अमेरिका ने ईरान पर लगातार 9 रातों तक हवाई हमले किए हैं. यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इसकी पुष्टि की है. इसका मुख्य मकसद ईरान की स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में नाकेबंदी और जहाजों पर हमलों की क्षमता को कम करना है. ईरान ने जवाब में बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन्स से अमेरिकी ठिकानों पर हमले किए, खासकर जॉर्डन में. यह टकराव अब पूरे क्षेत्र को प्रभावित कर रहा है. यह लड़ाई न सिर्फ सैन्य है बल्कि आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा की भी है.
जॉर्डन में अमेरिकी नुकसान: ईरान के हमलों का असर
ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर भारी हमले किए. मुख्य निशाना मुवाफ्फक साल्टी एयर बेस (MSAB) या प्रिंस हसन/अल-अज्रक क्षेत्र के ठिकाने रहे. ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन्स का इस्तेमाल किया.
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नुकसान की डिटेल: कम से कम 4 अमेरिकी सैनिक मारे गए, एक लापता था. कई अन्य घायल हुए, जिनमें कुछ गंभीर रूप से. पिछले हफ्ते जॉर्डन के बेसों पर कई हमले हुए, जिससे पूरे संघर्ष में अमेरिकी सैनिकों की मौत का आंकड़ा करीब 16 तक पहुंच गया. ईरान का दावा है कि उसके हमलों में कमांड सेंटर, फाइटर जेट शेल्टर्स, एयरक्राफ्ट पार्किंग और ड्रोन सुविधाएं नष्ट हुईं. कुछ अमेरिकी फाइटर जेट्स भी तबाह हुए. जॉर्डन की एयर डिफेंस ने कुछ मिसाइलों को रोक लिया, लेकिन असर हुआ.
यह हमले अमेरिकी सैनिकों पर अब तक के सबसे घातक प्रत्यक्ष हमलों में शामिल हैं. जॉर्डन जैसे सहयोगी देश में अमेरिकी ठिकानों पर हमला ईरान की जवाबी रणनीति को दिखाता है. इससे क्षेत्रीय स्थिरता को खतरा बढ़ गया है.
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ईरान में बुनियादी ढांचे की तबाही: अमेरिकी हमलों का असर
दूसरी तरफ अमेरिका के 9 रातों के हवाई हमलों ने ईरान के सैन्य और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया. मुख्य निशाने मिसाइल साइटें, कमांड सेंटर, एयर डिफेंस सिस्टम और बंदरगाह रहे.
मुख्य ठिकानों पर हमले: बंदर अब्बास और सिरिक जैसे बंदरगाह, खार्ग द्वीप (तेल निर्यात का प्रमुख केंद्र), क़ेश्म द्वीप, पुल और पानी के प्लांट. कई जगहों पर विस्फोट और आग की खबरें आईं. होर्मोज़गान प्रांत में पानी के भंडारण सुविधाओं को नुकसान से हजारों लोग पानी से वंचित हो गए. तेल संबंधित ढांचा और बंदरगाह सुविधाएं क्षतिग्रस्त हुईं.
अमेरिका का दावा है कि इससे ईरान की होर्मुज में जहाजों को धमकी देने की क्षमता काफी कम हो गई. ईरान कहता है कि उसके पास अब भी काफी मिसाइल स्टॉक बचा है. हालांकि, अमेरिकी हमलों से ईरान के सैन्य बुनियादी ढांचे में भारी सामग्री नुकसान हुआ है. लंबे समय में ईरान की रिकवरी मुश्किल होगी.
मिडिल ईस्ट में देशवार तबाही: पूरे क्षेत्र का विश्लेषण
यह संघर्ष एक देश तक सीमित नहीं रहा. कई देश प्रभावित हुए जहां अमेरिकी या सहयोगी ठिकाने हैं...
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अन्य इलाकों में पर्शियन गल्फ में शिपिंग बाधित हुई. कोई बड़ा जमीनी आक्रमण नहीं हुआ; लड़ाई मुख्यतः हवाई और मिसाइल वाली रही. इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित हो रहा है.
कौन कहां भारी पड़ा?
अमेरिका ने सतत हमलों और ईरान के बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाने में बढ़त हासिल की है. उसके हमलों से ईरान की मिसाइल और बंदरगाह क्षमताएं कमजोर हुईं. लेकिन ईरान के मिसाइल-ड्रोन से जॉर्डन जैसे ठिकानों पर अमेरिकी सैनिकों को नुकसान पहुंचाकर जवाब दिया. यह ईरान की जवाबी क्षमता को दिखाता है.
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अमेरिका की सामरिक बढ़त है, लेकिन ईरान ने साबित किया कि वह भारी दबाव में भी नुकसान पहुंचा सकता है. यह 9 रातों की लड़ाई दिखाती है कि आधुनिक युद्ध कैसे मल्टी-डायमेंशनल होते हैं. होर्मुज जैसे चोकपॉइंट पर नियंत्रण की लड़ाई पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती है.
तेल की कीमतें बढ़ रही हैं, शिपिंग बीमा महंगा हो रहा है. विकासशील देशों में महंगाई और खाद्य संकट का खतरा है. अंतरराष्ट्रीय समुदाय को डिप्लोमेसी की जरूरत है. फिलहाल दोनों पक्ष अपनी स्थिति मजबूत कर रहे हैं. आम लोगों पर इसका असर महंगाई और अनिश्चितता के रूप में पड़ रहा है.
ऋचीक मिश्रा