भारत ने मंगलवार को सिंधु जल संधि को लेकर पाकिस्तान की ओर से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को भेजे गए पत्र पर कड़ी आपत्ति जताई. विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान पर तथ्यों को गलत तरीके से पेश करने और अपने पक्ष में प्रचार करने का आरोप लगाया. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान जिस फैसले को स्थायी मध्यस्थता न्यायालय यानी PCA का फैसला बता रहा है, भारत उसे मान्यता नहीं देता.
जायसवाल ने कहा कि भारत की इस मामले में स्थिति पहले से साफ है. भारत का कहना है कि जिस कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन ने यह फैसला दिया है, उसका गठन सिंधु जल संधि की शर्तों के खिलाफ हुआ है. इसलिए भारत ने न तो इस संस्था को मान्यता दी है और न ही इसकी कार्यवाही में हिस्सा लिया है. भारत के मुताबिक, इस कोर्ट को भारत के संप्रभु फैसलों पर कोई अधिकार नहीं है.
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स्थायी मध्यस्थता न्यायालय यानी PCA क्या है?
स्थायी मध्यस्थता न्यायालय यानी Permanent Court of Arbitration एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है. यह अलग-अलग देशों, सरकारी संस्थाओं और निजी पक्षों के बीच विवादों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने के लिए मध्यस्थता और कानूनी मदद उपलब्ध कराता है. हालांकि, भारत का कहना है कि सिंधु जल संधि से जुड़े इस मामले में जिस कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन का गठन हुआ है, वह संधि की शर्तों के मुताबिक नहीं है.
31 अगस्त को आया था कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन का फैसला
31 अगस्त को कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन ने सिंधु जल संधि को लेकर एक अवॉर्ड जारी किया था. इसमें कहा गया था कि संधि लागू है और भारत इसे एकतरफा तरीके से स्थगित नहीं कर सकता. भारत ने उसी समय इस फैसले को खारिज कर दिया था और कहा था कि इस कोर्ट के फैसले का भारत के संप्रभु फैसलों पर कोई असर नहीं पड़ेगा.
सिंधु जल संधि भारत और पाकिस्तान के बीच 1960 में हुई थी. यह संधि सिंधु नदी प्रणाली के पानी के इस्तेमाल से जुड़े नियम तय करती है. दोनों देशों के बीच कई विवादों के बावजूद यह समझौता लंबे समय तक लागू रहा.
पाकिस्तान को आतंकवाद पर ठोस एक्शन की नसीहत
ब्रीफिंग के दौरान रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान को सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ भरोसेमंद कार्रवाई करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को एक्शन और पक्का कमिटमेंट दिखाने की जरूरत है, तभी दुनिया को भरोसा होगा कि इस्लामाबाद वही करेगा जो वह कहता है.
जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान को अपने दावों को साबित करने के लिए जमीन पर ठोस कदम उठाने होंगे. भारत की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब दोनों देशों के बीच सिंधु जल संधि को लेकर विवाद बना हुआ है और पाकिस्तान इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठा रहा है.
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पहलगाम हमले के बाद भारत ने संधि स्थगित की
भारत ने अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का फैसला किया था. भारत का कहना है कि संधि को तब तक बहाल नहीं किया जाएगा, जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ भरोसेमंद और ठोस कार्रवाई नहीं करता.
इस तरह सिंधु जल संधि को लेकर दोनों देशों के बीच विवाद अब अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंच गया है. पाकिस्तान कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन के फैसले को आधार बना रहा है, जबकि भारत इस कोर्ट के गठन और अधिकार क्षेत्र को ही स्वीकार नहीं करता.