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हार्ट की नसों में ब्लॉकेज नहीं, फिर भी आ सकता है हार्ट अटैक, डॉक्टर ने बताया कैसे दिखते हैं लक्षण

हार्ट की नसों में ब्लॉकेज न होने के बावजूद हार्ट अटैक हो सकता है, जिसे मेडिकल भाषा में बिना रुकावट वाली कोरोनरी आर्टरी के साथ मायोकार्डियल इन्फार्क्शन कहा जाता है. ये क्यों होता है और इसके क्या लक्षण हैं इस बारे में डॉक्टर ने बताया है.

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दिल की बीमारी का रिस्क ( Photo- ITG)
दिल की बीमारी का रिस्क ( Photo- ITG)

अगर आपको लगता है कि हार्ट की नसों में ब्लॉकेज नहीं है तो हार्ट अटैक का खतरा भी नहीं हो सकता, तो यह पूरी तरह सही नहीं है, कुछ लोगों में हार्ट की नसों में बड़ी ब्लॉकेज न होने के बावजूद हार्ट अटैक हो सकता है. मेडिकल भाषा में इसे बिना रुकावट वाली कोरोनरी आर्टरी के साथ मायोकार्डियल इन्फार्क्शन (MINOCA) कहते हैं. हार्ट अटैक के कुल मामलों में से 6 से 10 फीसदी ऐसे ही होते हैं. ये समस्या किन लोगों को और क्यों होती है. इसके शुरुआती लक्षण क्या हैं इस बारे में डॉक्टर ने बताया है.

दिल्ली के मेदांता मूलचंद मेडिसिटी अस्पताल के कार्डियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. तरुण कुमार ने Aajtak.in से बातचीत में बताया है. डॉ तरुण कहते हैं कि हार्ट अटैक केवल हार्ट की नस में ब्लॉकेज होने से ही नहीं होता. कई दूसरी वजहें भी हो सकती हैं, जब दिल की मांसपेशियों तक खून और ऑक्सीजन की सप्लाई सही तरीके से नहीं हो पाती है तो भी दिल का दौरा पड़ सकता है. 

ब्लॉकेज के बिना कैसे आ सकता है हार्ट अटैक?

डॉ तरुण बताते हैं कि कभी-कभी मरीज को हार्ट अटैक  होता है, लेकिन एंजियोग्राफी में नसों में कोई बड़ी ब्लॉकेज नहीं दिखती इसे ही  Myocardial Infarction with Non-Obstructive Coronary Arteries ( MINOCA) कहा जाता है. इसके बहुत सारे कारण होते हैं. जब हार्ट की नस अचानक सिकुड़ जाती है तो हार्ट तक खून की सप्लाई नहीं हो पाती जिससे अटैक आ जाता है.  इसको मेडिकल की भाषा में  कोरोनरी आर्टरी स्पाज्म कहते हैं.

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डॉ तरुण कहते हैं कि दिल के अंदर बहुत छोटी-छोटी नसें भी होती हैं. अगर इनमें खून का फ्लो अगर सही नहीं होता है तो मरीज को  माइक्रोवेस्कुलर डिसफंक्शन यानी हार्ट अटैक हो सकता है. इसका ब्लॉकेज होने से कोई खास मतलब नहीं होता है. इसके अलावा अगर हार्ट की नसों में मौजूद कोई बहुत छोटा प्लॉक टूट जाता है तो भी रिस्क होता है. इसके अलावा शरीर में कहीं बना खून का थक्का दिल की नसों तक पहुंचकर वहां जमा हो जाए तो भी दिल का दौरा पड़ जाता है. इसे कोरोनरी एम्बोलिज्म कहा जाता है. कोविड के बाद कई मरीजों में ऐसी समस्या देखी जा रही है.

यह भी पढ़ें: जिम में वर्कआउट करते समय क्यों आ जाता है हार्ट अटैक? दिल के डॉक्टर से जानें सही वजह और बचाव

अगर टेस्ट में ब्लॉकेज नहीं है तो फिर मायोकार्डियल इन्फार्क्शन का पता कैसे लगाएं 

अगर एंजियोग्राफी या CT कोरोनरी एंजियोग्राफी टेस्ट में हार्ट में कोई बड़ी ब्लॉकेज नहीं दिख रही है तो कुछ दूसरे टेस्ट कराए जा सकते हैं.  डॉक्टर मरीज के लक्षण, ECG, बार-बार किए गए ट्रोपोनिन टेस्ट और हार्ट की इमेजिंग को मिलाकर स्थिति समझते हैं. जरूरत पड़ने पर OCT/IVUS और कार्डियक MRI भी किया जाता है. 

यह भी पढ़ें: क्या हार्ट में स्टेंट लगने के बाद भी आ सकता है हार्ट अटैक, जानें किन मामलों में ऐसा हो सकता है

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किनको होता है खतरा

जो लोग बहुत अधिक मानसिक तनाव लेते हैं

ज्यादा ठंडे तापमान में रहने वाले

जो अधिक धूम्रपान करते हैं

कोई भी नशा ज्यादा करने वाले

कौन से लक्षण दिखें तो सावधान हो जाएं?

सीने में दबाव या जकड़न

सीने का दर्द जो हाथ

कंधे, पीठ, गर्दन या जबड़े तक जाए

सांस फूलना

अचानक कमजोरी

ठंडा पसीना आना

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