ईरान और इजरायल के बीच की अदावत किसी से छिपी हुई नहीं है. अमेरिका के साथ मिलकर ईरान पर इजरायल के हमलों से ईरान काफी तिलमिलाया हुआ है. इस बीच ईरान ने इजरायल के लिए जासूसी के आरोप में दोषी पाए गए एक उच्च अधिकारी मेहदी फरीद को फांसी पर लटका दिया है.
ईरान की न्यायपालिका की ओर से जारी आधिकारिक बयान के मुताबिक, मेहदी फरीद जरूरी बुनियादी इन्फ्रास्ट्रक्चर को हमलों से बचाने के एक निकाय पैसिव डिफेंस कमेटी के निदेशक थे.
अदालत ने मेहदी को इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद के साथ व्यापक सहयोग और जासूसी करने का दोषी पाया. उसे 'करप्शन ऑन अर्थ' के तहत मौत की सजा सुनाई गई, जो ईरान में सबसे बड़े अपराध में से एक माना जाता है.
बयान में कहा गया कि फरीद ने साइबर के जरिए इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद से संपर्क किया और अपने अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए अत्यंत संवेदनशील खुफिया एवं सैन्य जानकारी लीक की. मेहदी के उच्च पद की वजह से इजरायली अधिकारियों ने पहले उन पर जल्दी यकीन कर लिया था.
यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब ईरान में फांसी की सजा के मामलों में बेतहाशा बढ़ोतरी देखी जा रही है, जिससे मानवाधिकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में गहरी चिंता पैदा है. पर्यवेक्षकों का मानना है कि अमेरिका और इजरायल के साथ सैन्य तनाव बढ़ने के बाद ईरानी सरकार ने मौत की सजा बढ़ा दी है ताकि डर पैदा किया जा सके.
मानवाधिकार रिपोर्ट्स के अनुसार, मौजूदा समय में सिर्फ जासूसी का दोषी पाए जाने पर ही फांसी नहीं दी जा रही बल्कि जनवरी के विरोध प्रदर्शनों से जुड़े बंदियों को भी इसमें शामिल किया गया है. इससे यह आरोप और मजबूत होते हैं कि न्यायपालिका युद्धकाल में अदालतों का इस्तेमाल राजनीतिक हथियार के रूप में कर रही है.
अंतरराष्ट्रीय संगठनों का कहना है कि इन मुकदमों में पारदर्शिता के बुनियादी मानकों का भी पालन नहीं किया जा रहा है और बंद कमरों में फैसले सुनाए जा रहे हैं, जो अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संधियों का खुला उल्लंघन है. ऐसे में मेहदी फरीद जैसे उच्च अधिकारी को फांसी दिया जाना चर्चा में बना हुआ है.