हैदराबाद स्थित देश के प्रतिष्ठित कानून संस्थान नालसार लॉ यूनिवर्सिटी (NALSAR University of Law) में दिल्ली दंगे के आरोपी और पूर्व छात्र नेता उमर खालिद पर बनी डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है. विश्वविद्यालय कैंपस में छात्रों के एक समूह ने फिल्म निर्माता ललित वचानी द्वारा निर्देशित डॉक्यूमेंट्री “प्रिजनर नंबर 626710 इज प्रेजेंट” (Prisoner No. 626710 is Present) की विशेष स्क्रीनिंग आयोजित की.
बुधवार (23 सितंबर) की शाम को हुई इस स्क्रीनिंग के बाद कैम्पस के भीतर मानवाधिकारों, कानून की निष्पक्ष प्रक्रिया और विचाराधीन कैदियों की लंबी हिरासत को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है.
'एकजुटता' के नाम पर स्क्रीनिंग, सिर्फ छात्रों की थी एंट्री
यह पूरा आयोजन छात्रों द्वारा निजी तौर पर इंडिपेंडेंट लेवल पर रखा गया था, जिसमें केवल यूनिवर्सिटी के छात्र ही शामिल हुए. आयोजक छात्रों का कहना था कि यह स्क्रीनिंग एक 'एकजुटता' (Solidarity) का संदेश देने के लिए आयोजित की गई थी. इसका मकसद केवल एक फिल्म दिखाना नहीं, बल्कि देश में विचाराधीन कैदियों (Undertrials) की स्थिति, मौलिक अधिकारों, जांच एजेंसियों की जवाबदेही और बिना ट्रायल के सालों तक जेल में बंद रखने जैसे गंभीर कानूनी पहलुओं पर बातचीत का माहौल बनाना था.
स्क्रीनिंग के बाद उठी तीखी बहस
डॉक्यूमेंट्री खत्म होने के बाद छात्रों के बीच एक ओपन डिस्कशन रखा गया. इसमें इस बात पर गहन चर्चा हुई कि किस तरह कानूनी प्रक्रिया में देरी नागरिकों के मौलिक अधिकारों को प्रभावित करती है.
छात्रों ने सवाल उठाया कि जब किसी मामले में ट्रायल शुरू होने में ही लंबा वक्त लग जाता है, तो न्याय प्रणाली की विश्वसनीयता पर क्या असर पड़ता है.
कौन हैं उमर खालिद और क्या है यह डॉक्यूमेंट्री?
उमर खालिद जेएनयू (JNU) के पूर्व छात्र नेता हैं, जिन्हें सितंबर 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों की कथित साज़िश में शामिल होने के आरोप में गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत गिरफ्तार किया गया था. वे पिछले 6 सालों से जेल में बंद हैं.
ललित वचानी द्वारा बनाई गई डॉक्यूमेंट्री “प्रिजनर नंबर 626710 इज प्रेजेंट” उमर खालिद की गिरफ्तारी, जेल के दिनों और उनके मामले में चल रही कानूनी प्रक्रियाओं पर केंद्रित है.
लॉ यूनिवर्सिटी के कैम्पस में इस तरह की स्क्रीनिंग आयोजित होने के बाद यह मामला अब चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि नालसार देश के शीर्ष लॉ कॉलेजों में गिना जाता है और यहां के छात्रों द्वारा ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर स्टैंड लेना काफी अहम माना जा रहा है.