राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत विदेश दौरे पर हैं. मोहन भागवत अमेरिका और कनाडा के बाद अब ब्रिटेन के दौरे पर जाएंगे. मोहन भागवत का ब्रिटेन दौरा आज यानी दो सितंबर से शुरू हो रहा है. सरसंघचालक मोहन भागवत सात सितंबर तक ब्रिटेन में रहेंगे.
संघ की स्थापना के सौ वर्ष पूरे होने पर वसुधैव कुटुंबकम का संदेश लेकर विदेश दौरे पर निकले सरसंघचालक ब्रिटेन में अलग-अलग धर्मों के लोगों से मुलाकात करेंगे. मोहन भागवत ब्रिटेन में रह रहे भारतीय मूल के लोगों से मुलाकात करेंगे. वह जेविश, ईसाई और सिख धर्म के प्रतिनिधियों से भी संवाद करेंगे.
मोहन भागवत नॉर्थ वेस्ट लंदन में एक विशेष संवाद कार्यक्रम में भी शिरकत करेंगे. हिंदू स्वयंसेवक संघ (ब्रिटेन) की ओर से आयोजित यह कार्यक्रम नॉर्थ वेस्ट लंदन में 6 सितंबर की शाम को प्रस्तावित है. इस दौरान रात्रिभोज का आयोजन भी किया जाना है.
इससे पहले, मोहन भागवत ने अमेरिका दौरे के दौरान न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन में बोलते हुए कहा था कि विविधता में एकता का संदेश देने के लिए भारत है. उन्होंने विविधता का जश्न मनाने, उसका सम्मान करने और उसे स्वीकार करने को जरूरी बताया और कहा कि हमें एकता की भावना हमेशा ध्यान में रखनी चाहिए. यह भारत के डीएनए में है.
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कनाडा के टोरंटो में मोहन भागवत ने कहा कि अगर हिंदू जागेगा, तो दुनिया जागेगी. दूसरों की मदद के लिए हाथ बढ़ाने की भारतीय परंपरा पर जोर देते हुए मोहन भागवत ने कहा कि भारत के उत्थान का मतलब अधिक एकजुट और अधिक स्वतंत्र मानवता है.
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उन्होंने इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत महाशक्ति नहीं था, लेकिन एक समय उसे महाशक्ति कहा जा सकता था. भारत ने दुनिया की सेवा की और अपने चरित्र के कारण विष्णु गुरु बना, महाशक्ति नहीं.