Exclusive: पहलगाम आतंकियों से लेकर शाहजाद भट्टी नेटवर्क तक... सेना ने साल भर में चलाए 34 ऑपरेशन

ऑपरेशन महादेव से लेकर शाहजाद भट्टी नेटवर्क तक, एक साल में सेना ने जम्मू-कश्मीर में 34 बड़े ऑपरेशन चलाए. चिनार और व्हाइट नाइट कोर ने घुसपैठ रोकी, ठिकाने तोड़े और आतंकियों को खत्म किया.

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ऑपरेशन वारसुन कुपवाड़ा के ब्रिजथोर जंगल में 8 अक्टूबर 2025 को हुआ. आतंकी ठिकाना ध्वस्त.  दो एके-सीरीज राइफल, चार रॉकेट लॉन्चर और गोला-बारूद बरामद. (Photo: ITG) ऑपरेशन वारसुन कुपवाड़ा के ब्रिजथोर जंगल में 8 अक्टूबर 2025 को हुआ. आतंकी ठिकाना ध्वस्त. दो एके-सीरीज राइफल, चार रॉकेट लॉन्चर और गोला-बारूद बरामद. (Photo: ITG)

शिवानी शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 18 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 5:55 PM IST

अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारतीय सुरक्षा बलों ने जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ एक सतत और आक्रामक अभियान शुरू किया. जुलाई 2025 में ऑपरेशन महादेव के तहत पहलगाम हमले के तीन आतंकियों को डाचिगाम क्षेत्र में खत्म कर दिया गया.

यह संयुक्त अभियान था जिसमें सेना की 4 पारा, सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस शामिल थीं. इस सफलता के बाद सुरक्षा बलों का फोकस सिर्फ प्रतिक्रिया देने से बदलकर आतंकियों, उनके सपोर्ट नेटवर्क और घुसपैठ मार्गों को व्यवस्थित रूप से खत्म करने पर आ गया. 

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इंडिया टुडे द्वारा प्राप्त ऑपरेशनल रिकॉर्ड्स के अनुसार पिछले एक साल में चिनार कोर (कश्मीर) और व्हाइट नाइट कोर (जम्मू) ने लगभग 34 महत्वपूर्ण काउंटर-टेरर और एंटी-इन्फिल्ट्रेशन अभियान चलाए. ये आंकड़े अनुमानित हैं क्योंकि कई लंबे अभियानों के अलग-अलग चरणों को एक ही ऑपरेशन माना गया है.  

चिनार कोर के अभियान: उत्तर और दक्षिण कश्मीर में खुफिया शिकार

चिनार कोर ने कुपवाड़ा, बारामुला, बांदीपोरा, गांदरबल, शोपियां और कुलगाम जैसे क्षेत्रों में व्यापक अभियान चलाए. अगस्त 2025 में ऑपरेशन नागनी टॉप (कलारूस, कुपवाड़ा) में संयुक्त सेना-पुलिस-बीएसएफ सर्च ऑपरेशन में एक ठिकाना तोड़ा गया और पिस्टल, मैगजीन, 12 ग्रेनेड तथा गोला-बारूद बरामद हुए. 

ऑपरेशन अलाचिजाब (गुलगाम जंगल) में तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया. हथियार-विस्फोटक बरामद हुए. ऑपरेशन कोटनाला (आवरा बाउल) में भी पिस्टल, यूबीजीएल, ग्रेनेड और गोला-बारूद मिले. बांदीपोरा के गुरेज सेक्टर में ऑपरेशन नौशेरा नर-IV में घुसपैठ की कोशिश के दौरान दो आतंकी मारे गए. कुलगाम में ऑपरेशन गुद्दर में एक आतंकी मारा गया जबकि एक जूनियर कमीशंड ऑफिसर घायल हुए.  

