लगातार हो रही बारिश के कारण गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है. पूर्वी उत्तर प्रदेश के चंदौली में भी गंगा के उफान से तटवर्ती इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है. हालांकि फिलहाल रिहायशी क्षेत्र सुरक्षित हैं, लेकिन नदी के किनारे कछार में की गई सब्जी की खेती बुरी तरह प्रभावित हुई है. कई इलाकों में खेत पानी में डूब गए हैं, जिससे किसानों को फसल और लागत दोनों के नुकसान की चिंता सताने लगी है.
चंदौली के सहजौर गांव में गंगा किनारे कछार क्षेत्र में की गई सब्जी की खेती पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है. पिछले करीब एक सप्ताह से नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है. इसके चलते गांव के आसपास सैकड़ों बीघे में लगी सब्जी की फसल पानी में डूब गई है. किसान अब पानी में डूबी परवल की फसल को बचाने की कोशिश कर रहे हैं. उनका कहना है कि अगर गंगा का जलस्तर इसी रफ्तार से बढ़ता रहा तो बाकी बचे खेत भी जल्द पानी में समा सकते हैं और पूरी फसल बर्बाद होने का खतरा है.
10 बीघे में लगाई थी परवल, 8 बीघा डूबा
सहजौर गांव के किसान अजय ने गंगा किनारे कछार क्षेत्र में करीब 10 बीघे जमीन पर परवल की खेती की थी. बढ़ते जलस्तर के कारण उनके 8 बीघे खेत में पानी भर चुका है. अब उन्हें डर है कि अगर नदी का पानी और बढ़ा तो बाकी 2 बीघे जमीन भी जलमग्न हो जाएगी. अजय के मुताबिक, फसल में काफी लागत लगाई गई थी. खेत डूबने से न केवल उपज बर्बाद होने का खतरा है, बल्कि खेती में लगाया गया पैसा भी वापस निकलना मुश्किल हो सकता है.
खेती की लागत डूबने का मंडरा रहा खतरा
गांव के ही किसान गुड्डू ने करीब तीन बीघे में परवल की खेती की थी. इनमें से एक बीघा खेत गंगा के बढ़ते पानी की चपेट में आ चुका है. पानी भरने से इस हिस्से की फसल बर्बाद हो गई है. किसानों की चिंता अब बाकी खेतों को लेकर है. उनका कहना है कि नदी का जलस्तर लगातार बढ़ता रहा तो धीरे-धीरे और खेत पानी में डूब सकते हैं. इससे सब्जी की पूरी फसल खराब होने के साथ खेती की लागत भी डूबने का खतरा है.
रिहायशी इलाकों पर फिलहाल खतरा नहीं
फिलहाल चंदौली में गंगा किनारे के रिहायशी इलाकों में बाढ़ का पानी नहीं पहुंचा है और आबादी वाले क्षेत्र सुरक्षित बताए जा रहे हैं. हालांकि कछार में खेती करने वाले किसानों के खेतों में पानी लगातार बढ़ रहा है. गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी जारी रही तो आने वाले दिनों में फसल को और नुकसान होने की आशंका है. किसानों की नजर अब नदी के जलस्तर पर टिकी है और वे किसी तरह बची हुई परवल की फसल को सुरक्षित निकालने की कोशिश कर रहे हैं.