जब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ बातचीत के लिए वॉशिंगटन पहुंचे, तो हजारों तिब्बती और अन्य चीनी प्रवासी समुदाय के लोग सड़कों पर उतर आए. जिससे अमेरिकी राजधानी, बीजिंग के मानवाधिकार रिकॉर्ड के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का केंद्र बन गई.
आयोजकों ने बताया कि पूरे उत्तरी अमेरिका से 2,000 से अधिक तिब्बती इस दिन भर चले प्रदर्शन में शामिल हुए. उनके साथ उइगर, हांगकांग के लोग, दक्षिणी मंगोलियाई, चीनी लोकतंत्र कार्यकर्ता और मानवाधिकार समर्थक भी मौजूद थे.
प्रदर्शनकारियों ने चीनी दूतावास के बाहर प्रदर्शन के साथ शुरुआत की और फिर वॉशिंगटन से होते हुए अमेरिकी कैपिटल तक मार्च किया, जहां दोपहर 1 बजे एक बड़ी रैली हुई. दिन का समापन फ्रैंकलिन पार्क में एक और प्रदर्शन और कैंडललाइट मार्च के साथ होगा.
ये विरोध-प्रदर्शन उन चिंताओं को लेकर आयोजित किए जा रहे हैं जिन्हें कार्यकर्ता तिब्बत, शिनजियांग, दक्षिणी मंगोलिया और हांगकांग में चीनी सरकार का दमन बताते हैं. साथ ही चीन में लोकतंत्र और मौलिक स्वतंत्रता पर लगी पाबंदियों का भी विरोध किया जा रहा है.
तिब्बती-अमेरिकी समुदाय की भागीदारी का नेतृत्व 'तिब्बती यूथ कांग्रेस' और 'कैपिटल एरिया तिब्बती एसोसिएशन' कर रहे हैं, जिन्हें 'इंटरनेशनल कैंपेन फॉर तिब्बत', 'स्टूडेंट्स फॉर ए फ्री तिब्बत', 'तिब्बती नेशनल कांग्रेस' और अन्य संगठनों का समर्थन प्राप्त है.
इस आंदोलन में उइगर, दक्षिणी मंगोलियाई, हांगकांग, ताइवानी और चीनी लोकतंत्र समर्थक समुदायों के प्रतिनिधि भी एक साथ आ रहे हैं.
ये विरोध-प्रदर्शन ऐसे समय में हो रहे हैं जब शी वॉशिंगटन में ट्रंप से मिल रहे हैं. 'इंटरनेशनल कैंपेन फॉर तिब्बत' का कहना है कि वह 30 मानवाधिकार संगठनों के उस गठबंधन में शामिल हो गया है जो ट्रंप प्रशासन से आग्रह कर रहा है कि शी के साथ बातचीत में तिब्बत और मानवाधिकारों को मुख्य मुद्दा बनाया जाए.