अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सितंबर 2025 में एक नए संगठन “बोर्ड ऑफ पीस” (Board of Peace) का प्रस्ताव रखा था, जिसका उद्देश्य कथित तौर पर “संघर्ष से प्रभावित या खतरे में पड़े क्षेत्रों में स्थिरता बढ़ाना, भरोसेमंद और कानून आधारित शासन बहाल करना तथा स्थायी शांति सुनिश्चित करना” बताया गया है. 15 जनवरी 2026 को ट्रंप ने औपचारिक रूप से इसके गठन की घोषणा की.
20 जनवरी 2026 को ट्रंप ने कहा कि “संयुक्त राष्ट्र ने कभी मेरी मदद नहीं की,” और इसी को उन्होंने “बोर्ड ऑफ पीस” बनाने का कारण बताया. उन्होंने यह भी दावा किया कि उनका यह संगठन भविष्य में संयुक्त राष्ट्र की जगह ले सकता है.
इस संगठन की सबसे विवादास्पद बात यह है कि इसकी सदस्यता पूरी तरह डोनाल्ड ट्रंप के नियंत्रण में होगी. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप स्थायी सदस्यता के लिए एक-एक सीट की कीमत एक अरब डॉलर रखने का इरादा रखते हैं. संगठन का संचालन एक निजी चार्टर के तहत होगा, जिसमें केवल एक ही व्यक्ति का नाम है- “चेयरमैन ट्रंप.” इस चार्टर के अनुसार, ट्रंप आजीवन सदस्य होंगे और बिना किसी से परामर्श किए बोर्ड की ओर से प्रस्ताव पहलें मंजूर कर सकते हैं.
विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप इस संगठन को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के विकल्प के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं, जहां अंतिम और एकमात्र वीटो शक्ति उन्हीं के पास होगी.
यूएई के अरबपति खलफ़ अहमद अल हब्तूर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ओपन लेटर लिखकर ईरान के साथ जंग के फैसले पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि इस संघर्ष का सबसे ज्यादा असर खाड़ी देशों पर पड़ रहा है और क्षेत्र में तनाव बढ़ रहा है.
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने नियंत्रण वाले 'बोर्ड ऑफ पीस' को 10 अरब डॉलर देने की घोषणा की है. यह रकम इस साल UN को दिए जाने वाले अमेरिकी योगदान से 12 गुना ज्यादा है. फंडिंग की वैधता और प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं.
गाजा में शांति बहाली के लिए बोर्ड ऑफ पीस की पहली बैठक में 40 से अधिक देशों के प्रतिनिधि और लगभग एक दर्जन पर्यवेक्षक शामिल हुए, जिनमें कई मिडिल ईस्ट, यूरोप, एशिया और अन्य देशों के राजनयिक शामिल थे.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस महीने वॉशिंगटन में नए शांति बोर्ड की पहली बैठक आयोजित करेंगे, जिसका उद्देश्य गाजा के पुनर्निर्माण के लिए धन जुटाना है. इस बैठक में कई विश्व नेता शामिल होंगे, जबकि यूरोप और अमेरिका के कई पुराने साथी देशों ने इस बोर्ड में शामिल होने से मना कर दिया है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा को बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का न्योता वापस ले लिया है. ट्रंप ने यह फैसला प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के दावोस में दिए गए भाषण के बाद लिया है. कार्नी ने अपने भाषण में अमेरिका की टैरिफ नीति की आलोचना की थी.
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा है कि अगर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप गाजा में किसी अंतरराष्ट्रीय मिशन के लिए सैनिक भेजने को कहते हैं, तो पाकिस्तान इस पर विचार करने के लिए तैयार है. यह बयान ऐसे समय आया है, जब पाकिस्तान ट्रंप के नेतृत्व वाले ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल हो चुका है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा को अपने ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने का न्योता वापस ले लिया है. यह नया अंतरराष्ट्रीय मंच वैश्विक संघर्षों के समाधान और शुरुआती तौर पर गाजा के पुनर्निर्माण के लिए बनाया गया है. अब तक करीब 35 देशों, खासकर पश्चिम एशिया के प्रमुख देशों ने इसमें शामिल होने की सहमति दी है, जबकि कई यूरोपीय देश इससे दूरी बनाए हुए हैं.
सऊदी अरब समेत आठ मुस्लिम देशों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने की घोषणा की है. मुस्लिम देशों के इस कदम पर कड़ी प्रतिक्रियाएं आई हैं. कुछ लोग इसे फिलिस्तीन के हितों के खिलाफ मान रहे हैं.