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अक्टूबर-नवंबर में ऑपरेशन वारसुन में एके राइफल, रॉकेट लॉन्चर और गोला-बारूद बरामद हुए. ऑपरेशन अमर (मच्छल) में दो आतंकी मारे गए. ऑपरेशन पिंपल (केरन) में घुसपैठ की कोशिश नाकाम की गई. दो आतंकी मारे गए. 2026 में ऑपरेशन डिग्गी-2 (उरी) में एक पाकिस्तानी आतंकी मारा गया. 

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ऑपरेशन चित्रगाम (शोपियां) में 14.5 किलो का रिमोट ट्रिगर वाला आईईडी बेअसर किया गया. ऑपरेशन केरन में पांच एके राइफल, मैगजीन और गोला-बारूद का बड़ा भंडार मिला. ऑपरेशन सिमरी में एक पाकिस्तानी नागरिक को संदिग्ध परिस्थितियों में गिरफ्तार किया गया.

ऑपरेशन चनापोरा में लश्कर-ए-तैयबा का आतंकी जाकिर गनई मारा गया. इन अभियानों का महत्व आतंकियों की संख्या खत्म करने में नहीं बल्कि विस्फोटक, हथियार, ठिकाने और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को नष्ट करने में है.

व्हाइट नाइट कोर: एलओसी सील करना और जम्मू के अंदर मिशन

जम्मू क्षेत्र में व्हाइट नाइट कोर ने पूंछ, राजौरी, किश्तवाड़ और एलओसी सेक्टरों में लगातार अभियान चलाए. सबसे महत्वपूर्ण ऑपरेशन त्राशी-I (किश्तवाड़) था जिसमें जैश-ए-मोहम्मद के सात आतंकियों को खत्म किया गया, जिसमें कमांडर सैफुल्लाह भी शामिल था. यह 326 दिनों का लंबा अभियान था जिसमें कठिन ऊंचाई वाले इलाकों में एफपीवी ड्रोन, सैटेलाइट इमेजरी, यूएवी और खुफिया नेटवर्क का इस्तेमाल हुआ. 

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ऑपरेशन शिवशक्ति में दो घुसपैठिए मारे गए. फरवरी 2026 में नथुआ टिब्बा (सुंदरबनी) में घुसपैठ नाकाम की गई. मार्च में भिंबर गली और झंगर-नौशेरा में घुसपैठ रोकी गई. पूंछ में प्राकृतिक गुफाओं से विस्फोटक बरामद हुए. ऑपरेशन गनी में आईईडी, ग्रेनेड और पिस्टल मिले. एक अभियान में हथियार सप्लायर को गिरफ्तार किया गया जिसके पाकिस्तान से लिंक थे. 

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दो मोर्चों पर रणनीति और राष्ट्रीय स्तर का अभियान

ये अभियान दो स्तर की रणनीति दिखाते हैं. पहला स्तर एलओसी पर घुसपैठ रोकना है जहां खुफिया, निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया से आतंकियों को अंदर आने से पहले ही रोक लिया जाता है. दूसरा स्तर अंदरूनी इलाकों में ठिकाने तोड़ना, हथियार जब्त करना, मददगारों को गिरफ्तार करना और आतंकियों को खत्म करना है. 

चिनार कोर उत्तर-दक्षिण कश्मीर के ग्रिड पर फोकस कर रहा है जबकि व्हाइट नाइट कोर जम्मू के जंगली-पहाड़ी इलाकों में सक्रिय है. इसी बीच केंद्रीय गृह मंत्रालय ने शाहजाद भट्टी नेटवर्क पर राष्ट्रव्यापी कार्रवाई की जिसमें 14 राज्यों में 80 से ज्यादा एफआईआर में 253 ऑपरेटिव गिरफ्तार हुए. यह स्वतंत्रता दिवस के आसपास संभावित हमलों को रोकने के लिए था.  

