उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में सरकारी स्कूलों की बदली तस्वीर अब अभिभावकों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है. नगर निगम और मुरादाबाद स्मार्ट सिटी के संयुक्त प्रयास से बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में बड़े स्तर पर सुविधाओं का विस्तार किया गया है. ‘मिशन कायाकल्प’ के तहत स्कूलों को आधुनिक रूप देने के साथ बच्चों के लिए बेहतर शैक्षणिक माहौल तैयार करने की कोशिश की गई है.
इस पूरे अभियान पर करीब 97 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं. इनमें लगभग 85 करोड़ रुपये 48 सरकारी स्कूलों के कायाकल्प पर लगाए गए, जबकि करीब 12 करोड़ रुपये की लागत से 80 कक्षाओं को डिजिटल क्लासरूम में बदला गया है. इन बदलावों के बाद स्कूलों में पढ़ाई का तरीका भी पहले की तुलना में काफी आधुनिक हो गया है.
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डिजिटल बोर्ड से आसान हुई पढ़ाई
अब इन विद्यालयों में पढ़ाई सिर्फ ब्लैकबोर्ड और चॉक तक सीमित नहीं है. कक्षाओं में डिजिटल बोर्ड और स्मार्ट क्लासरूम की सुविधा उपलब्ध कराई गई है. इसके साथ ही बच्चों के लिए आरओ से शुद्ध पेयजल की व्यवस्था भी की गई है. आधुनिक सुविधाओं से स्कूलों का वातावरण बदला है और इसका असर छात्रों की संख्या पर भी दिखाई दे रहा है.
मुरादाबाद स्मार्ट सिटी के नगर आयुक्त एवं सीईओ दिव्यांशु पटेल के मुताबिक, करीब तीन वर्ष पहले मिशन कायाकल्प के तहत 48 बेसिक स्कूलों को गोद लेकर उनका व्यापक स्तर पर विकास कराया गया. इसके अलावा 80 डिजिटल क्लासरूम भी तैयार किए गए. अधिकारियों का कहना है कि इस पहल का मकसद बच्चों को बेहतर शिक्षा के साथ तकनीक आधारित संसाधन उपलब्ध कराना है.
इन सुविधाओं का असर अभिभावकों की पसंद में भी दिखाई देने लगा है. कुछ परिवार अपने बच्चों को निजी स्कूलों से निकालकर सरकारी स्मार्ट स्कूलों में दाखिला दिला रहे हैं. इससे सरकारी विद्यालयों में आधुनिक संसाधनों के साथ-साथ शिक्षा के प्रति बढ़ते भरोसे की तस्वीर सामने आती है.
प्राइवेट स्कूल से सरकारी स्मार्ट स्कूल पहुंचा छात्र
सरकारी स्मार्ट स्कूल में दाखिला लेने वाले छात्र प्रकाश कुमार मिश्रा ने बताया कि वह पहले एक निजी स्कूल में पढ़ाई करता था. उसके पिता को जब यहां डिजिटल क्लास की सुविधा के बारे में जानकारी मिली तो उन्होंने उसका दाखिला सरकारी स्कूल में कराने का फैसला किया.
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प्रकाश के मुताबिक, डिजिटल बोर्ड के जरिए पढ़ाई को समझना आसान हो गया है. कक्षा में तकनीक के इस्तेमाल से विषयों को समझने में सुविधा होती है. स्कूल में आरओ का साफ पानी और दूसरी जरूरी सुविधाएं भी मिल रही हैं, जिससे पढ़ाई के माहौल में बदलाव महसूस होता है.
मुरादाबाद के इन सरकारी विद्यालयों में हुए विकास कार्यों की प्रशासनिक स्तर पर भी निगरानी की गई है. जिलाधिकारी समेत अन्य अधिकारियों ने औचक निरीक्षण कर स्कूलों में उपलब्ध व्यवस्थाओं का जायजा लिया. अधिकारियों का कहना है कि मिशन कायाकल्प के जरिए सरकारी स्कूलों को ऐसा वातावरण देने का प्रयास जारी है, जहां बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ आधुनिक सुविधाएं भी मिल सकें.
97 करोड़ के निवेश से बदली सरकारी स्कूलों की तस्वीर
मिशन कायाकल्प के तहत हुए कामों में स्कूल भवनों के विकास के साथ डिजिटल शिक्षा पर भी जोर दिया गया है. 48 विद्यालयों के कायाकल्प और 80 डिजिटल कक्षाओं की स्थापना से सरकारी शिक्षा व्यवस्था को तकनीक से जोड़ने की कोशिश की गई है. प्रशासन का दावा है कि आने वाली पीढ़ी को बेहतर संसाधन उपलब्ध कराने की दिशा में यह महत्वपूर्ण पहल है.
मुरादाबाद में सरकारी स्कूलों को स्मार्ट सुविधाओं से जोड़ने का असर अब सिर्फ स्कूल की इमारत और कक्षाओं तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि विद्यार्थियों के दाखिले में भी इसका प्रभाव नजर आ रहा है. निजी विद्यालयों से बच्चों को यहां लाने वाले अभिभावक इसे सुविधाओं और पढ़ाई के बेहतर माहौल से जोड़कर देख रहे हैं.