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चीनी की कीमतों पर लगाम लगाने की तैयारी, सरकार ने गन्ने से इथेनॉल बनाने पर लगाई रोक

सरकार के इस कदम से गन्ने का अधिक इस्तेमाल चीनी बनाने में किया जा सकेगा. इससे बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों में तेजी रोकने में मदद मिलने की उम्मीद है

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 चीनी के दाम बढ़ने का डर (Photo-ITG)
चीनी के दाम बढ़ने का डर (Photo-ITG)

घरेलू बाजार में चीनी की आपूर्ति बनाए रखने और बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने अहम फैसला किया है. सरकार ने तेल कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे 1 नवंबर 2026 से शुरू होने वाले नए इथेनॉल आपूर्ति वर्ष में गन्ने के रस, चीनी के सिरप और बी-हेवी शीरे से बने इथेनॉल की खरीद न करें. सरकार के इस कदम का मकसद गन्ने का इस्तेमाल इथेनॉल के बजाय चीनी बनाने में बढ़ाना है, ताकि बाजार में चीनी की कमी न हो और कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी को रोका जा सके.

दरअसल, इस साल कमजोर मॉनसून और कम बारिश के चलते गन्ने की फसल पर असर पड़ने की आशंका है. इससे चीनी का उत्पादन घटने की चिंता बढ़ गई है. ऐसे में सरकार घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए चीनी की उपलब्धता सुनिश्चित करना चाहती है.

सरकारी तेल कंपनियों ने नए इथेनॉल आपूर्ति वर्ष के लिए करीब 1,100 करोड़ लीटर इथेनॉल खरीदने का टेंडर जारी किया है. इसमें हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL), इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL), नुमालीगढ़ रिफाइनरी और मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स शामिल हैं. टेंडर में साफ किया गया है कि कंपनियां गन्ने के रस, चीनी के सिरप और बी-हेवी शीरे से बने इथेनॉल की खरीद नहीं करेंगी. हालांकि, दूसरे कच्चे माल से तैयार इथेनॉल खरीदने पर रोक नहीं लगाई गई है.

इन चीजों से बनेगा इथेनॉल

नए नियमों के अनुसार, इथेनॉल बनाने वाली कंपनियां सी-हेवी शीरे, खराब अनाज, FCI के पास मौजूद अतिरिक्त चावल और मक्का का इस्तेमाल कर सकेंगी. इसके साथ ही, राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति में शामिल अन्य स्वीकृत स्रोतों से भी इथेनॉल तैयार किया जा सकेगा. सरकार के इस कदम से इथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने के इस्तेमाल को कम करने में मदद मिलेगी. इससे गन्ने का ज्यादा हिस्सा चीनी बनाने के लिए बच सकेगा, जिससे घरेलू बाजार में चीनी की आपूर्ति बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है.

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क्यों लिया गया ये फैसला?

भारत में चीनी की खपत ज्यादा है और ये दुनिया के प्रमुख चीनी उत्पादक देशों में एक है. कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसे गन्ना उत्पादक राज्यों में बारिश की कमी  की वजह से फसल पर असर पड़ने की आशंका है, जिससे चीनी के उत्पादन पर भी असर पड़ेगा, जिससे घरेलू बाजार में चीनी के दाम बढ़ सकते हैं, जिसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ सकता है. 

सरकार पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने को लगातार बढ़ावा दे रही है. इससे कच्चे तेल के आयात पर देश की निर्भरता कम करने और विदेशी मुद्रा की बचत करने में मदद मिलती है. इथेनॉल तैयार करने के लिए गन्ने के रस, शीरे और अनाज जैसे कच्चे माल का इस्तेमाल किया जाता है.

हालांकि, सरकार के सामने अब इथेनॉल उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ घरेलू बाजार में चीनी की आपूर्ति बनाए रखने की चुनौती भी है. ऐसे में दोनों जरूरतों के बीच संतुलन बनाने के लिए सरकार ने गन्ने के रस और चीनी बनाने की प्रक्रिया से जुड़े कुछ उत्पादों से तैयार इथेनॉल की खरीद पर रोक लगाने का फैसला किया है.

सरकार ने मिलों को अक्टूबर 2026 में तैयार की गई चीनी को अक्टूबर के साथ-साथ नवंबर महीने में भी बेचने की छूट दे दी है. यह छूट उनके हर महीने तय होने वाले बिक्री कोटे से अलग होगी. मान लीजिए, अगर कोई मिल अक्टूबर में 1,000 मीट्रिक टन चीनी बनाती है, तो वह इसे नवंबर तक बाजार में उतार सकती है. इससे चीनी मिलों को अपना माल बेचने में आसानी होगी और बाजार में चीनी की कमी भी नहीं होगी.

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