scorecardresearch
 

'हमारे इलाके को ईरान जंग में क्यों घसीटा?', UAE अरबपति ने ट्रंप को लिखा ओपन लेटर

यूएई के अरबपति खलफ़ अहमद अल हब्तूर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ओपन लेटर लिखकर ईरान के साथ जंग के फैसले पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि इस संघर्ष का सबसे ज्यादा असर खाड़ी देशों पर पड़ रहा है और क्षेत्र में तनाव बढ़ रहा है.

Advertisement
X
अमीराती बिजनेसमेन खलफ अहमद अल हब्तूर ने ट्रंप से पूछे कई बड़े सवाल (Photo: Al Habtoor Group)
अमीराती बिजनेसमेन खलफ अहमद अल हब्तूर ने ट्रंप से पूछे कई बड़े सवाल (Photo: Al Habtoor Group)

UAE के टॉप उद्योगपतियों में से एक, अरबपति खलफ़ अहमद अल हब्तूर (Khalaf Ahmad Al Habtoor) ने US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप को एक ओपन लेटर लिखा है, जिसमें उन्होंने ईरान के साथ जंग करने के उनके फ़ैसले पर हमला किया है.

अल हब्तूर ग्रुप के अमीराती अरबपति फ़ाउंडर और चेयरमैन ने पूछा, "आपको हमारे इलाके को ईरान के साथ जंग में घसीटने का अधिकार किसने दिया? और आपने यह खतरनाक फ़ैसला किस आधार पर लिया?"

हब्तूर ने सवाल उठाते हुए कहा, "क्या आपने ट्रिगर खींचने से पहले होने वाले नुकसान का हिसाब लगाया था? और क्या आपने सोचा था कि इस बढ़ोतरी से सबसे पहले इस इलाके के देशों को ही नुकसान होगा!"

ट्रंप से हब्तूर के बड़े सवाल

  • क्या यह आपका फ़ैसला था या नेतन्याहू का दबाव था?
  • क्या आपने निकालने से पहले कोलेटरल डैमेज का हिसाब लगाया था?
  • आपने GCC देशों को उस खतरे के बीच में रखा, जिसे उन्होंने नहीं चुना था.
  • आपके "बोर्ड ऑफ़ पीस" इनिशिएटिव को गल्फ़ देशों ने फ़ंड किया था. अब हम पर हमला हो रहा है. वह पैसा कहां गया?
  • आपने कोई जंग न करने का वादा किया था. आपने 7 देशों सोमालिया, इराक, यमन, नाइजीरिया, सीरिया, ईरान और वेनेज़ुएला में ऑपरेशन किए हैं.
  • आपकी अप्रूवल रेटिंग 400 दिनों में 9% कम हो गई है.
  • आपने अमेरिकियों से शांति का वादा किया गया था. उन्हें उनके टैक्स से युद्ध के लिए फ़ंड मिल रहा है.

यह भी पढ़ें: 'पहले ईरान खत्म करूंगा, फिर...', कौन देश होगा ट्रंप का अगला टारगेट?

Advertisement

ईरान जंग का असर झेल रहे खाड़ी देश!

यह लेटर UAE में नाराज़गी का एक बहुत कम देखा गया पब्लिक एक्सप्रेशन है, जहां राजनीतिक चिंताएं अक्सर प्राइवेट चैनलों के ज़रिए बताई जाती हैं. यह इस इलाके में बढ़ती बेचैनी को भी दिखाता है कि खाड़ी देश अमेरिका की जंग का सबसे ज़्यादा असर झेल रहे हैं.

हब्तूर ने आगे कहा, “इस इलाके के लोगों को भी यह पूछने का हक है कि क्या यह फैसला सिर्फ आपका था? या यह नेतन्याहू और उनकी सरकार के दबाव की वजह से आया?”

“आपने गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल और अरब देशों को एक ऐसे खतरे के बीच में डाल दिया है, जिसे उन्होंने चुना नहीं था. खुदा का शुक्र है, हम मज़बूत हैं और अपनी रक्षा करने में सक्षम हैं और हमारे पास सेना और सुरक्षा है, जो हमारे देशों की रक्षा करती है, लेकिन सवाल यह है कि आपको हमारे इलाके को जंग के मैदान में बदलने की इजाज़त किसने दी?”

“क्योंकि शांति और स्थिरता के नाम पर आपने जिस बोर्ड ऑफ पीस पहल का ऐलान किया था, उसकी स्याही सूखने से पहले ही हम खुद को एक ऐसी मिलिट्री बढ़त का सामना करते हुए पाते हैं, जो पूरे इलाके को खतरे में डालती है. तो वे पहल कहां गईं? और शांति के नाम पर किए गए वादों का क्या हुआ?”

Advertisement

यह भी पढ़ें: भारत 30 दिन तक खरीद सकेगा रूस का कच्चा तेल, ईरान जंग के बीच अमेरिका ने दी छूट

बढ़ता जा रहा है मिडिल ईस्ट जंग का दायरा

7वें दिन, मिडिल ईस्ट में जंग और तेज़ हो गई क्योंकि ईरान ने इज़रायल और US बेस पर नए मिसाइल हमले किए. इज़रायली सेना ने लेबनान में हिज़्बुल्लाह के ठिकानों पर भी हमला किया, जहां करीब आठ लोग मारे गए. इस जंग में ईरान में 1230 से ज़्यादा लोग मारे गए हैं, लेबनान में 70 से ज़्यादा और इज़रायल में करीब एक दर्जन, जबकि छह अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं. ईरान के जवाबी हमलों के बाद कुवैत में U.S. एंबेसी बंद कर दी गई. मिडिल ईस्ट जंग ने ग्लोबल मार्केट को हिला दिया है, तेल की कीमतें बढ़ा दी हैं और होर्मुज स्ट्रेट से शिपिंग धीमी कर दी है. जबकि डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के अगले लीडरशिप पर असर डालने में दिलचस्पी दिखाई है.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement