ईरान और अमेरिका में सुलह कराने की कोशिशों के बीच पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर ईरान दौरे पर जा रहे हैं. इस दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों और मिडिल-ईस्ट के मौजूदा क्षेत्रीय हालातों पर उच्च स्तरीय वार्ता होगी.
इसी महीने की शुरुआत में पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने भी ईरान गए थे. उन्होंने तेहरान में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ बैठकें की थीं.
रविवार को ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने पत्रकारों को बताया कि फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के साथ एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी तेहरान आ रहा है. ये प्रतिनिधिमंडल ईरानी नेतृत्व से बातचीत करेगा.
बाघेई ने कहा कि इस दौरे का मकसद द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करना और क्षेत्र में शांति-सुरक्षा बनाए रखने के लिए पाकिस्तान के कोशिशों को आगे बढ़ाना है.
होर्मुज बना सबसे बड़ा रोड़ा
राजनयिक हलकों में इस दौरे को जून में अमेरिका और ईरान के बीच हस्ताक्षर किए गए उस MoU को फिर से सक्रिय करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, जिसका मकसद शांति वार्ता के लिए 60 दिनों की समय-सीमा तय करना था. जुलाई में बढ़ा तनाव इस वार्ता के नाकाम होने की असल वजह बनी.
वार्ता में सबसे बड़ी बाधा 'होर्मुज को लेकर बनी हुई है, जहां युद्ध के कारण जहाजों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है. ग्लोबल एनर्जी सप्लाई का लगभग पांचवां हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है.
यह भी पढ़ें: 60 दिन की डेडलाइन खत्म, फिर भी US-ईरान डील बेनतीजा... जानें पेजेश्कियान ने ट्रंप के साथ समझौते का क्यों किया समर्थन?
इससे पहले रविवार को ही ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने अमेरिका के साथ हुए समझौते का बचाव किया था. उन्होंने इसे जंग से बाहर निकलने का एकमात्र तरीका बताया था. वहीं दूसरी तरफ, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 20 अगस्त को चेतावनी दी थी कि अगर ईरान समझौते के लिए तैयार नहीं होता है, तो वो ईरान के खिलाफ 'अब तक की सबसे कठोर आर्थिक कार्रवाई' करेंगे.