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निरंतर सुरक्षा ढांचा और आगे की राह

ऑपरेशन महादेव के बाद का सुरक्षा ढांचा दिखाता है कि सेना आतंकियों के निकलने का इंतजार नहीं कर रही. खुफिया इनपुट को निगरानी से जोड़ा जा रहा है. घुसपैठ मार्गों पर नजर रखी जा रही है. मददगारों को पकड़ा जा रहा है. सबसे कठिन इलाकों में भी पीछा किया जा रहा है.

कुपवाड़ा से शोपियां और उरी से किश्तवाड़ तक यह अभियान आतंकियों को तीन चीजें नहीं देने पर आधारित है. घुसपैठ मार्ग, सुरक्षित ठिकाने और स्थानीय लॉजिस्टिक्स सपोर्ट. राष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान से जुड़े नेटवर्क को तोड़ने के साथ यह पूरे चेन पर लड़ाई है- सीमा और जंगलों से लेकर देश के अंदर हैंडलर्स और स्लीपर सेल्स तक. 

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चिनार कोर - 15 कोर / कश्मीर

  • ऑपरेशन महादेव: डाचिगाम/कश्मीर - जुलाई 2025- पहलगाम हमले के तीन आतंकियों को मारा गया.  
  • ऑपरेशन अखल: कुलगाम - 1 अगस्त 2025- आतंकियों से मुठभेड़ हुआ.
  • ऑपरेशन नागनी टॉप: कलारूस, कुपवाड़ा- 5 अगस्त 2025- आतंकी ठिकाना ध्वस्त; पिस्तौल, मैगजीन, 12 ग्रेनेड और गोला-बारूद बरामद.
  • ऑपरेशन अलाचिजाब: गुलगाम जंगल, कुपवाड़ा - 13 अगस्त 2025- तीन संदिग्ध व्यक्तियों को गिरफ्तार; पिस्तौल, मैगजीन, गोला-बारूद और अन्य युद्ध सामग्री बरामद.
  • ऑपरेशन वाजहामा: कुपवाड़ा - 14 अगस्त 2025 -संयुक्त खोज अभियान.
  • ऑपरेशन नौशेरा नर-IV: गुरेज, बांदीपोरा- 28 अगस्त 2025- घुसपैठ की कोशिश के दौरान दो आतंकी ढेर.
  • ऑपरेशन कोटनाला: आवरा बाउल, कुपवाड़ा - 30–31 अगस्त 2025- ठिकाना ध्वस्त; पिस्तौल, यूबीजीएल, ग्रेनेड और गोला-बारूद बरामद.
  • ऑपरेशन गुद्दर: कुलगाम - 8 सितंबर 2025- एक आतंकी ढेर; जेसीओ घायल. आतंकियों से संपर्क / अज्ञात अभियान- दुल, किश्तवाड़- 10 अगस्त 2025- खुफिया आधारित अभियान; गोलीबारी हुई.
  • ऑपरेशन वारसुन: ब्रिजथोर जंगल, कुपवाड़ा - 8 अक्टूबर 2025 - ठिकाना ध्वस्त; दो एके-सीरीज राइफल, चार रॉकेट लॉन्चर और गोला-बारूद बरामद.
  • ऑपरेशन अमर: मच्छल, कुपवाड़ा- 13 अक्टूबर 2025- दो आतंकी ढेर; हथियार और उपकरण बरामद. 
  • ऑपरेशन पिंपल: केरन, कुपवाड़ा- 7 नवंबर 2025- घुसपैठ की कोशिश; संपर्क के बाद आतंकी घिरे.
  • ऑपरेशन डिग्गी-2: बुछर, उरी - 14–15 मार्च 2026 - पाकिस्तानी आतंकी ढेर; एके राइफल, पिस्तौल और गोला-बारूद बरामद.
  • ऑपरेशन अराहामा: गांदरबल- 31 मार्च 2026- आतंकियों द्वारा फायरिंग. 
  • ऑपरेशन चित्रगाम: जैनापोरा, शोपियां - 8 अप्रैल 2026- रिमोट ट्रिगर वाला 14.5 किलो आईईडी बरामद और ढेर. एक्सफिल्ट्रेशन प्रयास विफल - उरी, बारामूला - 31 मई 2026- सोपोर के दो व्यक्ति और कथित गाइड गिरफ्तार.
  • ऑपरेशन सिमरी: कुपवाड़ा - 12 जून 2026 - संदिग्ध परिस्थितियों में एलओसी पार करने वाले पाकिस्तानी नागरिक गिरफ्तार.
  • ऑपरेशन केरन: कुपवाड़ा 6 जुलाई 2026 - ठिकाना ध्वस्त; पांच एके-सीरीज राइफल, नौ मैगजीन, ग्रेनेड और बड़ी मात्रा में गोला-बारूद बरामद.
  • ऑपरेशन चनापोरा: शोपियां 2026 - संयुक्त अभियान में लश्कर-ए-तैयबा आतंकी जाकिर गनई ढेर. 

