पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर यानी PoK में पाकिस्तान सरकार और सेना के खिलाफ एक बार फिर विरोध की आवाज तेज हो रही है. जम्मू-कश्मीर अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेतृत्व में पलांदरी में बड़ा प्रदर्शन हुआ. प्रदर्शनकारियों ने अपने अधिकार, सम्मान और आजादी की मांग को लेकर पाकिस्तान सरकार के खिलाफ नारेबाजी की.
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए JAAC की कोर कमेटी के सदस्य सरदार अमान कश्मीरी ने पाकिस्तान की सत्ता और सेना पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा, "हम इस गोली के कानून को नहीं मानते." उन्होंने दावा किया कि पिछले 71 दिनों के दौरान प्रदर्शनकारियों ने गोलियों का सामना किया है. वे इससे डरने वाले नहीं हैं.
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'गोलियों से नहीं डरते'
अमान कश्मीरी ने कहा, "इन 71 दिनों में हमने अपने सीने तुम्हारे सामने पेश करके बताए कि हम इन गोलियों से नहीं डरते." उन्होंने आगे कहा कि अगर पाकिस्तान की हुकूमत गोलियों के दम पर शासन करना चाहती है तो जनता भी अपने तरीके से जवाब देने के लिए तैयार है. उन्होंने पाकिस्तान सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर राज्य और वहां के शासक "और कितना गिरना चाहते हैं."
100 से ज्यादा लोगों की मौत का दावा
अमान कश्मीरी ने 4 अक्टूबर 2025 के मुजफ्फराबाद समझौते का भी जिक्र किया. उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान सरकार ने प्रदर्शनकारियों की मांगें मानने का भरोसा दिया था, लेकिन बाद में कथित तौर पर समझौते का पालन नहीं किया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बाद "निहत्थे कश्मीरियों की 100 लाशें गिरा दी गईं." हालांकि, यह प्रदर्शनकारी नेता का दावा है. इसके स्वतंत्र सत्यापन की जानकारी सामने नहीं आई है.
पाकिस्तान के कश्मीर नैरेटिव पर सवाल
अमान कश्मीरी ने पाकिस्तान के कश्मीर को लेकर किए जाने वाले दावों पर भी सवाल उठाए. उन्होंने पाकिस्तान से पूछा कि अगर वह कश्मीरियों के अधिकारों की बात करता है तो कश्मीर घाटी में पिछले दशकों में हुई घटनाओं पर उसका क्या जवाब है. उन्होंने आसिया अंद्राबी और यासीन मलिक का भी जिक्र किया और पाकिस्तान की कश्मीर नीति को लेकर सवाल खड़े किए.
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बाजवा के बयान का भी जिक्र
पाकिस्तानी सेना पर निशाना साधते हुए अमान कश्मीरी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा के कथित बयान का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि 2019 में बाजवा ने कहा था कि "हमारे टैंकों में तेल नहीं है, इसलिए हम हिंदुस्तान से जंग नहीं लड़ सकते." PoK में लगातार उठ रही ऐसी आवाजें पाकिस्तान सरकार और सेना के लिए चुनौती बनती जा रही हैं. पलांदरी का यह प्रदर्शन भी इसी बढ़ते असंतोष की एक और तस्वीर के तौर पर देखा जा रहा है.