखना था. ड्रोन इराक के मैसान प्रांत से आए जहां ईरान समर्थित मिलिशिया सक्रिय मानी जाती हैं. सऊदी ने आधिकारिक रूप से इराक से आए ड्रोनों का जिक्र किया है लेकिन कोई समूह जिम्मेदारी नहीं ले रहा. ईरान ने आरोपों से इनकार किया है.

यह हमला मिडिल ईस्ट की ऊर्जा सुरक्षा को कमजोर करता है. कई देश पहले से ही तेल आपूर्ति में कटौती का सामना कर रहे हैं. पाइपलाइन की मरम्मत पूरी होने तक बाजार में अस्थिरता बनी रहेगी. विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर बाब अल-मंदेब भी बंद हो जाता है तो स्थिति और बिगड़ सकती है. वैश्विक अर्थव्यवस्था महंगाई, ईंधन की कमी और आर्थिक मंदी जैसी चुनौतियों का सामना कर सकती है.

सऊदी अरब इस पाइपलाइन को अपनी सबसे महत्वपूर्ण बैकअप योजना मानता था. अब साफ हो गया है कि कोई भी बुनियादी ढांचा पूरी तरह सुरक्षित नहीं. ड्रोन हमलों की बढ़ती क्षमता ने पारंपरिक सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती दी है. मरम्मत के दौरान सऊदी को अन्य रास्ते खोजने होंगे लेकिन विकल्प सीमित हैं. विश्व बाजार को भी वैकल्पिक स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ेगा.

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यह घटना आधुनिक इतिहास के सबसे गंभीर ऊर्जा संकटों में से एक मानी जा रही है. तीन प्रमुख रास्तों के एक साथ प्रभावित होने से सप्लाई लाइन टूटने का खतरा है. कीमतों में उछाल आम लोगों की जेब पर भी असर डालेगा. आने वाले हफ्तों में मरम्मत की प्रगति और क्षेत्रीय तनाव का स्तर तय करेगा कि संकट कितना गहराता है. ऊर्जा सुरक्षा अब सिर्फ उत्पादन की नहीं बल्कि सुरक्षित परिवहन की भी जरूरत बन गई है.

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