scorecardresearch
 

VIDEO: महराजगंज के बुद्धिराम का क्या है रहस्य, एक दिन बन जाते हैं जानवर... खाते हैं चारा

उत्तर प्रदेश के महराजगंज के रुदलापुर गांव में नागपंचमी पर एक अनोखी परंपरा चर्चा का विषय बनी हुई है. ग्रामीणों के मुताबिक 70 वर्षीय बुद्धिराम के शरीर में हर तीन साल में ‘महिषासुर’ का प्रवेश होता है. इसके बाद वह कथित तौर पर भूसा, घास और जानवरों का चारा खाने लगते हैं.

Advertisement
X
जानवरों का चारा खाते बुद्धिराम. (Photo: Screengrabs)
जानवरों का चारा खाते बुद्धिराम. (Photo: Screengrabs)

उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. यहां रुदलापुर गांव में नागपंचमी के दिन हर तीन वर्ष में एक ऐसी घटना सामने आती है, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोगों का हुजूम उमड़ पड़ता है. ग्रामीणों का दावा है कि गांव के ही रहने वाले 70 वर्षीय बुद्धिराम के शरीर में हर तीन वर्ष में नाग पंचमी के दिन 'महिषासुर' का प्रवेश होता है. जिसके बाद वे कथित तौर पर जानवरों के चारे यानी भूसा, घास, जूठन खाने लगते हैं.

ग्रामीणों ने तो यह भी दावा है कि वे चार हौदियों में रखा घास, भूस तक खा जाते हैं. आखिर इस पूरे घटनाक्रम के पीछे आस्था है या अंधविश्वास या फिर कोई चिकित्सकीय या वैज्ञानिक वजह जिसका रहस्य अभी तक अनसुलझा है. अब सवाल ये उठता है कि क्या वाकई किसी इंसान के शरीर में ‘महिषासुर’ का प्रवेश हो सकता है? या फिर यह इंसानी तमाशा है?

1975 से हर 3 वर्ष पर हो रहा है ऐसा
ग्रामीणों का माने तो करीब 70 वर्षीय बुद्धिराम वर्ष 1975 से इस तरह की घटना का हिस्सा रहे हैं. उनका दावा है कि नागपंचमी के दिन उनके ऊपर महिषासुर की सवारी आती है. इसके बाद वे आम दिनों के इंसानी व्यवहार से अलग होकर जानवरों के लिए रखे गए भूसे और घास को खाने लगते हैं. गांव में स्थित समय माता मंदिर में पूजा-पाठ के दौरान ही यह घटनाक्रम शुरू होती है. जिसके बाद बुद्धिराम कथित तौर पर नाद में रखे पानी के साथ भूसा और घास खाने लगते हैं.

Advertisement

इस दृश्य को देखने के लिए आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में हुजूम उमड़ पड़ता है. इस दौरान कई लोग उन्हें अपने हाथों से केला, घास, भूसा और लड्डू खिलाते हैं. कुछ ग्रामीणों का दावा है कि यहां मांगी गई मनौतियां पूरी होती हैं और इसी आस्था के चलते हर तीन साल में बड़ी संख्या में लोग यहां उमड़ पड़ते है. हालांकि, इन दावों की अभी तक कोई वैज्ञानिक पुष्टि सामने नहीं आई है. कारण यही है कि इस पूरे घटनाक्रम को केवल आस्था के नजरिए से देखने के बजाय वैज्ञानिक और चिकित्सकीय जांच के नजरिए से देखना भी जरूरी हो जाता है. 

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement