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अमेरिका से दूरी, रूस के करीब सऊदी! ट्रंप से बैर के बाद पुतिन की शरण में पहुंचे मोहम्मद बिन सलमान

सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से फोन पर बातचीत की. ट्रंप की विवादित टिप्पणी के बाद यह संपर्क नए कूटनीतिक संकेत दे रहा है. दोनों नेताओं ने मिडिल ईस्ट संकट, ऊर्जा सुरक्षा और युद्धविराम पर चर्चा की, जिससे बदलते वैश्विक समीकरणों और सऊदी की नई रणनीति की झलक मिलती है.

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मोहम्मद बिन सलमान, व्लादिमीर पुतिन (Photo- Reuters)
मोहम्मद बिन सलमान, व्लादिमीर पुतिन (Photo- Reuters)

मिडिल ईस्ट में चल रही जंग के बीच सिर्फ मिसाइलें और सैन्य कार्रवाई ही नहीं, बल्कि कूटनीति भी तेजी से करवट ले रही है. इसी बदलते माहौल में सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच हुई फोन कॉल ने वैश्विक राजनीति में नए संकेत दे दिए हैं. यह बातचीत ऐसे समय में हुई है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान ने सऊदी-अमेरिका रिश्तों में खटास पैदा कर दी है.

दरअसल, ट्रंप ने हाल ही में एक सार्वजनिक मंच से क्राउन प्रिंस को लेकर बेहद विवादित टिप्पणी की थी. उन्होंने यह संकेत दिया कि सऊदी नेतृत्व अब उनके दबाव में है और उन्हें "अच्छा व्यवहार" करना होगा. इस बयान ने कूटनीतिक हलकों में हलचल मचा दी. सऊदी अरब ने भले ही आधिकारिक प्रतिक्रिया न दी हो, लेकिन इसके बाद उठे कदम बहुत कुछ बयान कर रहे हैं.

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इसी संदर्भ में पुतिन और मोहम्मद बिन सलमान के बीच हुई बातचीत को देखा जा रहा है. दोनों नेताओं ने मिडिल ईस्ट में तेजी से बिगड़ते हालात पर विस्तार से चर्चा की. दोनों नेताओं ने ईरान के साथ जारी संघर्ष, लोगों की मौत और अहम बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान पर चिंता जाहिर की. पुतिन ने यह साफ संदेश दिया कि वह सऊदी अरब की संप्रभुता और क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ खड़े हैं.

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OPEC+ में सहयोग बढ़ाने पर जोर

ऊर्जा सुरक्षा इस बातचीत का एक बड़ा केंद्र रही. ईरान जंग के चलते तेल सप्लाई और समुद्री मार्गों पर खतरा बढ़ गया है, जिससे वैश्विक बाजार में अस्थिरता आ रही है. ऐसे में दोनों देशों ने OPEC+ ढांचे के तहत सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया, ताकि तेल की कीमतों को नियंत्रित रखा जा सके और बाजार में संतुलन बना रहे.

सबसे अहम बात यह रही कि दोनों नेताओं ने सैन्य समाधान की बजाय कूटनीतिक रास्ते पर जोर दिया. उन्होंने तत्काल युद्धविराम और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की जरूरत बताई. यह रुख अमेरिका की मौजूदा आक्रामक रणनीति से थोड़ा अलग नजर आता है.

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सऊदी की बदलती विदेश नीति का संकेत

विशेषज्ञ मानते हैं कि यह सिर्फ एक फोन कॉल नहीं, बल्कि सऊदी अरब की बदलती विदेश नीति का संकेत है. लंबे समय तक अमेरिका का करीबी सहयोगी रहने वाला सऊदी अरब अब संतुलन की रणनीति अपनाता दिख रहा है. वह एक तरफ अमेरिका से रिश्ते बनाए रखना चाहता है, लेकिन दूसरी ओर रूस और चीन जैसे वैश्विक ताकतों के साथ भी अपने संबंध मजबूत कर रहा है.

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ट्रंप की बयानबाजी के बाद यह रुझान और स्पष्ट हो गया है. सऊदी अरब अब यह संदेश देना चाहता है कि वह किसी एक धड़े पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहेगा. बदलते वैश्विक हालात में वह अपने हितों के हिसाब से फैसले लेगा.

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