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इस्लामाबाद शांति वार्ता फिर बेनतीजा! बिना बातचीत वापस लौटे ईरानी विदेश मंत्री, US ने भी रद्द किया PAK दौरा

ईरान ने अमेरिका से सीधे बातचीत से इनकार करते हुए पाकिस्तान के जरिए वार्ता की रणनीति अपनाई है. अराघची की इस्लामाबाद यात्रा और अमेरिकी डेलिगेशन के संभावित दौरे से गतिरोध तोड़ने की कोशिश तेज हुई, लेकिन होर्मुज संकट अब भी सबसे बड़ा अड़ंगा बना हुआ है. अराघची अमेरिकी डेलिगेशन के बिना पाकिस्तान आए हुए ही इस्लामाबाद से रवाना हो गए.

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ईरान ने अमेरिका से सीधे बात से किया इंकार (Photo- X/@MIshaqDar50)
ईरान ने अमेरिका से सीधे बात से किया इंकार (Photo- X/@MIshaqDar50)

ईरान और अमेरिका के बीच जंग और तनाव के बीच शनिवार को नई उम्मीद की किरण दिखी थी. लेकिन अब वह उम्मीद टूट गई है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची अपनी एक बड़ी टीम के साथ पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पहुंचे थे. पाकिस्तान ने दोनों देशों के बीच बिचौलिया यानी मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाला था. लेकिन, ईरान का डेलिगेशन बिना अमेरिकी प्रतिनिधित्व के इस्लामाबाद में आए हुए ही पाकिस्तान से चले गए. अब अमेरिकी प्रतिनिधित्व ने भी पाकिस्तान का दौरा रद्द करने का ऐलान किया है.

ईरान सीधे अमेरिका से बात करने को तैयार नहीं है इसलिए पाकिस्तान दोनों के बीच संदेश पहुंचाने का काम कर रहा. अमेरिका से भी स्पेशल दूत इस्लामाबाद आने वाले थे. लेकिन ईरानी प्रतिनिधित्व चले गए हैं तो उन्होंने भी अपने दौरे को रद्द कर दिया है.

अराघची और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की मुलाकात हुई. इस मुलाकात के बाद तेहरान के प्रतिनिधत्व पाकिस्तान से चले गए. यह जानकारी न्यूयॉर्क पोस्ट और इजरायली मीडिया के हवाले से सामने आई है.

शनिवार को अब्बास अराघची एक बड़ी टीम के साथ पाकिस्तान पहुंचे थे. वहां उनकी मुलाकात पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से हुई. इस मीटिंग में पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार और सेना प्रमुख जनरल सैयद आसिम मुनीर भी मौजूद थे.

अराघची इस्लामाबाद के बाद मस्कट यानी ओमान और मॉस्को यानी रूस भी जाएंगे. यानी ईरान एक साथ कई देशों से संपर्क करके रास्ता निकालने की कोशिश कर रहा है.

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ईरान ने सीधी बात से किया इनकार

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने साफ कहा कि इस दौर में ईरान और अमेरिका के बीच कोई सीधी मीटिंग नहीं होगी. ईरान पाकिस्तान के जरिए अपनी बात और अपनी चिंताएं अमेरिका तक पहुंचाएगा.

उन्होंने अमेरिका के इस पूरे कदम को 'अमेरिका का थोपा हुआ हमलावर युद्ध' बताया और कहा कि पाकिस्तान शांति बहाल करने की कोशिश में जुटा है.

यह भी पढ़ें: अमेरिका की खुली पोल! नाकेबंदी के बीच ईरान यूं दे रहा है चकमा, इस ट्रिक से दुनिया तक पहुंचा रहा तेल

ईरान के फैसले पर डोनाल्ड ट्रंप ने क्या कहा?

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका-ईरान बातचीत को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में 18 घंटे की लंबी यात्रा करके बातचीत करने का कोई मतलब नहीं है. उनके मुताबिक, फोन पर भी बातचीत उतनी ही अच्छी तरह हो सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि अगर ईरान बात करना चाहता है, तो वह खुद फोन कर सकता है. अमेरिका सिर्फ बैठकर बेकार की बातचीत के लिए यात्रा नहीं करेगा. जब उनसे पूछा गया कि क्या इसका मतलब है कि अमेरिका फिर से युद्ध शुरू करने जा रहा है, तो ट्रंप ने साफ किया कि ऐसा नहीं है. उन्होंने कहा कि अभी इस बारे में कोई फैसला नहीं लिया गया है. ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका मजबूत स्थिति में है. उनके शब्दों में, 'हमारे पास सारे पत्ते हैं' यानी अमेरिका के पास बातचीत में बढ़त है. उन्होंने कहा कि वे बेकार की चर्चा में समय नहीं गंवाना चाहते.

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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने क्या कहा?

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस्लामाबाद में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और उनके प्रतिनिधियों से मुलाकात के बाद सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट किया है. उन्होंने कहा कि यह मुलाकात काफी अच्छी और पॉजिटिव रही. दोनों नेताओं के बीच मौजूदा क्षेत्रीय परिस्थितियों पर खुलकर चर्चा हुई. साथ ही, पाकिस्तान और ईरान के आपसी संबंधों को और मजबूत करने पर भी बात हुई. यानी सिर्फ मौजूदा तनाव ही नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने के मुद्दों पर भी बातचीत हुई.

अमेरिका की तरफ से कौन आएगा?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले बताया था कि उनके खास दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर इस्लामाबाद आने वाले हैं. जेरेड कुशनर ट्रंप के दामाद भी हैं और उनके करीबी सलाहकार भी. 

व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने पुष्टि की थी कि बात सीधी होगी लेकिन पाकिस्तान इसे आगे बढ़ाने में मदद करेगा. उन्होंने ये भी बताया था कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वांस वॉशिंगटन से इस पूरी कोशिश पर नजर रखेंगे और विदेश मंत्री मार्को रुबियो और राष्ट्रीय सुरक्षा टीम से तालमेल बनाए रखेंगे. लेकिन ईरान के विदेश मंत्री के जाने के बाद अमेरिकी डेलिगेशन अब पाकिस्तान नहीं आ रहे हैं.

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राष्ट्रपति ट्रंप ने क्या कहा?

राष्ट्रपति ट्रंप ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को दिए एक फोन इंटरव्यू में कहा कि ईरान एक प्रस्ताव तैयार कर रहा है. उन्होंने कहा 'वो एक ऑफर बना रहे हैं, हमें देखना होगा.' उन्होंने ये भी कहा कि उन्हें अभी उस प्रस्ताव की पूरी जानकारी नहीं मिली है.

ट्रंप ने साफ किया कि किसी भी समझौते के लिए दो शर्तें जरूरी हैं. पहली यह कि ईरान अपना समृद्ध यूरेनियम छोड़ दे. दूसरी यह कि होर्मुज से तेल के जहाजों की आवाजाही बिना रोक-टोक के हो.

इनपुट: न्यूयॉर्क पोस्ट, इजरायली मीडिया

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