ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हत्या की साजिश को लेकर बड़ा बयान दिया है. न्यूयॉर्क में पत्रकारों से बातचीत के दौरान पेजेशकियान ने कहा कि ईरानी सरकार ने खुले तौर पर या गुप्त रूप से कभी भी ट्रंप या उनके परिवार के किसी सदस्य की हत्या करने की कोशिश नहीं की. उनका यह बयान ऐसे वक्त आया है, जब अमेरिका पहले भी ईरान पर ट्रंप की हत्या की साजिश रचने के आरोप लगा चुका है.
पेजेशकियान ने कहा कि ट्रंप या उनके परिवार को निशाना बनाना कभी भी ईरानी सरकार की नीति नहीं रही. वहीं अमेरिका में ईरान पर ट्रंप की हत्या की साजिश के आरोप लगते रहे हैं. पिछले साल अमेरिकी न्याय विभाग ने भी ट्रंप की हत्या की कथित साजिश को नाकाम किए जाने का दावा करते हुए आरोप तय किए थे.
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ट्रंप की हत्या की साजिश पर क्या बोले पेजेशकियान?
पेजेशकियान ने कहा कि ईरानी सरकार की ऐसी कोई नीति नहीं है कि वह ट्रंप या उनके परिवार के सदस्यों की हत्या करे. उनका यह बयान न्यूयॉर्क के एक होटल में पत्रकारों के साथ हुई बातचीत के दौरान आया. वह UN महासभा में भाषण देने के एक दिन बाद पत्रकारों के सवालों का जवाब दे रहे थे.
इससे पहले अमेरिकी अधिकारियों की ओर से ईरान पर ट्रंप को निशाना बनाने की कोशिश के आरोप लगाए गए थे. अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, ईरान से जुड़े खतरों को लेकर ट्रंप की सुरक्षा बढ़ाई गई है. ईरानी कट्टरपंथी मीडिया में भी ट्रंप और उनके परिवार को लेकर धमकी भरी सामग्री सामने आती रही है.
'हम बेहद मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं'
पेजेशकियान ने इस दौरान ईरान की आर्थिक हालत और अमेरिकी प्रतिबंधों पर भी बात की. उन्होंने कहा कि अमेरिकी प्रतिबंधों और जारी जंग ने ईरान की अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव डाला है. उन्होंने मौजूदा हालात को बेहद मुश्किल बताते हुए अमेरिकी प्रतिबंधों को 'साइलेंट मर्डरस कैंपेन' करार दिया.
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उन्होंने यह भी कहा कि ईरान किसी समझौते के लिए तैयार है. इसी बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि तेहरान ने अमेरिका के सामने एक प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत कुछ शर्तें पूरी होने पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोला जा सकता है और बातचीत फिर शुरू हो सकती है.
पेजेशकियान ने यह भी कहा कि ईरान अमेरिकी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है. UN में अपने भाषण के दौरान भी उन्होंने बातचीत और कूटनीति के लिए तैयार होने की बात कही थी, लेकिन बल प्रयोग की भाषा स्वीकार करने से इनकार किया था.