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व्हाइट नाइट कोर - 14 कोर / जम्मू

  • ऑपरेशन शिवशक्ति: एलओसी/जम्मू - जुलाई 2025- दो घुसपैठिए आतंकी ढेर; तीन हथियार बरामद.
  • आतंकियों से संपर्क: किश्तवाड़ 19 सितंबर 2025- खुफिया आधारित अभियान; गोलीबारी हुई.
  • अज्ञात हथियार बरामदगी अभियान: पूंछ सितंबर 2025- एके-सीरीज हथियार, चार एके मैगजीन और 20 ग्रेनेड बरामद.
  • छतरू अभियान: किश्तवाड़ 5 नवंबर 2025- आतंकियों से मुठभेड़.
  • ऑपरेशन किया: जोफर जंगल, बसंतगढ़ फरवरी 2026- दो आतंकी ढेर. 
  • ऑपरेशन त्राशी-1: किश्तवाड़ जनवरी–फरवरी 2026- लंबा काउंटर-टेरर अभियान;  सात आतंकी ढेर.
  • ऑपरेशन ज्वाला: नथुआ टिब्बा, सुंदरबनी 19 फरवरी 2026- घुसपैठ प्रयास विफल; एके-47, मैगजीन, गोला-बारूद और उपकरण बरामद.
  • हरी बुढ़ा बाउल अभियान: पूंछ 21 फरवरी 2026 - प्राकृतिक ठिकाना ध्वस्त; पिस्तौल, मैगजीन और लॉजिस्टिक सामग्री बरामद.
  • ऑपरेशन गनी: गनी जंगल, पूंछ 25 फरवरी 2026- 4.5 किलो और 800 ग्राम आईईडी, ग्रेनेड, पिस्तौल और गोला-बारूद बरामद.
  • भिंबर गली घुसपैठ अभियान: 4 मार्च 2026- घुसपैठ प्रयास विफल.
  • झंगर-नौशेरा घुसपैठ अभियान: 10 मार्च 2026- एक पाकिस्तान-प्रायोजित आतंकी ढेर.
  • विस्फोटक बरामदगी अभियान: पूंछ - 11 मार्च 2026- प्राकृतिक गुफा से लगभग 4 किलो विस्फोटक बरामद.
  • आतंक मॉड्यूल ध्वस्त: नौशेरा -19 फरवरी 2026 - संदिग्ध मददगार गिरफ्तार; तुर्की और चीनी बनावट की पिस्तौल तथा गोला-बारूद बरामद.
  • घुसपैठ प्रयास विफल: कृष्णा घाटी, पूंछ- 12 मई 2026- एक घुसपैठिया ढेर; एलओसी उल्लंघन रोका गया.
  • ऑपरेशन शेरूवाली: गंभीर मुगलान, राजौरी - 23 मई 2026 - खुफिया आधारित संयुक्त अभियान; आतंकियों से मुठभेड़.
     
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