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दो नदियों के संगम पर फिर बनी 'डेथ लेक', नेपाल में आ रही है तबाही की दूसरी लहर!

चीन ने नेपाल को एक बार फिर से अलर्ट किया है कि सीमावर्ती इलाकों में ग्लेशियर के कारण आई बाढ़ और भूस्खलन से भारी तबाही मचने के बाद, परी हिस्से में स्थित एक झील के ओवरफ्लो होने से तीन दिनों के भीतर एक और बाढ़ आ सकती है.

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नेपाल के नुवाकोट में फ्लैश फ्लड के बाद हुई तबाही की तस्वीर. (Photo: Reuters)
नेपाल के नुवाकोट में फ्लैश फ्लड के बाद हुई तबाही की तस्वीर. (Photo: Reuters)

तिब्बत में भोटेकोशी नदी में आए लैंड स्लाइड और फ्लैश फ्लड में अबतक 359 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि लगभग 1500 लोग लापता हैं, इनमें से 290 तो भारतीय हैं. लेकिन नेपाल की चौकसी अभी कम नहीं होनी चाहिए. क्योंकि डेंजर अभी टला नहीं है. इसकी वजह यह है कि नेपाल में अपने प्रचंड वेग से कहर बरपाने वाली भोटेकोशी नदी का बहाव एक बार फिर बंद हो गया है. 

नेपाल के रसुवा ज़िले में भोटेकोशी नदी के उद्गम स्थल के पास एक नई झील बनने के कारण नदी के निचले इलाकों में बाढ़ का नया ख़तरा पैदा हो गया है; चीनी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यह झील टूट सकती है.

सैटेलाइट की तस्वीरें बताती हैं कि एक बार फिर से यहां झील बन गई है. अब इसमें पानी जमा हो रहा है. ये झील वहीं पर बनी है जहां 26 अगस्त को लैंड स्लाइड और बाढ़ की घटना हुई थी. 

इस झील में हिमालयी क्षेत्रों से आया पानी भर रहा है. ताजा जानकारी के अनुसार झील ओवर फ्लो भी होना शुरू हो गया है. 

नेपाल के विदेश मंत्रालय को चीन से मिली ताजा जानकारी सैटेलाइट तस्वीरों और शुरुआती विश्लेषण से पता चलता है कि कल जहां बाढ़ आई थी, वहां नदी का बहाव रुकने से एक झील बन गई है. नोटिस में कहा गया है कि यह झील लगातार बढ़ रही है और इसके फटने का भी खतरा है. 

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निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए वार्निंग

इस स्थिति को देखते हुए अगले आदेश तक, भोटेकोशी नदी के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों, यात्रियों, बचाव कार्य में लगे कर्मियों और सभी संबंधित लोगों से अनुरोध है कि वे विशेष सावधानी बरतें और नदी के किनारों व अन्य जोखिम वाले इलाकों से दूर सुरक्षित जगहों पर रहें. 

चीन के जल संसाधन मंत्रालय ने भी यही चेतावनी दी है. अधिकारियों ने कहा है कि भोटेकोशी नदी के उद्गम स्थल के पास एक नई झील बनने के बाद नदी के निचले इलाकों में बाढ़ का नया खतरा पैदा हो गया है. चीनी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि आगे कुछ दिनों में यह झील टूट सकती है.

नेपाल के हाइड्रोलॉजी और मौसम विज्ञान विभाग (DHM) ने कहा कि उसे चीनी पक्ष से नेपाल-चीन सीमा के पास नदी के अवरुद्ध होने वाली जगह पर एक झील बनने की जानकारी मिली है. 

चीनी अधिकारियों का अनुमान है कि गुरुवार सुबह तक झील में लगभग 20 लाख  क्यूबिक मीटर पानी जमा हो गया था, जबकि अगले तीन दिनों में इसमें और 30 लाख क्यूबिक मीटर पानी आ सकता है, जिससे इसके टूटने की आशंका बढ़ गई है. 

दो नदियों के संगम पर बनी मौत की झील

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नेपाल में छोचेन खोला और पुरेपु त्सांगपो नदियों के संगम के पास यह झील बनी है. ये दोनों नदियां तिब्बत से निकलती हैं और नेपाल में बहती हैं, जहां ये भोटे कोशी रिवर सिस्टम का हिस्सा बनती हैं.

यह घटना मध्य नेपाल में आए विनाशकारी अचानक बाढ़ के एक दिन बाद हुई है, जिसमें सैकड़ों लोगों की मौत हो गई थी. 

DHM के बाढ़ पूर्वानुमान विभाग ने चेतावनी दी है कि भोटे कोशी और त्रिशूली नदी क्षेत्रों में एक और बाढ़ का खतरा बना हुआ है. विभाग ने लोगों से नदियों से दूर रहने और अगली सूचना तक सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है. 

विभाग ने भोटे कोशी नदी के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से भी एहतियाती उपाय करने और नदी के किनारों से दूर रहने को कहा है. 

संभावित खतरे को देखते हुए यात्रियों सुरक्षा कर्मियों और खोज व बचाव कार्यों में शामिल लोगों को भी सतर्क रहने की सलाह दी गई है. 

चीनी अधिकारी झील पर नज़र रख रहे हैं और बाढ़ सिमुलेशन और जोखिम का आकलन कर रहे हैं ताकि झील के टूटने से होने वाले संभावित परिणामों का पता लगाया जा सके और आपातकालीन प्रतिक्रिया की तैयारी की जा सके. 

सैटेलाइट तस्वीरों में सामने आई हादसे की वजह

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इस बीच सोमवार और बुधवार के बीच तिब्बत के साथ नेपाल की सीमा की सैटेलाइट तस्वीरों में ग्लेशियर के टूटने के निशान दिखे हैं. जानकारों का कहना है कि इसी वजह से नेपाल में खतरनाक बाढ़ आई. 

यह साफ नहीं है कि ग्लेशियर किस वजह से टूटे, लेकिन नेपाली अधिकारियों ने इलाके में आए भूकंप को इसकी एक वजह बताया है. बाद में U.S. जियोलॉजिकल सर्वे ने कहा कि जिस झटके की बात कही जा रही थी, वह असल में ग्लेशियर की चट्टानों और बर्फ के टूटने से पैदा हुई सिस्मिक एनर्जी (भूकंप से पैदा हुई ऊर्जा) थी, जिसके बाद मलबा बहने लगा था. 

नेपाल के नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी ने बताया कि "ग्लेशियर वाली बाढ़" लेंधे (Lhende) नदी में आई. यह बाढ़ नेपाल-चीन बॉर्डर क्रॉसिंग से उत्तर-पूर्व में लगभग 20 किलोमीटर  दूर हुए भूस्खलन की वजह से आई थी.

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