भारत में युवा को प्रमोशन के लिए बहुत मेहनत करना होता है. लेकिन चीन में युवा प्रमोशन के ऑफर को ठुकरा रहे हैं. वह लंबे समय से चला आ रही धारणा को चुनौती दे रहे हैं. उनका मानना है कि करियर में आगे बढ़ने का मतलब केवल ऊंचे पद पर पहुंचना नहीं है. इससे यह पुरानी सोच बदल रही है कि नौकरी में सफलता का सबसे बड़ा संकेत प्रमोशन पाना है.
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट (SCMP) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन में सोशल मीडिया पर काम करने वाले लोग प्रमोशन को विनम्र तरीके से मना कर रहे हैं. पहले तो इसमें कर्मचारी प्रमोशन का मौका देने के लिए धन्यवाद कहते हैं और बताते हैं कि वे अभी इसके लिए तैयार नहीं हैं. कुछ लोग तो यह भी कहते हैं कि उन्हें इसके हिसाब से सैलरी नहीं दी जा रही है. जबकि कुछ का मानना है कि उनके मौजूदा पद पर रहे हैं कि ज्यादा ऊंचे पद के साथ मिलने वाला ज्यादा काम, जिम्मेदारी और ऑफिस का दबाव क्या वाकई इसके लायक उनके काम और योगदान को ज्यादा अच्छी तरह पहचाना जा रहा है.
10 साल में 3 बार प्रमोशन को किया मना
जून नाम की एक कर्मचारी ने अपने 10 साल के करियर में तीन बार प्रमोशन ठुकराया है. पहली बार उन्हें एक इंटरनेट कंपनी में मैनेजमेंट ट्रेनी के तौर पर प्रमोशन का मौका मिला लेकिन उन्होंने नई जिम्मेदारी लेने के बजाय ट्रैवल करने पर फोकस किया. बाद में एक शिक्षा कंपनी में उन्हें ट्रेनिंग सेंटर की जिम्मेदारी दी गई, लेकिन काम का दबाव बहुत ज्यादा होने के कारण वह सिर्फ दो हफ्ते बाद ही अपनी पुरानी भूमिका में वापस आ गईं. अप्रैल में जून ने फिर प्रमोशन लेने से मना कर दिया. उन्हें पता चला कि नई जिम्मेदारियों के मुकाबले सैलरी बहुत कम है.
प्रमोशन कम बोझ ज्यादा
एक अन्य इंटरनेट कंपनी में प्रोडक्ट मैनेजर झेंग के लिए सीनियर पद मिलना किसी इनाम से ज्यादा एक अतिरिक्त बोझ बन गया. प्रमोशन के बाद उन्हें कई जिम्मेदारियां अकेले संभालनी पड़ीं. चीन के युवा कर्मचारियों के बीच अब प्रमोशन पाने की होड़ कम होती दिख रही है. कई युवा बेहतर पद मिलने के बाद भी प्रमोशन ठुकरा रहे हैं. इसे उनकी महत्वाकांक्षा की कमी नहीं बल्कि मिडिल मैनेजमेंट के बढ़ते दबाव और कम फायदों से बचने का नया ट्रेंड माना जा रहा है.
जिम्मेदारी ज्यादा, फायदा ना के बराबर
मिडिल मैनेजमेंट के स्तर पर कर्मचारियों को सीनियर अधिकारियों और जूनियर स्टाफ के बीच पिसना पड़ता है. सोशल मीडिया पर एक यूजर ने अपना दर्द बयां करते हुए लिखा कि टीम लीडर बनने पर मुझे हर महीने सिर्फ 100 युआन (करीब 15 डॉलर) ज्यादा मिले, लेकिन जरा सी गलती होने पर पूरा ठीकरा मुझ पर फोड़ दिया जाता था. कंपनियां इस स्तर के दबाव को खुद से काम करने की क्षमता विकसित करने का मौका बताती हैं लेकिन युवा अब इस झांसे में नहीं आ रहे हैं. झेंग नाम के एक कर्मचारी ने साफ कहा कि जब आप अपने आसपास देखते हैं और आपको कंपनी में ऐसा कोई व्यक्ति नहीं दिखता जैसा आप बनना चाहते हैं, तो इसका मतलब है कि यह जगह अब आपके विकास के लिए सही नहीं है.
चीन तक ही सीमित नहीं है ये घटना
बता दें कि इस तरह की घटना केवल चीन तक सीमित नहीं है. पश्चिमी देशों में भी युवा कर्मचारियों का कॉरपोरेट मैनेजमेंट से मोहभंग होने लगा है और ब्रिटिश रिक्रूटमेंट फर्म 'रॉबर्ट वाल्टर्स' की रिपोर्ट के अनुसार जेन-Z के आधे से अधिक युवा मैनेजर नहीं बनना चाहते, बल्कि 72 प्रतिशत लोग दूसरों को संभालने के बजाय अपने व्यक्तिगत विकास को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिसे विशेषज्ञों ने बॉसिंग से मुक्ति (Consciously Unbossing) का नया ट्रेंड बताया है.
(नोट- यह खबर सोशल मीडिया पर शेयर किए गए पोस्ट पर आधारित है. aajtak.in इस पर किए गए दावों की पुष्टि नहीं करता)